गुजरात विधानसभा में वंदे मातरम के दौरान कथित तौर पर बीच में बैठने को लेकर कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला के खिलाफ विशेषाधिकार समिति जांच करेगी। स्पीकर शंकर चौधरी ने CCTV फुटेज का हवाला दिया। विधायक ने कहा कि उन्होंने पूरा राष्ट्रगीत खड़े होकर गाया था।
गांधीनगर: गुजरात विधानसभा में ‘वंदे मातरम’ के गायन के दौरान कथित तौर पर बीच में बैठने को लेकर कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजते हुए जांच के आदेश दिए हैं। विधायक ने हालांकि आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उन्होंने पूरा राष्ट्रगीत खड़े होकर गाया था।
क्या है पूरा मामला?
मामला गुजरात विधानसभा में ‘वंदे मातरम’ के गायन से जुड़ा है। विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी के मुताबिक, सदन में राष्ट्रगीत के दौरान सभी सदस्यों को खड़े रहने के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला गायन के बीच में अपनी सीट पर बैठ गए।
स्पीकर ने कहा कि उन्होंने घटना का CCTV फुटेज देखा है, जिसमें विधायक के बीच में बैठने की पुष्टि हुई। इसके बाद उन्होंने मामले की जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को कार्यवाही करने का निर्देश दिया।
यह मामला केवल एक विधायक के व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष ने इसे सदन की गरिमा, सदस्यों के आचरण और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े नियमों के पालन से जुड़ा विषय बताया है।
डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने उठाया था पॉइंट ऑफ ऑर्डर
विधायक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तब आगे बढ़ी, जब गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सदन में पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। उन्होंने खेड़ावाला पर विधानसभा और ‘वंदे मातरम’ के कथित अनादर का आरोप लगाया।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने मामले पर अपना रुख स्पष्ट किया। शंकर चौधरी ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों से सदन के नियमों का पालन करने और विधानसभा की गरिमा बनाए रखने की अपेक्षा अधिक होती है।
स्पीकर ने खेड़ावाला के मीडिया में दिए गए बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विधायक को अपना पक्ष मीडिया के बजाय विधानसभा के भीतर रखना चाहिए था।
अध्यक्ष ने यह भी चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस तरह की घटना दोहराई जाती है तो सख्त कार्रवाई और सजा हो सकती है।
इमरान खेड़ावाला ने आरोपों पर क्या कहा?
कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने 9 सितंबर को इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के गायन से हुई और वह राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े हुए थे।
खेड़ावाला के मुताबिक, उन्होंने राष्ट्रगीत पूरा खड़े होकर गाया। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल, महात्मा गांधी, मौलाना आजाद, बाबासाहेब अंबेडकर और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी ऐतिहासिक हस्तियों की विरासत का भी उल्लेख किया।
हालांकि, विधायक ने ‘वंदे मातरम’ के गायन के तरीके को लेकर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि उन्हें उस तरीके पर आपत्ति थी, जिसमें बीजेपी की ओर से इसमें नए पद जोड़कर इसे गाया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगीत के दौरान वह सदन से बाहर नहीं गए थे, बल्कि अपनी सीट पर बैठ गए थे। उन्होंने बीजेपी के इस तरीके को उन नेताओं के सम्मान से जोड़ते हुए सवाल उठाया, जिन्हें वह देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण की विरासत से संबंधित मानते हैं।
इस तरह मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने CCTV फुटेज के आधार पर नियमों के उल्लंघन की बात कही है, जबकि कांग्रेस विधायक ने अपने व्यवहार को ‘वंदे मातरम’ के अपमान के रूप में देखे जाने पर आपत्ति जताई है।
स्पीकर ने विधानसभा के नियमों का दिया हवाला
विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने मामले में गुजरात विधानसभा के नियमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना से संबंधित नियम 249 का हवाला दिया।
इसके अलावा सदस्यों के आचरण तथा सदन में व्यवस्था और मर्यादा बनाए रखने के लिए पीठासीन अधिकारी के अधिकारों से जुड़े नियम 51 और 52 का भी उल्लेख किया गया।
स्पीकर के अनुसार, विधायकों द्वारा ली गई संवैधानिक शपथ और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े संसदीय नियमों तथा आचरण के मानकों का पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जब उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया, उस समय खेड़ावाला सदन में मौजूद नहीं थे। इसलिए उन्होंने उसी समय सदन के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर गंवा दिया।
विशेषाधिकार समिति करेगी मामले की जांच
अब इस पूरे मामले की जांच विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के स्तर पर होगी। समिति के सामने घटना से जुड़े तथ्यों, विधायक के आचरण और सदन के नियमों के संभावित उल्लंघन का परीक्षण किया जा सकता है।
फिलहाल विशेषाधिकार समिति की जांच पूरी नहीं हुई है और विधायक के खिलाफ किसी अंतिम दंड या कार्रवाई का फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि समिति मामले में क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या आगे किसी कार्रवाई की सिफारिश की जाती है।
‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक विवाद
यह विवाद केवल गुजरात विधानसभा की घटना तक सीमित नहीं है। ‘वंदे मातरम’ के सभी पदों के गायन को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो पदों के गायन का समर्थन करती है, जबकि गीत के अन्य पदों को लेकर पार्टी की आपत्ति है।
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने इस संबंध में एक आदेश भी जारी किया है, जिसमें राज्य सरकार के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो पद गाए जाने को लेकर निर्देश दिए गए हैं।
गुजरात विधानसभा का मौजूदा विवाद इसी व्यापक राजनीतिक बहस की पृष्ठभूमि में सामने आया है। हालांकि, खेड़ावाला के खिलाफ विशेषाधिकार जांच का तत्काल आधार विधानसभा में उनके कथित आचरण और सदन के नियमों से जुड़ा है।
सदन की मर्यादा बनाम राजनीतिक मतभेद
विवाद का केंद्र यह सवाल है कि विधानसभा के भीतर राष्ट्रगीत के दौरान सदस्यों के लिए निर्धारित आचरण का पालन किस तरह किया जाना चाहिए। स्पीकर ने इसे सदन की मर्यादा और नियमों से जोड़ा है, जबकि कांग्रेस विधायक ने अपने कदम को गीत के गायन के तरीके पर असहमति से जोड़कर समझाया है।
अब विशेषाधिकार समिति की जांच इस विवाद का अगला महत्वपूर्ण चरण होगी। समिति के निष्कर्ष से यह तय करने में मदद मिलेगी कि विधानसभा के नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और यदि हुआ, तो उसके लिए क्या कार्रवाई उचित होगी।
फिलहाल गुजरात विधानसभा अध्यक्ष ने जांच के आदेश दे दिए हैं और मामला विशेषाधिकार समिति के पास पहुंच चुका है। विधायक का पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है। अंतिम निर्णय जांच और निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के आधार पर होगा।









