तमिलनाडु सरकार ने बजट और विधानसभा घोषणाओं के जरिए ₹79,219.06 करोड़ के खर्च की योजना रखी है। इसमें बिजली, सड़क, ऊर्जा, कृषि और कल्याण योजनाएं शामिल हैं। बढ़ते कर्ज और घाटे के बीच विपक्ष ने खर्च को लेकर वित्तीय जोखिम पर सवाल उठाए हैं।
चेन्नई: तमिलनाडु की मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलागा वेत्री कझगम (TVK) सरकार ने अपने पहले बजट और विभागवार अनुदान पर विधानसभा में हुई चर्चाओं के दौरान कुल ₹79,219.06 करोड़ के खर्च की घोषणाएं की हैं। सरकार ने इसे बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, कृषि और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े बड़े बदलावों की दिशा में कदम बताया है। हालांकि, विपक्ष ने राज्य के पहले से बढ़े हुए कर्ज और राजकोषीय घाटे के बीच इस अतिरिक्त खर्च को लेकर सवाल उठाए हैं।
17 बड़ी घोषणाओं में बुनियादी ढांचे से लेकर कृषि तक पर जोर
28 दिन चले विधानसभा के बजट सत्र का समापन 8 सितंबर को हुआ। इस दौरान नियम 110 के तहत अलग-अलग विभागों से जुड़ी 17 बड़ी घोषणाएं की गईं। इनमें बिजली और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, थूथुकुडी सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट, सड़क एवं शहरी बुनियादी ढांचा, शहरी सड़क मरम्मत, नया विधानसभा-सचिवालय परिसर और कृषि राहत जैसी योजनाएं शामिल हैं। इन घोषणाओं का कुल मूल्य ₹79,219.06 करोड़ बताया गया है।
सबसे बड़े प्रस्तावों में ₹33,066 करोड़ की बिजली ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर योजना, ₹20,800 करोड़ का थूथुकुडी सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट, ₹11,000 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क-शहरी विकास पैकेज, ₹1,850 करोड़ की शहरी सड़क मरम्मत और जंक्शन आधुनिकीकरण योजना तथा ₹1,200 करोड़ का नया विधानसभा-सह-सचिवालय परिसर शामिल है।
बिजली क्षेत्र में ₹55,628 करोड़ के निवेश की योजना
सरकार की योजनाओं में बिजली और ऊर्जा क्षेत्र सबसे बड़े हिस्सों में से एक है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, बिजली और ऊर्जा के विस्तार के लिए कुल ₹55,628 करोड़ के ओवरहॉल की योजना है।
इसमें थूथुकुडी सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर स्टेशन के लिए ₹20,800 करोड़, राज्यव्यापी ट्रांसमिशन नेटवर्क के आधुनिकीकरण के लिए ₹33,066 करोड़ और चेन्नई में शहरी पावर ग्रिड अपग्रेड के लिए ₹1,762 करोड़ शामिल हैं। थूथुकुडी परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आगे बढ़ाने की योजना बताई गई है।
सरकार का कहना है कि इन निवेशों का उद्देश्य राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ बिजली ढांचे को आधुनिक बनाना है।
₹57,703 करोड़ का पूंजीगत खर्च चरणबद्ध तरीके से
सरकारी अधिकारी के मुताबिक, कुल ₹57,703 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर आउटले एकमुश्त खर्च नहीं किया जाएगा। इसे अगले 3 से 5 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
पहले 12 महीनों में DPR तैयार करने, जमीन से जुड़ी मंजूरियों, विधानसभा परिसर के शुरुआती काम और शुरुआती तकनीकी परियोजनाओं के लिए लगभग ₹1,500-2,000 करोड़ खर्च किए जाने का अनुमान है।
अगले 1 से 3 वर्षों में चेन्नई के बिजली उन्नयन और क्षेत्रीय ट्रांसमिशन लाइनों के लिए करीब ₹15,000-20,000 करोड़ खर्च किए जाने की योजना है। वहीं, 3 से 5 साल या उससे अधिक समय में बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर ₹35,000 करोड़ से अधिक धीरे-धीरे खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।
मुफ्त बिजली और LPG योजना पर भी खर्च
सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना जारी रखी है। इस पर हर साल करीब ₹1,730 करोड़ का खर्च आने का अनुमान है।
इसके अलावा अन्नपूर्णी सुपर सिक्स मुफ्त LPG योजना पर सालाना करीब ₹4,000 करोड़ खर्च होने की बात कही गई है। सरकार ने फिलहाल तीन LPG सिलेंडर उपलब्ध कराने की घोषणा की है।
Aavin दूध की खरीद कीमत में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी का भार भी सरकार अपने ऊपर लेने जा रही है। इसके लिए हर महीने लगभग ₹60 करोड़ और सालाना करीब ₹720 करोड़ की सब्सिडी देने का प्रावधान बताया गया है। उपभोक्ताओं के लिए Aavin दूध की खुदरा कीमत में बदलाव नहीं किया गया है।
कृषि ऋण राहत और किसानों के लिए फैसले
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए सरकार ने सहकारी फसल ऋण से जुड़े कर्ज राहत पैकेज की भी घोषणा की है। दस्तावेज के अनुसार, इस मद में ₹2,044 करोड़ की ऋण राहत और अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान है।
इसके अलावा विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों को वापस लेने की घोषणा भी की गई है। सरकार ने विवादित परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की योजना को भी वापस लेने की पुष्टि की है।
ओलंपिक और मोटरस्पोर्ट्स सिटी की योजना
तमिलनाडु सरकार के बड़े प्रस्तावों में खेल बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाएं भी शामिल हैं। इनमें एक विश्वस्तरीय ओलंपिक सिटी और अंतरराष्ट्रीय रेसिंग आयोजनों, जैसे फॉर्मूला-1, की मेजबानी करने में सक्षम मोटरस्पोर्ट्स सिटी विकसित करने की योजना बताई गई है।
सरकार इन परियोजनाओं को राज्य में खेल, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली दीर्घकालिक पहलों के रूप में देख रही है।
बढ़ते कर्ज के बीच वित्तीय अनुशासन पर सवाल
इतने बड़े खर्च पैकेज की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। सरकार के श्वेत पत्र में कुल बकाया कर्ज करीब ₹10.98 लाख करोड़ और राजकोषीय घाटा लगभग ₹1.21 लाख करोड़ बताया गया है।
दस्तावेज के अनुसार, राज्य के राजस्व का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पहले से ब्याज भुगतान में जा रहा है। वहीं राजस्व घाटा ₹55,775 करोड़ के आसपास है। विपक्ष का तर्क है कि नई आवर्ती कल्याणकारी योजनाओं से राज्य के वित्त पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
एक अन्य सरकारी आंकड़े के मुताबिक, राज्य का debt-to-GSDP अनुपात 27.01% है, जो बताए गए 23% के आर्थिक स्थिरता मानक से अधिक है। चालू वित्त वर्ष में सरकार के ₹1,73,445 करोड़ उधार लेने की योजना भी बताई गई है। ब्याज भुगतान पर करीब ₹78,683 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
विपक्ष ने सरकार की खर्च नीति पर उठाए सवाल
AIADMK ने नए विधानसभा-सचिवालय परिसर के लिए ₹1,200 करोड़ खर्च करने के प्रस्ताव की आलोचना की है। पार्टी महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर होने के बावजूद सरकार ऐसे खर्च को प्राथमिकता दे रही है।
पलानीस्वामी ने सरकार की ऋण माफी योजनाओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य पर पहले से भारी वित्तीय बोझ है। वहीं, पूर्व वित्त मंत्री और DMK विधायक थंगम थेनारासु ने बजट के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि सरकार के कार्यकाल में राज्य का वार्षिक उधार बढ़कर ₹1.22 लाख करोड़ हो गया है।
सरकार का दावा- खर्च से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी
TVK सरकार का कहना है कि पूंजीगत निवेश, ग्रामीण राहत और बुनियादी ढांचे पर खर्च से व्यापक आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से लंबी अवधि में आर्थिक विकास और कर राजस्व बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वित्तीय दबाव को कम करने के लिए सरकार ने अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया की अध्यक्षता में एक पैनल बनाया है। इसका लक्ष्य चालू वित्त वर्ष में अतिरिक्त ₹15,000 करोड़ का वित्तीय स्थान तैयार करना है। सरकार का कहना है कि बेहतर राजस्व संग्रह और प्रशासनिक स्तर पर लीकेज रोककर यह राशि जुटाने की कोशिश की जाएगी। लगभग ₹2,000 करोड़ का लक्ष्य पहले ही हासिल होने का दावा किया गया है।
तमिलनाडु के वित्त सचिव एम. ए. सिद्दीकी ने राज्य की वित्तीय स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि कर्ज को तुरंत कम करना संभव नहीं है और उधारी जारी रह सकती है। उनके मुताबिक, महत्वपूर्ण बात यह है कि आय की वृद्धि दर कर्ज की वृद्धि दर से अधिक रहे। उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिति सुधारने में कम से कम दो वर्ष लग सकते हैं।
सरकार ने 2036 तक तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी रखा है।











