किशाऊ प्रोजेक्ट पर 15 सितंबर को 6 राज्यों में करार, दिल्ली-राजस्थान को मिलेगा हिमाचल के हिस्से का पानी

किशाऊ परियोजना पर 15 सितंबर को 6 राज्यों के बीच समझौता होगा। 660 MW प्रोजेक्ट से दिल्ली और राजस्थान को हिमाचल के हिस्से का पानी मिलेगा।

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर 15 सितंबर को नई दिल्ली में छह राज्यों के बीच समझौता होगा। अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाले करार से 660 मेगावाट परियोजना की आगे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

शिमला: ऊपरी यमुना बेसिन में प्रस्तावित 660 मेगावाट की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर 15 सितंबर को छह राज्यों के बीच महत्वपूर्ण समझौता होगा। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के प्रतिनिधि करार पर हस्ताक्षर करेंगे। परियोजना से हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा।

15 सितंबर को छह राज्यों के बीच होगा करार

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण की दिशा में 15 सितंबर को नई दिल्ली में अहम कदम उठाया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और राजस्थान के प्रतिनिधि परियोजना को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।

समझौता हस्ताक्षर समारोह दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक कर्तव्य भवन-03, जनपथ, नई दिल्ली में आयोजित होगा। हिमाचल प्रदेश की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, बहुउद्देशीय परियोजनाएं एवं विद्युत, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोत और सतर्कता आरडी नजीम बैठक में शामिल होंगे।

वह परियोजना में हिमाचल प्रदेश के हितों और राज्य की भूमिका को लेकर अपना पक्ष रखेंगे।

660 मेगावाट की है किशाऊ परियोजना

ऊपरी यमुना बेसिन में प्रस्तावित किशाऊ परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये है। इस बहुउद्देशीय परियोजना की जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर बताई गई है।

परियोजना में जल भंडारण के साथ-साथ इसके बहुउद्देशीय इस्तेमाल का प्रावधान किया गया है। छह राज्यों के बीच समझौता होने के बाद परियोजना के निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।

दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा हिमाचल के हिस्से का पानी

समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश के हिस्से में आने वाले पानी का इस्तेमाल दिल्ली और राजस्थान के लिए किया जाएगा। इसके बदले दोनों राज्य हिमाचल प्रदेश की बिजली घटक की लागत में योगदान करेंगे।

वहीं, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को परियोजना के जल घटक की लागत में वित्तीय योगदान नहीं करना होगा। इस व्यवस्था को हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य को अपने जल संसाधन के बदले बिजली घटक की लागत में दूसरे राज्यों से योगदान मिलेगा।

किशाऊ परियोजना पर होने वाला यह समझौता छह राज्यों के बीच जल और बिजली से जुड़े हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद लंबे समय से प्रस्तावित परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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