Supreme Court: PM मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली नाबालिग की सुरक्षा को लेकर बड़ा आदेश, दिल्ली-UP पुलिस को दिए निर्देश

Supreme Court ने PM मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में नाबालिग की सुरक्षा को लेकर बड़ा आदेश दिया है। दिल्ली और UP पुलिस को सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अपशब्द कहने वाली 14 वर्षीय लड़की पर हो रहे हमलों का गंभीरता से संज्ञान लिया।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवादों में आई 14 वर्षीय लड़की और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस को नाबालिग और उसके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही दिल्ली पुलिस से लड़की की ओर से दर्ज कराई गई FIR की जांच की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी गई है।

लड़की के परिवार ने लगाया उत्पीड़न का आरोप

मामला उस समय चर्चा में आया जब जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान 14 वर्षीय लड़की द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ। वीडियो वायरल होने के बाद लड़की और उसके परिवार को कथित तौर पर धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ा।

लड़की की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश वकील ने पीठ को बताया कि परिवार ने कथित हमलों के संबंध में दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई थी। हालांकि, आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। वकील ने यह भी दावा किया कि दिल्ली स्थित परिवार के घर पर पत्थर फेंके गए। सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते लड़की और उसका परिवार बाद में नोएडा चले गए।

CJI सूर्यकांत की पीठ ने सुरक्षा पर दिया जोर

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यदि शिकायत में थोड़ी भी सच्चाई है और प्रथम दृष्टया आरोप विश्वसनीय नजर आते हैं, तो नाबालिग और उसके परिवार की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाए जाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को लड़की और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। 

इसके अलावा दिल्ली पुलिस को लड़की द्वारा दर्ज कराई गई FIR के आधार पर अब तक हुई जांच की स्थिति से अदालत को अवगत कराने के लिए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया। अदालत का यह रुख इस बात को रेखांकित करता है कि किसी राजनीतिक विवाद या सोशल मीडिया गतिविधि के बावजूद किसी नाबालिग और उसके परिवार को कथित धमकी या हिंसा से सुरक्षा मिलना जरूरी है।

जस्टिस बागची ने FIR पर तत्काल कार्रवाई की बात कही

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने FIR पर तेजी से कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर लड़की और उसके परिवार को परेशान करने या उनके घर पर हमला करने के आरोप हैं, उन्हें खुले तौर पर घूमने और परिवार को डराने-धमकाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

पीठ ने कथित हमलों की स्वतंत्र जांच और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता बताई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून अपने हाथ में लेने या किसी व्यक्ति को डराने-धमकाने की कोशिश को सामान्य नहीं माना जा सकता।

लड़की के पिता पर हमले के मामले में कार्रवाई

मामले से जुड़े आरोपों के अनुसार, लड़की के पिता पर कथित हमले के संबंध में दर्ज FIR में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की को कथित तौर पर परेशान करने के आरोप में स्वतंत्र भारद्वाज नामक व्यक्ति को बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और पुलिस कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।

दूसरे मामले में यूपी सरकार ने मजिस्ट्रेट को किया निलंबित

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक अन्य मामले में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नोएडा में NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल एक लॉ छात्र को कथित तौर पर ‘पीस बॉन्ड’ का नोटिस जारी करने वाले एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस कार्रवाई में जिला मजिस्ट्रेट की कोई भूमिका नहीं थी। यह मामला उस समय सामने आया जब छात्र ने मजिस्ट्रेट की कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था।

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