तेलंगाना में 22A भूमि सूची विवाद पर BRS का कांग्रेस सरकार पर हमला, हरीश राव ने लगाए गंभीर आरोप

तेलंगाना में Section 22A भूमि सूची विवाद पर BRS नेता टी. हरीश राव ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाए और राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी के इस्तीफे की मांग

तेलंगाना में Section 22A के तहत प्रतिबंधित भूमि सूची को लेकर BRS और कांग्रेस सरकार के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। BRS नेता टी. हरीश राव ने अधिकारियों पर दबाव डालने का आरोप लगाते हुए राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी के इस्तीफे की मांग की।

हैदराबाद: तेलंगाना में Section 22A भूमि सूची विवाद पर BRS नेता टी. हरीश राव ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाए और राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी के इस्तीफे की मांग की। तेलंगाना में Section 22A के तहत प्रतिबंधित भूमि की सूची को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार तेज हो रहा है। BRS नेता टी. हरीश राव ने शुक्रवार, 11 सितंबर को तेलंगाना भवन में आयोजित एक प्रस्तुति के दौरान कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।  उन्होंने दावा किया कि राज्य के विभिन्न जिलों के कलेक्टरों पर दबाव डालकर ऐसी भूमि की सूची तैयार करने और जमा करने को कहा गया, जिसे Registration Act की Section 22A के तहत प्रतिबंधित संपत्तियों की सूची में शामिल किया जा सकता था। हरीश राव ने कहा कि BRS ने इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका को दर्शाने वाला एक दस्तावेजी क्रम तैयार किया है। उनके अनुसार, यह रिकॉर्ड प्रतिबंधित भूमि की सूची के विस्तार में सरकारी स्तर पर लिए गए कदमों की ओर इशारा करता है।

हालांकि, ये सभी आरोप BRS नेता द्वारा लगाए गए हैं। उपलब्ध सामग्री में कांग्रेस सरकार, राजस्व मंत्री या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

11 सितंबर 2025 के सरकारी आदेश का हवाला

हरीश राव ने अपने आरोपों के समर्थन में 11 सितंबर 2025 को राज्य सरकार की ओर से जारी एक आदेश का हवाला दिया। उनके अनुसार, इस आदेश के बाद प्रतिबंधित भूमि की एक नई सूची तैयार करने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी।

BRS नेता ने दावा किया कि इसके बाद जंगांव के कलेक्टर ने 20 नवंबर 2025 को एक सूची तैयार कर उसे Inspector General of Stamps and Registration को भेजा। राव के अनुसार, इस सूची में शामिल भूमि को बाद में Section 22A के तहत प्रतिबंधित भूमि की सूची में जोड़ दिया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसी तरह की प्रक्रिया राज्य के अन्य जिलों में भी अपनाई गई और वहां के कलेक्टरों से भी ऐसी सूचियां तैयार करवाई गईं।

राव ने सवाल उठाया कि क्या तेलंगाना के सभी 33 जिलों के कलेक्टरों ने भी सरकार के निर्देश पर इसी तरह की भूमि सूची तैयार की थी। उन्होंने कहा कि BRS ने अपने दावे के समर्थन में जिला-वार कलेक्टरों से संबंधित आंकड़े भी संकलित किए हैं।

सिरपुर और कागजनगर में 30,000 एकड़ का दावा

BRS नेता ने भूमि सूची में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर संपत्तियां शामिल किए जाने के उदाहरण भी सामने रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि सिरपुर और कागजनगर क्षेत्रों में करीब 30,000 एकड़ भूमि को अक्टूबर 2025 में प्रतिबंधित भूमि की सूची में शामिल किया गया।

हरीश राव ने इस कार्रवाई के दायरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में भूमि को Section 22A की सूची में शामिल किए जाने से प्रभावित जमीन मालिकों के अधिकार और संपत्ति के इस्तेमाल से जुड़े सवाल पैदा होते हैं।

उनका दावा था कि यह मामला केवल कृषि या खाली जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आवासीय संपत्तियां भी प्रभावित हुईं।

मैनचेरियल में करीब 11,000 घर सूची में शामिल होने का आरोप

हरीश राव ने आरोप लगाया कि मैनचेरियल विधानसभा क्षेत्र में करीब 11,000 मकानों को भी प्रतिबंधित भूमि की सूची में डाल दिया गया।

उन्होंने इस मुद्दे को आम लोगों की संपत्ति से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। BRS नेता के अनुसार, यदि बड़ी संख्या में निजी संपत्तियां Section 22A के तहत प्रतिबंधित सूची में आती हैं, तो इससे संबंधित भूमि मालिकों को अपनी संपत्ति के पंजीकरण और बिक्री में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

राव ने कहा कि इस मामले में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन आधारों पर भूमि और मकानों को प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया तथा इसके लिए किस स्तर पर निर्देश दिए गए थे।

राजस्व मंत्री के इस्तीफे की मांग

हरीश राव ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि उनके द्वारा लगाए गए दावे सही साबित होते हैं, तो राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को इस्तीफा देना चाहिए।

उन्होंने सरकार से यह भी सवाल किया कि राज्य के सभी 33 जिलों में भूमि सूची तैयार करने की प्रक्रिया किस स्तर पर संचालित हुई। BRS नेता का कहना है कि पार्टी ने इस संबंध में जिला-वार आंकड़े एकत्र किए हैं, जिन्हें वह सरकार की भूमिका से जोड़कर देख रही है।

हालांकि, उपलब्ध सामग्री में यह पुष्टि नहीं है कि सरकार ने आधिकारिक तौर पर BRS द्वारा बताए गए जिला-वार आंकड़ों या आरोपों को स्वीकार किया है।

निजी भूमि मालिकों के सामने बढ़ी परेशानी

Section 22A के तहत प्रतिबंधित भूमि की सूची का मुद्दा तेलंगाना में हजारों निजी भूमि मालिकों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य में कई निजी संपत्तियों को इस प्रावधान के तहत चिह्नित किए जाने के बाद संबंधित मालिक अपनी जमीन का पंजीकरण या बिक्री नहीं कर पा रहे हैं।

यही वजह है कि भूमि सूची का विस्तार अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। इससे संपत्ति मालिकों की खरीद-बिक्री और पंजीकरण प्रक्रिया भी प्रभावित होने का मुद्दा सामने आया है।

BRS इसी विषय को आधार बनाकर कांग्रेस सरकार पर दबाव बढ़ा रही है और यह सवाल उठा रही है कि निजी संपत्तियों को प्रतिबंधित सूची में शामिल करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी।

BRS और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज

22A भूमि सूची का विवाद BRS और तेलंगाना की कांग्रेस सरकार के बीच चल रहे राजनीतिक संघर्ष का एक नया केंद्र बन गया है। हरीश राव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों ने मामले को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

BRS का दावा है कि प्रतिबंधित भूमि की सूची तैयार करने और उसका विस्तार करने में सरकारी स्तर पर सक्रिय भूमिका रही। पार्टी ने जिला स्तर पर तैयार की गई सूचियों और आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

दूसरी ओर, उपलब्ध सामग्री में कांग्रेस सरकार या राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है। इसलिए BRS द्वारा लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित सरकारी पक्ष या स्वतंत्र दस्तावेजी जांच से इन दावों की पुष्टि न हो।

आगे जांच और सरकारी जवाब पर नजर

Section 22A भूमि सूची विवाद अब तेलंगाना में प्रशासनिक प्रक्रिया, निजी संपत्ति के अधिकार और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़े सवालों के साथ आगे बढ़ रहा है। BRS ने सरकार से इस प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करने और कथित तौर पर प्रभावित संपत्तियों के संबंध में स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

हरीश राव द्वारा लगाए गए आरोपों में 11 सितंबर 2025 के आदेश, जंगांव कलेक्टर की 20 नवंबर 2025 की सूची, सिरपुर और कागजनगर में करीब 30,000 एकड़ तथा मैनचेरियल में करीब 11,000 मकानों को सूची में शामिल किए जाने के दावे प्रमुख हैं।

अब इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या BRS द्वारा पेश किए गए जिला-वार आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होती है। फिलहाल, उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामला राजनीतिक आरोपों और सरकार से जवाब की मांग के स्तर पर है।

Leave a comment