महंगाई के बीच बरेली में पिछले तीन महीनों में अरहर, मसूर, उड़द, राजमा और चना दाल के दाम बढ़े हैं। मांग और आपूर्ति में अंतर को कारोबारियों ने कीमतों में बदलाव की प्रमुख वजह बताया है।
बरेली: महंगाई के बीच दालों की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर असर पड़ रहा है। पिछले तीन महीनों में अरहर, मसूर, उड़द, राजमा और चना दाल के भाव बढ़े हैं। इनमें अरहर, उड़द और राजमा के दाम 10 रुपये प्रति किलो तक बढ़े हैं। हालांकि कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में तेजी मामूली है और मांग-आपूर्ति के अंतर से भाव में बदलाव आया है।
तीन महीने में दालों के भाव में बढ़ोतरी
बरेली में पिछले तीन महीनों के दौरान कई प्रमुख दालों के दाम बढ़ गए हैं। अरहर दाल का भाव 110 रुपये से बढ़कर 120 रुपये प्रति किलो हो गया है। इसी तरह मसूर दाल की कीमत 120 रुपये से बढ़कर 125 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है।

उड़द दाल के दाम में भी 10 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। यह तीन महीने पहले 110 रुपये प्रति किलो थी, जो अब 120 रुपये प्रति किलो बिक रही है। राजमा की कीमत भी 120 रुपये से बढ़कर 130 रुपये प्रति किलो हो गई है।
चना दाल के भाव में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी हुई है। इसकी कीमत 80 रुपये से बढ़कर 85 रुपये प्रति किलो हो गई है। इन बढ़ी हुई कीमतों का असर रोजमर्रा के घरेलू खर्च पर पड़ रहा है।
मांग और आपूर्ति के अंतर से बदले भाव
मारवाड़ीगंज के दाल व्यापारी कैलाश मित्तल के अनुसार, दालों की कीमतों में बहुत अधिक तेजी नहीं आई है। हालांकि बाजार में मांग बनी हुई है और आवक तथा मांग के बीच अंतर होने के कारण कुछ दालों के भाव में बढ़ोतरी हुई है।
व्यापारी के मुताबिक आने वाले दिनों में मंडियों से होने वाली आवक और बाजार में आपूर्ति की स्थिति के आधार पर दालों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल बाजार में दालों की मांग बनी हुई है।
राजमा सबसे महंगी, चना सबसे सस्ती
वर्तमान भाव के लिहाज से राजमा 130 रुपये प्रति किलो के साथ दी गई दालों में सबसे महंगी है। इसके बाद मसूर 125 रुपये और अरहर तथा उड़द 120 रुपये प्रति किलो के भाव पर हैं। चना दाल की कीमत 85 रुपये प्रति किलो है, जो इस सूची में सबसे कम है।
वहीं, सफेद चने के भाव में बढ़ोतरी के बजाय कमी आई है। तीन महीने पहले सफेद चना 115 रुपये प्रति किलो था, जबकि अब इसका भाव घटकर 110 रुपये प्रति किलो हो गया है।
दालों की कीमतों में बदलाव ऐसे समय हुआ है जब खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण आम परिवारों के मासिक बजट पर दबाव बना हुआ है। बाजार में आगे कीमतों की दिशा मंडियों से होने वाली आवक और मांग-आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगी।













