DSC 2025 भर्ती में कथित अनियमितताओं पर जगन का हमला, लोकेश के इस्तीफे और CBI जांच की मांग

जगन मोहन रेड्डी ने DSC 2025 शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं पर CBI जांच और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कई नियुक्तियों पर सवाल उठाए।

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने DSC 2025 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराने की मांग दोहराई है। उन्होंने शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे की मांग करते हुए भर्ती में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगाए।

अमरावती: आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने DSC 2025 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे और भर्ती प्रक्रिया की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की अपनी मांग दोहराई। ताडेपल्ली स्थित YSRCP केंद्रीय कार्यालय में गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जगन ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और शिक्षा मंत्री लोकेश पर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर चुप रहने का आरोप लगाया। जगन ने दावा किया कि DSC 2025 के जरिए शिक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नौकरियां ऐसे उम्मीदवारों को भी दी गईं, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा में हिस्सा ही नहीं लिया था।

सरकार पर जांच कमजोर करने का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि गठबंधन सरकार कथित DSC घोटाले की जांच को जानबूझकर कमजोर कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू अपने बेटे नारा लोकेश को कथित तौर पर क्यों बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

जगन ने सरकार पर बेरोजगार युवाओं के जीवन और भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने DSC परीक्षा की तैयारी और निगरानी की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति को दिए जाने पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने पूछा कि सरकार ने GO नंबर 4 और GO नंबर 47 क्यों जारी किए और भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सरकारी आदेशों में बदलाव क्यों किया गया।

372 खेल कोटे के पदों पर उठाए सवाल

जगन ने खेल कोटे के तहत 372 पदों को बिना परीक्षा आयोजित किए भरे जाने का दावा करते हुए सवाल उठाया कि ऐसा कैसे किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि GO नंबर 4 और GO नंबर 47 ने कथित अनियमितताओं के लिए रास्ता खोला, जबकि GO नंबर 23, 25 और 56 बाद में उस रास्ते को बंद करने के लिए लाए गए।

जगन ने यह भी आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों की अनदेखी की गई। उनके मुताबिक, कथित DSC अनियमितताएं सामने आने के बाद गठबंधन सरकार ने APPSC की उन परीक्षाओं को भी रोक दिया, जिनका इस्तेमाल इसी तरह की प्रक्रिया के जरिए भर्ती के लिए किया जाना था।

हालांकि, ये सभी दावे जगन मोहन रेड्डी की ओर से लगाए गए आरोप हैं।

फर्जी या संदिग्ध खेल प्रमाणपत्रों का आरोप

जगन ने खेल कोटे के तहत हुई नियुक्तियों को लेकर कई व्यक्तिगत मामलों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, खेल कोटे में 39 नौकरियां भरी गईं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उम्मीदवारों ने खम्मम में आयोजित एक ऐसे टूर्नामेंट में भाग लेने के प्रमाणपत्र जमा किए, जो उनके दावे के अनुसार कभी हुआ ही नहीं था।

जगन ने दावा किया कि जूडो एसोसिएशन ऑफ तेलंगाना ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ऐसा कोई टूर्नामेंट आयोजित नहीं किया गया। उनके अनुसार, इसके बावजूद प्रमाणपत्र आंध्र प्रदेश जूडो एसोसिएशन की ओर से जारी किए गए थे।

जगन ने आरोप लगाया कि इस एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश के सहोदर Bharath हैं। इसी आधार पर उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में कथित हितों के टकराव और अनियमितताओं पर सवाल उठाया।

सॉफ्टबॉल और खो-खो नियुक्तियों का भी जिक्र

जगन ने सॉफ्टबॉल में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाए जाने का आरोप लगाया और कहा कि इसके प्रमुख कुणा रवि कुमार हैं।

उन्होंने योगेश्वर राव और उनकी बहन के मामले का भी उल्लेख किया। जगन के अनुसार, दोनों को नलगोंडा में कथित रूप से आयोजित खो-खो चैंपियनशिप में जीते गए पदकों के आधार पर खेल कोटे में नौकरी दी गई।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि तेलंगाना खो-खो एसोसिएशन ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ऐसी कोई प्रतियोगिता आयोजित नहीं हुई थी।

जगन ने गुडिवाडा में आयोजित 49वीं सीनियर खो-खो चैंपियनशिप के नाम पर जारी एक प्रमाणपत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बासवेश्वर राव को इसी भागीदारी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी दी गई और प्रमाणपत्र फर्जी होने के बावजूद अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की।

TET को लेकर भी सवाल

जगन ने कुरनूल जिले के प्रभाकर के मामले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें “TET दिए बिना” नौकरी दी गई।

उनके अनुसार, प्रभाकर को आरक्षण श्रेणी के तहत 75 अंक हासिल करने चाहिए थे, लेकिन उन्होंने 65 अंक प्राप्त किए और फिर भी उनका चयन हो गया।

जगन के मुताबिक, अधिकारियों ने इस मामले का बचाव करते हुए कहा कि प्रभाकर परीक्षा में कई बार शामिल हुए थे और उनका सबसे अधिक स्कोर माना गया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस मामले में श्रेणी को लेकर गड़बड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि कडप्पा जिले के रसूल के मामले में भी इसी तरह की समस्या देखने को मिली।

परीक्षा पेपर की तैयारी और निगरानी पर सवाल

जगन ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत में प्रश्न बैंक तैयार करने और परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति को दी गई थी।

उन्होंने दावा किया कि बाद में कथित प्रश्नपत्र लीक का मामला सामने आया। जगन के अनुसार, एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र तक पहुंच हासिल की और परीक्षा में प्रथम रैंक प्राप्त की। इसके बाद उसका नाम मेरिट सूची से हटा दिया गया।

जगन ने यह भी दावा किया कि ऑडियो और वीडियो साक्ष्यों में नौकरियां देने की पेशकश से संबंधित बातें सामने आई थीं। हालांकि, उनके आरोप के अनुसार, मामले को उस तरीके से आगे नहीं बढ़ाया गया, जिस तरह बढ़ाया जाना चाहिए था।

अधिकारियों के ‘सात बार सत्यापन’ के दावे पर सवाल

जगन ने भर्ती प्रक्रिया के बचाव में अधिकारियों द्वारा किए गए सत्यापन संबंधी दावे पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने अधिकारियों के उस कथित स्पष्टीकरण का जिक्र किया कि उम्मीदवारों को नौकरी देने से पहले सात बार सत्यापन किया गया था। जगन ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे मजाक बताया।

उन्होंने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश पर विधानसभा को कथित तौर पर गुमराह करने का आरोप भी लगाया। जगन ने इसे कथित मामले को छिपाने की कोशिश का हिस्सा बताया।

APPSC परीक्षाओं को लेकर भी सरकार पर निशाना

जगन ने कहा कि कथित DSC अनियमितताओं का असर केवल मौजूदा भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों के सामने आने के बाद गठबंधन सरकार ने APPSC की प्रस्तावित परीक्षाओं को रोक दिया।

उनके मुताबिक, इन परीक्षाओं का इस्तेमाल समान प्रक्रिया के जरिए भर्ती के लिए किया जाना था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार की कथित लापरवाही का सबसे ज्यादा असर उन बेरोजगार युवाओं पर पड़ रहा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए लंबे समय से मेहनत कर रहे हैं।

युवाओं के भविष्य पर असर का दावा

जगन ने कहा कि सरकारी नौकरी हासिल करने की उम्मीद में बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उनके अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से इन युवाओं के भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों ने परीक्षाओं के लिए मेहनत की, लेकिन कथित अनियमितताओं के कारण पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।

जगन ने DSC को चंद्रबाबू नायडू सरकार से जुड़े कथित घोटालों की सूची में “एक और बड़ा मामला” बताया। उन्होंने कहा कि DSC 2025 से जुड़े मामले में लगातार नए आरोप सामने आ रहे हैं।

CBI जांच की मांग पर कायम जगन

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जगन ने एक बार फिर शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे और DSC 2025 भर्ती प्रक्रिया की CBI जांच की मांग की।

उनका कहना है कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि भर्ती प्रक्रिया में शामिल सभी सवालों का जवाब सामने आ सके।

जगन के आरोपों में खेल कोटे की नियुक्तियों, परीक्षा प्रक्रिया, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, TET स्कोर, प्रमाणपत्रों के सत्यापन और सरकारी आदेशों में बदलाव जैसे कई मुद्दे शामिल हैं।

हालांकि, जगन द्वारा लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं लिया जा सकता। इन आरोपों पर आंध्र प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश का पक्ष इस उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है।

इसलिए DSC 2025 भर्ती को लेकर आगे की जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगी।

Leave a comment