ब्रिक्स समिट की औपचारिक शुरुआत से पहले नई दिल्ली स्थित भारत मंडप में हुई मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्रसिद्ध तमिल रचना ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया।
BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में BRICS Summit 2026 की औपचारिक शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मुलाकात हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को तमिल साहित्य की प्रसिद्ध रचना ‘तिरुक्कुरल’ (Tirukkural) का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भेंट किया। यह पुस्तक महान तमिल कवि और दार्शनिक संत तिरुवल्लुवर की प्रमुख कृति मानी जाती है।
रूसी भाषा में उपलब्ध इस संस्करण के जरिए भारत ने अपनी समृद्ध साहित्यिक और दार्शनिक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि संत तिरुवल्लुवर कौन थे और तिरुक्कुरल को भारतीय साहित्य में इतना महत्वपूर्ण स्थान क्यों प्राप्त है।
कौन थे संत तिरुवल्लुवर?
संत तिरुवल्लुवर, जिन्हें सम्मान के साथ वल्लुवर भी कहा जाता है, तमिल साहित्य और संस्कृति के सबसे प्रभावशाली कवियों और दार्शनिकों में गिने जाते हैं। उनकी शिक्षाओं में नैतिक जीवन, अच्छे आचरण, सामाजिक जिम्मेदारी, शासन, आर्थिक व्यवहार और मानवीय संबंधों जैसे विषयों पर गहरी चर्चा मिलती है।तिरुवल्लुवर के जीवनकाल को लेकर इतिहासकारों और विद्वानों के बीच एकमत राय नहीं है। अलग-अलग ऐतिहासिक और साहित्यिक परंपराएं उन्हें अलग-अलग कालखंडों में रखती हैं। यही कारण है कि उनके जीवन से जुड़ी कई जानकारियों को लेकर मतभेद आज भी मौजूद हैं।
हालांकि, उनके विचारों की प्रासंगिकता पर व्यापक सहमति है। तिरुवल्लुवर की शिक्षाओं को किसी एक धर्म, जाति या समुदाय तक सीमित नहीं माना जाता। उनके विचार मानव जीवन में नैतिकता, जिम्मेदारी और बेहतर सामाजिक व्यवहार जैसे व्यापक मूल्यों पर केंद्रित हैं।
क्या है तिरुक्कुरल?
तिरुक्कुरल तमिल भाषा की सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों में से एक है। इसे संक्षिप्त लेकिन गहन नैतिक और दार्शनिक विचारों के लिए जाना जाता है। इस ग्रंथ में कुल 1,330 दोहे हैं और प्रत्येक दोहे को ‘कुरल’ कहा जाता है। छोटे-छोटे छंदों में लिखी गई यह रचना जीवन के व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों पहलुओं पर विचार करती है। तिरुक्कुरल को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा गया है—अराम, पोरुल और इन्बम। ये क्रमशः सदाचार, सांसारिक एवं सार्वजनिक जीवन और प्रेम से जुड़े विषयों को सामने रखते हैं।

अराम: नैतिक जीवन का संदेश
तिरुक्कुरल का पहला हिस्सा अराम है। इसमें व्यक्ति के नैतिक आचरण, अनुशासन, सद्गुण और सामाजिक जिम्मेदारियों पर जोर दिया गया है। यह हिस्सा बताता है कि एक बेहतर समाज की शुरुआत व्यक्ति के अपने व्यवहार से होती है। ईमानदारी, दया, संयम और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को अच्छे जीवन का आधार माना गया है।
दूसरा भाग पोरुल सार्वजनिक और सामाजिक जीवन पर केंद्रित है। इसमें शासन, प्रशासन, नेतृत्व, आर्थिक मामलों, राजनीति और धन के जिम्मेदार इस्तेमाल जैसे विषय शामिल हैं। इससे पता चलता है कि तिरुवल्लुवर की सोच केवल व्यक्तिगत नैतिकता तक सीमित नहीं थी। उन्होंने एक अच्छे शासन और जिम्मेदार सार्वजनिक जीवन के लिए भी सिद्धांत प्रस्तुत किए।
तिरुक्कुरल का तीसरा भाग इन्बम प्रेम और मानवीय संबंधों से संबंधित है। इसमें प्रेम की भावनाओं, रिश्तों और वैवाहिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को स्थान दिया गया है। इस तरह तिरुक्कुरल व्यक्ति के निजी जीवन से लेकर समाज, शासन और मानवीय रिश्तों तक एक व्यापक विचारधारा प्रस्तुत करता है।













