कालीघाट में शुभेंदु अधिकारी ने की मां काली की पूजा, मछली का भोग लगाया और जमीन पर बैठकर ग्रहण किया प्रसाद

कौशिकी अमावस्या पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कालीघाट मंदिर में मां काली की पूजा की और मछली का भोग लगाने के बाद जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।

कौशिकी अमावस्या के अवसर पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कालीघाट मंदिर में मां काली की पूजा की। उन्होंने देवी को मछली का भोग लगाया और पूजा के बाद मंदिर परिसर में जमीन पर बैठकर मछली का प्रसाद ग्रहण किया।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार, 10 सितंबर को कौशिकी अमावस्या के अवसर पर कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर पहुंचकर मां काली की पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद उन्होंने देवी को अर्पित मछली के भोग का प्रसाद मंदिर परिसर में जमीन पर बैठकर ग्रहण किया। उनके इस धार्मिक कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद यह घटनाक्रम राज्य की मौजूदा राजनीतिक बहस से भी जुड़ गया है।

कौशिकी अमावस्या पर कालीघाट पहुंचे शुभेंदु अधिकारी

कौशिकी अमावस्या के अवसर पर कालीघाट मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया गया था। इसी दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मंदिर पहुंचे और विधि-विधान के साथ मां काली की आराधना की। उन्होंने मंदिर के पुजारियों और अपने साथ मौजूद कार्यकर्ताओं के साथ पूजा में हिस्सा लिया।

पूजा के दौरान देवी को बनारसी साड़ी और फूलों की माला अर्पित की गई। इसके बाद मां काली को भोग लगाया गया। धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।

कौशिकी अमावस्या को शक्ति उपासना से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है और पश्चिम बंगाल में इस अवसर पर काली तथा तारा मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। 2026 में कौशिकी अमावस्या 10 सितंबर को मनाई गई।

मां काली को लगाया मछली का भोग

इस पूजा कार्यक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा देवी काली को मछली का भोग लगाना और बाद में शुभेंदु अधिकारी द्वारा उसी भोग का प्रसाद ग्रहण करना रहा। सामने आए वीडियो और तस्वीरों में उन्हें मंदिर परिसर में जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण करते देखा गया।

रिपोर्टों के अनुसार, भोग में मछली और अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल थे। कुछ रिपोर्टों में मछली के सिर, फ्राइड फिश और बसंती पुलाव का भी उल्लेख किया गया है।

मुख्यमंत्री का जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण करना भी चर्चा का विषय बना। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक परंपरा और बंगाली संस्कृति से जुड़े पहलू प्रमुख रूप से सामने आए।

नॉन-वेज खाने को लेकर बंगाल में चल रही राजनीतिक बहस

शुभेंदु अधिकारी का कालीघाट दौरा ऐसे समय हुआ है, जब पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज है। इस विवाद की शुरुआत बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की उन टिप्पणियों से हुई, जिनमें उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर अपनी राय रखी थी।

उनकी टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल में अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। मुद्दा केवल भोजन की पसंद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे बंगाली संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और व्यक्तिगत आस्था को लेकर भी बहस शुरू हुई।

कई लोगों ने इस विषय को बंगाल की पारंपरिक खान-पान संस्कृति से जोड़कर देखा, जबकि दूसरी ओर धार्मिक अवसरों पर भोजन को लेकर अलग-अलग मत सामने आए।

बीजेपी की ओर से भी रखी गई स्थिति

इस विवाद के बीच बीजेपी नेताओं ने कहा कि उन्हें दुर्गा पूजा के दौरान नॉन-वेज भोजन किए जाने से कोई आपत्ति नहीं है। पार्टी की ओर से यह रुख सामने आने के बाद बंगाल में इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा और तेज हुई।

इसी पृष्ठभूमि में कौशिकी अमावस्या के अवसर पर कालीघाट मंदिर में शुभेंदु अधिकारी का देवी को मछली का भोग लगाना और बाद में प्रसाद के रूप में मछली ग्रहण करना राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, इस धार्मिक कार्यक्रम को लेकर किसी राजनीतिक संदेश का आधिकारिक दावा नहीं किया गया है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि पूजा के दौरान मछली का भोग अर्पित किया गया और अधिकारी ने उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।

धार्मिक आयोजन से राजनीतिक चर्चा तक

कालीघाट मंदिर में पूजा के बाद शुभेंदु अधिकारी का मछली का प्रसाद ग्रहण करना सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इसे बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संदर्भ में देखना शुरू किया।

बंगाल में देवी उपासना की कई परंपराओं में अलग-अलग प्रकार के भोग का प्रचलन रहा है। कालीघाट जैसे प्रमुख शक्तिपीठ से जुड़े धार्मिक आयोजनों में स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों का विशेष महत्व है। ऐसे में कौशिकी अमावस्या पर हुआ यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से चर्चा में रहा।

जमीन पर बैठकर ग्रहण किया प्रसाद

पूजा के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। सामने आए वीडियो में वह मछली का प्रसाद खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। उनके इस अंदाज ने भी लोगों का ध्यान खींचा।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा और मांसाहारी भोजन को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है। इसलिए कालीघाट में हुआ यह धार्मिक कार्यक्रम सामान्य पूजा-अर्चना से आगे बढ़कर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया।

बंगाल की राजनीति में सांस्कृतिक मुद्दों की अहमियत

पश्चिम बंगाल की राजनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। दुर्गा पूजा, काली पूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों के साथ बंगाली पहचान और स्थानीय परंपराओं का भी गहरा संबंध है।

ऐसे में भोजन और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी टिप्पणियां अक्सर राजनीतिक प्रतिक्रिया को जन्म देती हैं। मौजूदा विवाद भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

कालीघाट में कौशिकी अमावस्या के मौके पर शुभेंदु अधिकारी की पूजा और मछली का प्रसाद ग्रहण करने की तस्वीरें तथा वीडियो इसी वजह से राजनीतिक चर्चा में आए हैं। हालांकि, कार्यक्रम का मूल स्वरूप धार्मिक ही रहा और अधिकारी ने मां काली की पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद ग्रहण किया।

कुल मिलाकर, 10 सितंबर 2026 को कौशिकी अमावस्या के अवसर पर कालीघाट मंदिर में शुभेंदु अधिकारी की पूजा और मछली का भोग ग्रहण करना पश्चिम बंगाल में चल रही नॉन-वेज भोजन से जुड़ी बहस के बीच हुआ एक चर्चित घटनाक्रम बन गया है।

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