अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम से कथित चोरी के मामले में पुलिस की विवेचना अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। मामले में नामजद आठ आरोपितों के खिलाफ जांच के बाद अब पुलिस आरोपपत्र को अंतिम रूप देने में जुटी है। इसी बीच विवेचना के दौरान सामने आए दो और नामों को मामले में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। पुलिस इन दोनों के संबंध में सामने आए साक्ष्यों और उनकी भूमिका का सत्यापन कर चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि चार्जशीट दाखिल होने से पहले इन दोनों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
मामले में पुलिस की ओर से 25 सितंबर से पहले न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। 25 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज होने के 90 दिन पूरे हो रहे हैं और इसी समयसीमा को देखते हुए विवेचना को जल्द पूरा करने पर जोर है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस 22 सितंबर के आसपास चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। केस डायरी में शामिल दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज, आरोपितों के बयान, बरामदगी और अन्य साक्ष्यों का मिलान कर आरोपपत्र को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का यह मामला जून 2026 में सामने आया था, जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से पुलिस में शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई। एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया था। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडे के नाम शामिल हैं। प्राथमिकी के बाद सभी आठ नामजद आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था।
जांच की शुरुआत में मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को खंगाला गया था। पुलिस के अनुसार 27 अप्रैल से पांच जून के बीच करीब 40 दिनों की अवधि में 70 से अधिक ऐसी गतिविधियां सामने आईं, जिन्हें चढ़ावे की रकम को छिपाने या निकालने से जोड़कर देखा गया। अब विवेचना के दौरान पुलिस ने इन फुटेज को आरोपितों के बयानों और बरामदगी से जोड़कर घटनाक्रम की कड़ियां तैयार करने का दावा किया है।
जांच में करीब 79 लाख रुपये की शुरुआती बरामदगी की बात भी सामने आई थी। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपितों से पूछताछ में कथित तौर पर रकम के बंटवारे, उसे छिपाने और इस्तेमाल किए जाने से जुड़े कई पहलुओं की जानकारी जुटाई गई। जांच में तीन और चार पहिया वाहनों के साथ एक बाइक, आभूषण और कुछ दस्तावेज भी सामने आए हैं। पुलिस इन संपत्तियों और बरामद सामान को कथित चोरी की रकम से जोड़ने वाले साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है।
विवेचना के दौरान दर्ज बयानों में चढ़ावे की रकम की गणना के दौरान पैसे निकालने और उन्हें अलग-अलग तरीकों से छिपाने की बात सामने आने की जानकारी दी गई है। पुलिस इन बयानों को सीसीटीवी फुटेज और बरामदगी से मिलाकर देख रही है। किसी आरोपित के बयान को अपने आप में अंतिम प्रमाण मानने के बजाय जांच एजेंसी अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से उसकी पुष्टि करने में जुटी है। यही वजह है कि चार्जशीट दाखिल करने से पहले केस डायरी में प्रत्येक आरोपित की भूमिका को स्पष्ट करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस मामले की जांच में अब दो नए नाम सामने आने की बात सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार पूछताछ और विवेचना के दौरान इन दोनों के नाम सामने आए और पुलिस ने उनके संबंध में सत्यापन किया है। अब इन्हें भी मुकदमे की आगे की कार्रवाई में शामिल करने की तैयारी है। हालांकि जब तक पुलिस औपचारिक रूप से इनके खिलाफ कार्रवाई और आरोपपत्र में भूमिका स्पष्ट नहीं करती, तब तक इनके खिलाफ लगे आरोपों को अंतिम नहीं माना जा सकता।
विवेचना के अंतिम चरण में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती साक्ष्यों की कानूनी मजबूती सुनिश्चित करना है। जांच अधिकारी को अदालत में आरोपों को साबित करने के लिए सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन, बरामदगी, दस्तावेज और गवाहों के बयानों के बीच संबंध स्थापित करना होगा। यही कारण है कि चार्जशीट दाखिल करने से पहले केस डायरी में प्रत्येक घटनाक्रम और आरोपित की कथित भूमिका को क्रमवार दर्ज किया जा रहा है।
इस मामले में पूर्व कर्मचारी महिपाल सिंह का बयान भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई एसआईटी की जांच के दौरान क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी ने वीडियो कॉलिंग के माध्यम से महिपाल सिंह का क्रमवार बयान दर्ज किया था। रिपोर्टों के मुताबिक उनके बयान में चढ़ावे की रकम से जुड़ी घटनाओं और कुछ प्रमुख लोगों के नाम का उल्लेख हुआ है। पुलिस इन बयानों का मिलान अन्य साक्ष्यों के साथ कर रही है।
मामले की जांच केवल आरोपितों के बयानों तक सीमित नहीं है। पुलिस ने मंदिर परिसर की गतिविधियों को समझने के लिए सीसीटीवी रिकॉर्डिंग का भी व्यापक विश्लेषण किया है। किस समय कौन व्यक्ति चढ़ावे की गणना या उससे संबंधित प्रक्रिया में मौजूद था, किस स्थान पर उसकी गतिविधियां रिकॉर्ड हुईं और उसके बाद रकम या अन्य सामान की आवाजाही कैसे हुई, इन बिंदुओं को जांच में जोड़ा गया है। इससे पुलिस घटनाक्रम की पूरी कड़ी तैयार करने का प्रयास कर रही है।
राम मंदिर में चढ़ावे और दान की व्यवस्था से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठे थे। मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और रोजाना चढ़ावे के रूप में नकदी तथा अन्य सामग्री प्राप्त होती है। ऐसे में चढ़ावे की गिनती, सुरक्षित रखे जाने और उसके रिकॉर्ड की व्यवस्था बेहद संवेदनशील मानी जाती है।
जांच एजेंसी का प्रयास है कि अदालत में आरोपपत्र दाखिल करते समय केस से जुड़े प्रमुख साक्ष्य व्यवस्थित तरीके से पेश किए जा सकें। इसी वजह से विवेचना को अंतिम रूप देने से पहले पुलिस केस डायरी में शामिल प्रत्येक दस्तावेज और बयान की समीक्षा कर रही है। जो नए नाम सामने आए हैं, उनके संबंध में भी साक्ष्यों की पुष्टि इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आठ नामजद आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उनके खिलाफ अलग-अलग स्तर पर जमानत अर्जियां भी अदालत में दाखिल की गई हैं। सितंबर में कई आरोपितों की जमानत अर्जियों पर सुनवाई हुई या निर्धारित की गई। इससे एक ओर जहां न्यायालय में आरोपितों की कानूनी लड़ाई चल रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में जुटी है।
पुलिस की ओर से 25 सितंबर की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई तेज की गई है। कानून के तहत गिरफ्तार आरोपितों से जुड़े मामलों में निर्धारित अवधि के भीतर आरोपपत्र दाखिल करना महत्वपूर्ण होता है। इसी कारण विवेचना लगभग पूरी होने के बाद अब दस्तावेजों को अंतिम रूप देने और आरोपितों की भूमिका तय करने का काम किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस 22 सितंबर से पहले भी आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर सकती है।
मामले की शुरुआत में एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ी थी। जून में एसआईटी ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की थी और इसके बाद रामजन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज हुई। एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया और सभी की गिरफ्तारी की गई। इसके बाद पुलिस की विवेचना में सीसीटीवी फुटेज, बयानों और बरामदगी के आधार पर कथित घटनाक्रम को विस्तार से जोड़ने का प्रयास किया गया।
अब पूरे मामले की नजर चार्जशीट पर है। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पुलिस ने किन-किन आरोपितों के खिलाफ कौन-कौन से आरोप और साक्ष्य अदालत के सामने रखे हैं। दो नए नामों को किस भूमिका के आधार पर मामले में शामिल किया जाता है, यह भी चार्जशीट में सामने आ सकता है। इसके बाद अदालत में साक्ष्यों की जांच और आरोपितों की कानूनी दलीलों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के कारण शुरू से ही बेहद संवेदनशील रहा है। इसलिए जांच में सामने आए आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा। फिलहाल पुलिस का दावा है कि विवेचना अंतिम चरण में है और उपलब्ध साक्ष्यों को व्यवस्थित कर आरोपपत्र तैयार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में चार्जशीट दाखिल होने के साथ मामले की जांच का अगला चरण शुरू होगा।












