कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर अंतिम फैसला किसानों और जनता के हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा के लिए 21 से 23 सितंबर तक तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित होगा।
बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लेकर कोई भी अंतिम निर्णय किसानों और आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए लेगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सभी पक्षों की राय सुनी जाएगी और विधानसभा में विस्तार से चर्चा के बाद आगे का फैसला किया जाएगा। अरन्या भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि 21 से 23 सितंबर तक तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।
शिवकुमार ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान सभी विधायक इस विषय पर अपने विचार और सुझाव स्वतंत्र रूप से रख सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का अंतिम निर्णय किसानों और कर्नाटक की जनता के हित में होगा। मुख्यमंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार विधानसभा में व्यापक राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा के बाद अपनी स्थिति तय करना चाहती है।
किसानों और आम जनता के हित पर सरकार का जोर
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट से जुड़े मुद्दे कर्नाटक में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस मामले में सरकार की प्राथमिकता किसानों के हित को बताया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट पर फैसला करते समय केवल प्रशासनिक या पर्यावरणीय पहलुओं को ही नहीं, बल्कि किसानों और आम लोगों के हितों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों से अपील की कि वे विधानसभा सत्र में इस विषय पर अपने विचार और सुझाव खुलकर रखें। सरकार इन विचारों पर चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लेगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सरकार रिपोर्ट की किन विशेष सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार करने पर विचार कर रही है। इसलिए इस स्तर पर रिपोर्ट को लेकर किसी अंतिम सरकारी फैसले का दावा नहीं किया गया है।
APMC को लेकर भी बोले डीके शिवकुमार
मीडिया बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री से कर्नाटक हाई कोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा उनके कृषि उपज बाजार समिति (APMC) के दौरे की सराहना किए जाने को लेकर भी सवाल पूछा गया। शिवकुमार ने हाई कोर्ट द्वारा सरकार के प्रयासों को मान्यता दिए जाने पर धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी मंत्रियों को APMC पर ध्यान देने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की स्थिति स्पष्ट है कि आम लोगों को किसी भी कारण से परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने APMC से जुड़े प्रशासनिक कामकाज और आम लोगों की समस्याओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य सरकार कृषि क्षेत्र से जुड़े बाजार तंत्र और किसानों की सुविधा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की बात कर रही है।
बाल श्रम रोकने में पुलिस और श्रम विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी
बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बाल श्रम के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि बच्चों को बाल श्रम से बचाने की जिम्मेदारी केवल श्रम विभाग की नहीं है। शिवकुमार ने कहा कि पुलिस विभाग की भी इसमें जिम्मेदारी है और दोनों विभागों को समन्वय के साथ काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए श्रम विभाग और पुलिस विभाग के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। मुख्यमंत्री का कहना है कि बच्चों को बाल श्रम से बचाने के लिए दोनों विभागों को मिलकर काम करना होगा।
ईडी की कार्रवाई पर मंत्री सतीश जारकीहोली को समर्थन
मुख्यमंत्री से मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर भी सवाल किया गया। शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने मंत्री से बात की है और उन्हें समर्थन का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सतीश जारकीहोली का हौसला बढ़ाया है। शिवकुमार ने दावा किया कि जारकीहोली ने कुछ भी गलत नहीं किया है और वह कानूनी दायरे में रहकर अपना कारोबार कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं और विपक्षी नेताओं को जांच एजेंसियों के जरिए चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें जानकारी है कि तीन या चार अन्य लोगों को भी निशाना बनाया जा सकता है। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप है और उपलब्ध खबर में इसकी स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित जांच एजेंसी की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
BJP नेताओं को लेकर भी शिवकुमार ने उठाए सवाल
शिवकुमार ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के संबंध में भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP नेताओं के खिलाफ धन हस्तांतरण और विदेशी खातों में धन भेजे जाने जैसे आरोप लगाए जाने के बावजूद उनके खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में उन्होंने जिन BJP नेताओं या मामलों का उल्लेख किया, उनके नाम और विशिष्ट आरोपों का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन आरोपों को मुख्यमंत्री के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
वंदे मातरम विवाद पर कांग्रेस का रुख बताया स्पष्ट
वंदे मातरम के गायन को लेकर चल रहे विवाद पर भी मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रुख दशकों से स्पष्ट रहा है।
शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस वंदे मातरम, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान, स्वतंत्रता, लोकतंत्र और संविधान का सम्मान करती है।
उन्होंने पार्टी के लंबे समय से चले आ रहे रुख का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राष्ट्रीय प्रतीकों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति कांग्रेस का सम्मान स्पष्ट है।
अवैध हथियारों को लेकर रामकृष्ण हेगड़े का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने अवैध आग्नेयास्त्रों को लेकर अपनी पहले की अपील का भी जिक्र किया। उन्होंने लोगों से अवैध हथियार सरकार को सौंपने की अपील की थी।
इस संदर्भ में उन्होंने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े की पहल को याद किया। शिवकुमार ने कहा कि हेगड़े उनके निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री बने थे और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भी लोगों से अवैध आग्नेयास्त्र सरकार को सौंपने का आह्वान किया था।
शिवकुमार के अनुसार, उस समय हजारों लोगों ने आगे आकर अपने अवैध हथियार सरकार को सौंपे थे।
कर्नाटक की राजनीति में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर नजर
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर 21 से 23 सितंबर तक प्रस्तावित विधानसभा सत्र अब इस मुद्दे पर सरकार की आगे की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पहले ही संकेत दिया है कि किसानों और जनता के हित को निर्णय का प्रमुख आधार बनाया जाएगा।
विधानसभा में होने वाली चर्चा के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायक रिपोर्ट से जुड़े अपने विचार और सुझाव रख सकेंगे। इसके बाद सरकार की ओर से अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल मुख्यमंत्री ने किसी अंतिम नीति या निर्णय की घोषणा नहीं की है। उन्होंने केवल यह स्पष्ट किया है कि सरकार विधानसभा में चर्चा और संबंधित पक्षों के हितों पर विचार करने के बाद आगे बढ़ेगी।
इस पूरे घटनाक्रम पर अब 21 से 23 सितंबर के विधानसभा सत्र और उसमें होने वाली चर्चा पर नजर रहेगी। कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर सरकार का अंतिम रुख किसानों, आम जनता और राज्य के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए तय किए जाने की बात मुख्यमंत्री ने कही है।











