बिहार के जहानाबाद सदर अस्पताल में दो फ्रैक्चर मरीजों के पैरों पर प्लास्टर के बजाय कार्डबोर्ड बांधकर PMCH रेफर करने का मामला सामने आया। तेजस्वी यादव ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन ने अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगकर जांच के आदेश दिए।
जहानाबाद: बिहार के जहानाबाद सदर अस्पताल में दो फ्रैक्चर मरीजों के पैरों को प्लास्टर के बजाय कथित तौर पर कार्डबोर्ड से सहारा देकर पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) रेफर किए जाने का मामला सामने आया है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इसे लेकर राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाए हैं। अस्पताल प्रशासन ने मामले में जांच के आदेश की जानकारी दी है।
बाइक टक्कर में घायल हुए थे दोनों युवक
यह मामला जहानाबाद जिले के हुलासगंज का है। गुरुवार को दो मोटरसाइकिलों की टक्कर में दो युवक घायल हो गए थे। हादसे के बाद दोनों को इलाज के लिए जहानाबाद सदर अस्पताल लाया गया।
अस्पताल में जांच के दौरान दोनों युवकों के पैरों में फ्रैक्चर होने की बात सामने आई। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) रेफर किया गया।
हालांकि, PMCH भेजे जाने के दौरान दोनों के फ्रैक्चर वाले पैरों पर कार्डबोर्ड लपेटकर उन्हें सहारा दिया गया था। घटना की तस्वीरें और जानकारी सामने आने के बाद बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।
अस्पताल प्रशासन ने जांच की जानकारी दी
जहानाबाद सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि घटना के संबंध में जिले के अधिकारियों ने संज्ञान लिया है।
उनके मुताबिक, प्रभारी सिविल सर्जन मीना कुमारी और अन्य अधिकारियों को जिलाधिकारी ने तलब किया। जिलाधिकारी ने पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा और घटना की जांच के आदेश दिए।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दोनों मरीजों को फ्रैक्चर के बाद कार्डबोर्ड का सहारा देकर क्यों रेफर किया गया और अस्पताल में उन्हें जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में कोई लापरवाही हुई या नहीं।
फिलहाल जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। इसलिए घटना में जिम्मेदारी तय होने से पहले उपलब्ध आरोपों और अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई को अलग-अलग देखना जरूरी है।
तेजस्वी यादव ने स्वास्थ्य विभाग को घेरा
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राज्य की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि जिला अस्पताल में फ्रैक्चर वाले मरीज को पैर पर प्लास्टर तक उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यादव ने बिहार के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे “आईसीयू” में बताया। उन्होंने घटना को शर्मनाक करार दिया।
यादव ने कहा कि राजधानी पटना से महज करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित जिला अस्पताल में मरीजों को प्लास्टर जैसी आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा सुविधा भी नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है।
‘17 महीने में स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव किए’
तेजस्वी यादव ने अपने राजनीतिक कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी 17 महीने की सरकार के दौरान बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में गुणात्मक बदलाव लाने के लिए काम किया गया था।
उन्होंने दावा किया कि उस दौरान सुधारों से जुड़ी नीतियों और फैसलों को लागू करने की दिशा में प्रयास किए गए। उनके अनुसार, मौजूदा समय में स्वास्थ्य विभाग उन सुधारवादी नीतियों और फैसलों को लागू करने में सक्षम नहीं है।
यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में सत्ता में लंबे समय से रहने के बावजूद मौजूदा सरकार को आम लोगों की समस्याओं की पर्याप्त चिंता नहीं है।
NDA सरकार पर भी लगाया राजनीतिक आरोप
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में NDA सरकार पर राजनीतिक निशाना साधते हुए कहा कि गठबंधन बिहार में 21 वर्षों से सत्ता में है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी दौरों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान राज्य के विकास और “जंगल राज” जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है, लेकिन चुनाव के बाहर बिहार के लोगों की समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता।
यादव ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी है, जिन्हें जनकल्याण से कोई सरोकार नहीं है।
ये आरोप तेजस्वी यादव की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इन पर सरकार की ओर से अलग राजनीतिक जवाब दिया गया है।
BJP ने तेजस्वी पर किया पलटवार
भारतीय जनता पार्टी के नेता मृत्युंजय तिवारी ने तेजस्वी यादव के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव की राजनीति “वेंटिलेटर पर आईसीयू” में चल रही है।
तिवारी ने आरोप लगाया कि अपनी राजनीतिक स्थिति बचाने के लिए तेजस्वी यादव सोशल मीडिया के जरिए हर मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली NDA सरकार का हर विभाग संवेदनशीलता के साथ काम कर रहा है। तिवारी के अनुसार, यदि इस मामले में किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने लापरवाही पर कार्रवाई का भरोसा दिया
BJP नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या चिकित्सकीय लापरवाही को नजरअंदाज नहीं करेगी।
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्वयं स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों के कामकाज की निगरानी कर रहे हैं, ताकि इन क्षेत्रों में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि विकास कार्य तेजस्वी यादव को छोड़कर बाकी लोगों को दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि उनकी राजनीति “वेंटिलेटर” पर चल रही है।
दोनों पक्षों के बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा हैं। अस्पताल में मरीजों को कार्डबोर्ड से सहारा दिए जाने के मामले में वास्तविक जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
घटना ने सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं पर सवाल उठाए
जहानाबाद की घटना ने सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फ्रैक्चर वाले मरीजों को आम तौर पर चोट के प्रभावित हिस्से को स्थिर रखने के लिए चिकित्सकीय तरीके से सहारा दिया जाता है। इस मामले में कार्डबोर्ड के इस्तेमाल की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर बहस शुरू हुई।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि मरीजों को कार्डबोर्ड का सहारा किस चिकित्सकीय कारण से दिया गया, कितनी देर तक ऐसा किया गया या उस समय अस्पताल में प्लास्टर की सुविधा उपलब्ध थी या नहीं। इन सवालों का जवाब जांच के बाद मिलने की उम्मीद है।
जांच के निष्कर्ष का इंतजार
जिलाधिकारी द्वारा अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने और जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब मामले की प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच में यह देखा जाएगा कि मरीजों को किस स्थिति में अस्पताल लाया गया, उनका प्रारंभिक उपचार क्या हुआ, उन्हें PMCH क्यों रेफर किया गया और रेफर करने से पहले पैर को स्थिर करने के लिए कार्डबोर्ड का इस्तेमाल क्यों किया गया।
फिलहाल यह मामला बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विपक्ष ने इसे सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था का उदाहरण बताया है, जबकि BJP ने सरकार का बचाव करते हुए लापरवाही मिलने पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में किसी स्तर पर चिकित्सकीय या प्रशासनिक लापरवाही हुई थी या मरीजों को तत्काल उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कार्डबोर्ड का अस्थायी सहारा दिया गया था।










