एससीएल दास ने संभाला DERC चेयरमैन का पद, आशीष सूद ने दिलाई शपथ

पूर्व IAS अधिकारी एससीएल दास ने DERC चेयरमैन का पद संभाला। आशीष सूद ने उन्हें शपथ दिलाई। अजय कुमार जैन और प्रवीण गुप्ता भी आयोग के सदस्य नियुक्त हुए।

पूर्व IAS अधिकारी एससीएल दास ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) के नए चेयरमैन का पद संभाल लिया है। बिजली मंत्री आशीष सूद ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। आयोग में अजय कुमार जैन और प्रवीण गुप्ता को भी सदस्य नियुक्त किया गया है।

नई दिल्ली: दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) के नवनियुक्त चेयरमैन एससीएल दास ने गुरुवार को अपने पद की शपथ लेकर कार्यभार संभाल लिया। दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने उन्हें पद एवं गोपनीयता से संबंधित औपचारिक शपथ दिलाई। दास के पदभार संभालने के साथ ही DERC के चेयरमैन का एक साल से अधिक समय से खाली पड़ा पद भर गया है। उनकी नियुक्ति को दिल्ली के बिजली क्षेत्र के नियमन और आयोग के कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शपथ ग्रहण के बाद बिजली मंत्री आशीष सूद ने एससीएल दास को नई जिम्मेदारी संभालने पर बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि दास का व्यापक प्रशासनिक अनुभव दिल्ली के बिजली क्षेत्र के लिए उपयोगी साबित होगा।

एससीएल दास की नियुक्ति बुधवार को हुई

पूर्व IAS अधिकारी सुभाष चंद्र लाल दास को DERC का चेयरमैन नियुक्त किए जाने की अधिसूचना बिजली विभाग ने बुधवार को जारी की थी। इसके बाद गुरुवार को उन्होंने औपचारिक रूप से पद संभाल लिया।

दास के पास लंबे प्रशासनिक अनुभव और व्यापक प्रशासनिक विशेषज्ञता है। दिल्ली सरकार के अनुसार, उनके अनुभव से DERC के कामकाज को और मजबूत करने तथा आयोग की प्रभावशीलता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। चेयरमैन के रूप में उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब DERC के प्रमुख का पद एक साल से अधिक समय से रिक्त था।

DERC में दो अन्य सदस्यों की भी नियुक्ति

चेयरमैन के साथ दिल्ली विद्युत नियामक आयोग में दो अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की गई हैं।

सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश अजय कुमार जैन को आयोग का सदस्य (कानूनी) नियुक्त किया गया है। वहीं प्रवीण गुप्ता को सदस्य (गैर-कानूनी) बनाया गया है।

इन नियुक्तियों के साथ आयोग के कामकाज को आगे बढ़ाने के लिए नेतृत्व और सदस्य स्तर पर नई व्यवस्था तैयार हुई है। DERC में कानूनी और गैर-कानूनी दोनों क्षेत्रों से जुड़े सदस्यों की मौजूदगी आयोग की नियामक जिम्मेदारियों के लिए महत्वपूर्ण है।

पहली बार परंपरा से अलग नियुक्ति

एससीएल दास की नियुक्ति DERC के चेयरमैन पद को लेकर एक बदलाव के तौर पर भी देखी जा रही है। अब तक इस पद पर सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति की परंपरा रही थी।

इस बार सरकार ने इसके बजाय एक सेवानिवृत्त IAS अधिकारी को DERC का चेयरमैन नियुक्त किया है। यह नियुक्ति परंपरागत व्यवस्था से अलग है।

दिल्ली सरकार के बयान के अनुसार, दास का व्यापक अनुभव और प्रशासनिक विशेषज्ञता DERC की कार्यप्रणाली को और मजबूत करने तथा उसकी प्रभावशीलता बढ़ाने में मदद करेगी।

बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।

उनके बयान में बिजली क्षेत्र के नियमन के साथ उपभोक्ता हितों को सुरक्षित रखने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया। DERC दिल्ली के बिजली क्षेत्र में नियामक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आयोग का काम बिजली क्षेत्र से जुड़े नियामक मामलों की निगरानी करना और वितरण से संबंधित प्रमुख विषयों पर नजर रखना है।

DERC की क्या है भूमिका?

दिल्ली विद्युत नियामक आयोग राजधानी के बिजली क्षेत्र के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयोग बिजली वितरण से जुड़े प्रमुख मामलों की निगरानी करता है और बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।

दिल्ली में बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़े मामलों में नियामक स्तर पर DERC की भूमिका अहम है। आयोग का उद्देश्य बिजली क्षेत्र के कामकाज में नियामकीय व्यवस्था बनाए रखने के साथ उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ऐसे में चेयरमैन पद पर नई नियुक्ति का असर आयोग की आगामी कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। सरकार ने दास के प्रशासनिक अनुभव को DERC की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

प्रशासनिक अनुभव से आयोग को मिलेगी मजबूती

एससीएल दास के पास एक पूर्व IAS अधिकारी के रूप में व्यापक प्रशासनिक अनुभव है। दिल्ली सरकार का मानना है कि उनकी प्रशासनिक विशेषज्ञता DERC के कामकाज को और प्रभावी बनाने में मदद करेगी।

चेयरमैन के रूप में दास की जिम्मेदारी ऐसे समय शुरू हुई है जब बिजली क्षेत्र में उपभोक्ता हित, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दे नियामक व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

आयोग में सदस्य (कानूनी) के रूप में सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश अजय कुमार जैन और सदस्य (गैर-कानूनी) के रूप में प्रवीण गुप्ता की नियुक्ति भी नई टीम की संरचना को पूरा करती है।

सरकार ने उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता बताया

बिजली मंत्री आशीष सूद ने दास को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके व्यापक प्रशासनिक अनुभव से दिल्ली के बिजली क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ उपभोक्ता हितों की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। DERC की नियामक भूमिका को देखते हुए आयोग की नई नेतृत्व व्यवस्था इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।

लंबे समय बाद DERC को मिला पूर्ण नेतृत्व

DERC के चेयरमैन का पद एक साल से अधिक समय से खाली था। अब एससीएल दास के पदभार संभालने के बाद आयोग को नया नेतृत्व मिल गया है।

दास की नियुक्ति के साथ आयोग में कानूनी और गैर-कानूनी सदस्यों की भी नई व्यवस्था हुई है। इससे DERC के सामने मौजूद नियामक जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाने के लिए संस्थागत स्तर पर नई टीम तैयार हुई है।

सरकार ने उम्मीद जताई है कि दास का प्रशासनिक अनुभव DERC की कार्यप्रणाली को मजबूत करेगा और आयोग की प्रभावशीलता बढ़ाने में योगदान देगा।

दिल्ली के बिजली क्षेत्र में नियामक की भूमिका को देखते हुए नई नियुक्तियों पर आगे भी नजर रहेगी। खासतौर पर उपभोक्ता हितों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर DERC के कामकाज को महत्वपूर्ण माना जाता है।

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