भारत में आयोजित 18वें BRICS समिट के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकने और आपसी संबंधों को मजबूत रखने पर जोर दिया।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS समिट से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत करीब 50 मिनट चली। बैठक में भारत-चीन संबंधों के साथ-साथ आपसी सहयोग और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए और भारत-चीन संबंधों को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए काम किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान जोर दिया कि दोनों देशों के संबंध सम्मान, संवेदनशीलता और आपसी हित के तीन पारस्परिक सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए।
करीब 7 साल बाद भारत आए शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत आए हैं। गलवान झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। इससे पहले वह 11 अक्टूबर 2019 को भारत आए थे।
वर्ष 2020 में भारत और चीन के संबंधों में बड़ा तनाव पैदा हुआ था। 15 जून 2020 को गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसके बाद द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ गया, लेकिन दोनों देशों के बीच कारोबार जारी रहा।
आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में चीन से भारत का आयात करीब 65 अरब डॉलर था। यह आंकड़ा 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया। यानी गलवान झड़प के बाद की अवधि में चीन से भारत का आयात करीब दोगुना हो गया।
मोदी ने चीन के समर्थन के लिए जताया आभार
द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए आभार जताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का यह अवसर महत्वपूर्ण है। उन्होंने शी जिनपिंग का भारत में स्वागत भी किया।
वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन ने हमेशा भारत के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाए रखने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं।
2019 में महाबलीपुरम में हुई थी मोदी-जिनपिंग की मुलाकात
भारत में मोदी और जिनपिंग की पिछली महत्वपूर्ण मुलाकातों में वर्ष 2019 की महाबलीपुरम बैठक प्रमुख रही है। उस समय चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग तमिलनाडु के ऐतिहासिक तटीय शहर मामल्लपुरम पहुंचे थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया था। दोनों नेताओं ने पंच रथ और शोर मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्मारकों का दौरा किया था और अनौपचारिक बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।
इस दौरान व्यापार घाटे को कम करने, दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए उच्च स्तरीय तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी थी।
2016 में गोवा BRICS समिट में मिले थे दोनों नेता
वर्ष 2016 में गोवा में आयोजित BRICS समिट में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों को लेकर बातचीत हुई थी।
इससे पहले 2014 में शी जिनपिंग भारत दौरे पर आए थे। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल से अलग हटकर उनका स्वागत दिल्ली के बजाय गुजरात के अहमदाबाद में किया था।
साबरमती नदी के किनारे दोनों नेताओं की साथ में झूला झूलते हुए तस्वीरें काफी चर्चित हुई थीं।
BRICS समिट के अंतिम दिन क्या हुआ?
भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS समिट का अंतिम दिन 13 सितंबर 2026 है। सम्मेलन के अंतिम दिन ओपन बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें BRICS सदस्य देशों के नेता और आमंत्रित देशों के प्रमुख शामिल हो रहे हैं।
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई विश्व नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।
समिट के दौरान आर्थिक सहयोग, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, डिजिटल भुगतान, स्थानीय मुद्राओं में कारोबार और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
BRICS की साझा करेंसी का फिलहाल प्रस्ताव नहीं
BRICS समिट के दौरान साझा करेंसी को लेकर भारत ने स्थिति स्पष्ट की है। फिलहाल BRICS देशों के लिए कोई साझा मुद्रा शुरू करने का प्रस्ताव नहीं है।
हालांकि, सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में आपसी व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर चर्चा जारी है। इसका उद्देश्य सीमा-पार कारोबार को आसान बनाना, भुगतान प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना और लेन-देन की लागत कम करना है।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशों को गति मिल सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि BRICS ने कोई साझा मुद्रा या एकल भुगतान प्रणाली अपना ली है।
नई दिल्ली डेक्लरेशन को मिली मंजूरी
BRICS देशों ने शनिवार को नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। इसमें कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों की साझा स्थिति सामने रखी गई।
डेक्लरेशन में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
BRICS देशों ने आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
यह संयुक्त रुख ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और ईरान, सऊदी अरब तथा UAE सहित क्षेत्र के देशों के कई मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं।
BRICS के भविष्य को लेकर PM मोदी के 5 अहम विचार
1. अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS के अगले 20 वर्षों के लिए नया एजेंडा तैयार करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया।
2. ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़े
PM मोदी ने AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों के नियम तय करने में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी की आवश्यकता बताई।
उनका जोर इस बात पर रहा कि नई तकनीकों और वैश्विक मानकों से जुड़े फैसलों में ग्लोबल साउथ की आवाज को पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए।
3. युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने पर जोर
प्रधानमंत्री ने युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय बातचीत तथा कानून से जुड़ी ट्रेनिंग देने का सुझाव दिया। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया के लिए तैयार करना है।
4. नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क
PM मोदी ने मुसीबत में फंसे नाविकों की मदद के लिए देशों के बीच एक इमरजेंसी नेटवर्क बनाने की बात कही।
इस नेटवर्क के जरिए जरूरत पड़ने पर नाविकों को चिकित्सा सहायता, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकासी में मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकती है।
5. भविष्य साझा है तो फैसले भी साझा होने चाहिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर दुनिया का भविष्य साझा है, तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए।
इस संदेश के जरिए उन्होंने वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक व्यापक और समान भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्थानीय मुद्राओं में कारोबार पर BRICS का जोर
BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग का एक प्रमुख मुद्दा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाना है। सदस्य देश आपसी कारोबार में डॉलर के इस्तेमाल को कम करने और राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
इसके साथ ही विभिन्न देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है।
हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एकीकृत भुगतान सिस्टम या साझा करेंसी नहीं है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित समिट में आसान डिजिटल भुगतान और स्थानीय मुद्राओं में कारोबार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
भारत BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर भी जोर दे रहा है।
दिल्ली में BRICS समिट के कारण ट्रैफिक डायवर्जन
BRICS समिट के अंतिम दिन 13 सितंबर को नई दिल्ली में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कई इलाकों में यातायात नियंत्रित रहेगा।
इस दौरान 22 प्रमुख डायवर्जन प्वाइंट बनाए गए हैं और 35 से अधिक सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है।
सरदार पटेल मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट, तीन मूर्ति मार्ग, अकबर रोड, जनपथ, अशोक रोड, बाराखंभा रोड, टॉल्स्टॉय मार्ग, मथुरा रोड, लोधी रोड, अफ्रीका एवेन्यू और एपीजे अब्दुल कलाम रोड सहित कई प्रमुख मार्गों पर आम वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना है।
दिल्ली में रहने वाले और शहर से गुजरने वाले लोगों को यात्रा से पहले यातायात की स्थिति की जानकारी लेने और वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।
BRICS समिट में शामिल होने दिल्ली पहुंचे सऊदी विदेश मंत्री
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद शनिवार देर रात नई दिल्ली पहुंचे। वह 18वें BRICS समिट में शामिल होंगे।
सऊदी अरब को समिट में आमंत्रित देश के रूप में शामिल किया गया है। उनकी मौजूदगी ऐसे समय महत्वपूर्ण है, जब BRICS के विस्तार और पश्चिम एशिया के देशों के साथ संगठन के संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।
ईरान और UAE के राष्ट्रपतियों की मुलाकात
BRICS समिट से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की।
दोनों नेताओं की बैठक पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हुई। क्षेत्रीय मुद्दों पर ईरान और UAE के रुख कई मामलों में अलग रहे हैं, लेकिन दोनों देश पिछले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश करते रहे हैं।
ऐसे माहौल में दोनों राष्ट्रपतियों की बातचीत को संवाद का रास्ता खुला रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
कैसे बना BRICS नाम?
BRICS की शुरुआत एक औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में नहीं हुई थी। वर्ष 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था।
इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में रेखांकित किया गया था।
इसके बाद वर्ष 2006 में चारों देश एक साथ आए और BRIC समूह बना। वर्ष 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई।
वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के समूह में शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। इसके बाद ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी पूर्ण सदस्य बने।
आज BRICS दुनिया के प्रमुख आर्थिक और बहुपक्षीय मंचों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सदस्य देशों की वैश्विक GDP में हिस्सेदारी 27% से अधिक है, जबकि यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी करीब 14% बताई जाती है।










