पंजाब में कोयले की कमी से बिजली संकट, 3 थर्मल प्लांट यूनिट बंद; कई इलाकों में कटौती

पंजाब में कोयले की कमी से बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। 2 निजी और 1 सरकारी थर्मल यूनिट बंद हैं, जिससे कई इलाकों में बिजली कटौती बढ़ गई है।

पंजाब में कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। 2 निजी और 1 सरकारी थर्मल प्लांट की इकाइयां बंद हैं। उत्पादन घटने से राज्य में बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है और कटौती हो रही है।

चंडीगढ़: पंजाब में कोयले की कमी के चलते बिजली संकट गहरा गया है। राज्य के थर्मल प्लांट पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। वहीं 2 निजी और 1 सरकारी थर्मल प्लांट की इकाइयां बंद बताई जा रही हैं। बिजली उत्पादन में कमी का असर आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है और कई इलाकों में लोगों को दिन-रात बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

कोयले की कमी से बिजली उत्पादन पर असर

पंजाब में बिजली उत्पादन काफी हद तक थर्मल प्लांटों पर निर्भर है। ऐसे में कोयले की उपलब्धता कम होने का सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है। राज्य के थर्मल प्लांट फिलहाल अपनी पूरी क्षमता के अनुसार बिजली नहीं बना पा रहे हैं, जिससे बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।

कोयले की कमी के कारण उत्पादन घटने से बिजली की मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ गया है। इसका असर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बिजली कटौती के रूप में दिखाई दे रहा है।

2 निजी और 1 सरकारी इकाई बंद

मौजूदा बिजली संकट के बीच पंजाब में 2 निजी और 1 सरकारी थर्मल प्लांट की इकाई बंद होने की जानकारी सामने आई है। इन इकाइयों से बिजली उत्पादन रुकने के कारण राज्य में उपलब्ध बिजली उत्पादन पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

इसके अलावा जो थर्मल प्लांट चालू हैं, वे भी पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर रहे हैं। इससे बिजली की जरूरत पूरी करने में परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में कोयले की उपलब्धता और बंद इकाइयों से उत्पादन शुरू होना बिजली व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दिन-रात बिजली कटौती से लोग परेशान

बिजली उत्पादन में कमी का असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है। राज्य के कई इलाकों में दिन और रात अलग-अलग समय पर बिजली कट लगाए जा रहे हैं। लगातार कटौती के कारण घरेलू उपभोक्ताओं के साथ दुकानदारों और अन्य बिजली आधारित कामकाज करने वालों की परेशानी भी बढ़ रही है।

फिलहाल बिजली संकट के पीछे कोयले की कमी और थर्मल प्लांटों का पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाना प्रमुख कारण है। कोयले की आपूर्ति में सुधार और बंद इकाइयों के दोबारा चालू होने के बाद बिजली उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।

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