जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बड़ा बयान दिया। कांग्रेस के रुख पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अब यह कानून का हिस्सा है और सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के पूरे संस्करण का गायन अनिवार्य है।
श्रीनगर: ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को इस मुद्दे पर कांग्रेस के रुख को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने ‘वंदे मातरम्’ को अपनी पार्टी के आधिकारिक गीत के तौर पर नहीं अपनाया है, लेकिन सरकारी पद पर रहते हुए उन्हें लागू वैधानिक और आधिकारिक प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी सरकारी कार्यक्रमों के दौरान लागू नियमों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां भी सरकारी कार्यक्रमों में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए।
‘हमने पार्टी के तौर पर वंदे मातरम् नहीं अपनाया’
कांग्रेस के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कभी भी ‘वंदे मातरम्’ को पार्टी के तौर पर नहीं अपनाया और भविष्य में भी इसे पार्टी के आधिकारिक गीत के रूप में अपनाने की उनकी कोई योजना नहीं है। हालांकि, उन्होंने सरकारी जिम्मेदारियों और पार्टी की विचारधारा के बीच अंतर करने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी सरकारी कार्यक्रम में निर्धारित नियम लागू हैं, तो पद पर रहते हुए उनका पालन करना होगा। उन्होंने इसी संदर्भ में कांग्रेस को लेकर कटाक्ष भी किया और कहा कि अगर कांग्रेस इस व्यवस्था को बदलना चाहती है तो उसे सत्ता में आने के बाद संसद के माध्यम से कानून में बदलाव करना चाहिए।
कांग्रेस पर उमर अब्दुल्ला का तीखा हमला

उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या पार्टी चाहती है कि ऐसे मामलों में कश्मीरियों के खिलाफ कार्रवाई हो और उन्हें जेल भेजा जाए। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि वह चाहते हैं कि कांग्रेस जल्द से जल्द सत्ता में आए और यदि उसे मौजूदा व्यवस्था पर आपत्ति है तो संसद में इसे बदल दे।
उनका यह बयान जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच बढ़ते मतभेदों के बीच आया है। कांग्रेस वर्तमान में जम्मू-कश्मीर सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है, ऐसे में दोनों दलों के नेताओं के अलग-अलग रुख को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिल्म फेस्टिवल में शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत सोमवार को आयोजित ‘इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर’ से हुई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की मौजूदगी में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण बजाया गया। इस दौरान दोनों नेता खड़े हुए। कार्यक्रम के बाद कांग्रेस की ओर से इस फैसले पर सार्वजनिक तौर पर असहमति जताई गई। पार्टी नेताओं ने राष्ट्रीय प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर संवैधानिक मूल्यों और भारत की विविधता को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कांग्रेस ने क्या कहा?
जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने ‘वंदे मातरम्’ के पूरे संस्करण के गायन को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा तब और मजबूत होती है, जब वे देश की विविधता और संवैधानिक भावना को प्रतिबिंबित करते हैं। कांग्रेस की आपत्ति पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने अलग रुख अपनाया।
उन्होंने कहा कि सरकारी प्रोटोकॉल को किसी राजनीतिक दल की विचारधारा से अलग करके देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी सरकारी कार्यक्रम में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करना और किसी गीत को पार्टी की विचारधारा के रूप में स्वीकार करना दो अलग-अलग बातें हैं।












