पटना में CBI ने आयकर विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर सुनंदा कुमार को ₹15 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आरोप है कि NGO के 12A और 80G प्रमाणपत्र जारी करने के बदले ₹75 हजार की मांग की गई थी।
पटना: CBI ने पटना में आयकर विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर सुनंदा कुमार को कथित तौर पर ₹15 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। मामले में विभाग की एक महिला क्लर्क को भी पकड़ा गया है। आरोप है कि एक NGO से 12A और 80G प्रमाणपत्र जारी करने के बदले ₹75 हजार की रिश्वत मांगी गई थी। कार्रवाई के दौरान CBI ने रिश्वत की रकम भी बरामद की।
NGO से प्रमाणपत्र के बदले मांगी गई रिश्वत
CBI के मुताबिक, कार्रवाई एक NGO की शिकायत के बाद की गई। ‘श्रवण ज्योति विवेकानंद संस्थान’ के प्रतिनिधि ने फरवरी में आयकर विभाग में 12A और 80G प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। इसके बाद मामले की सुनवाई हुई।

NGO प्रतिनिधि का आरोप है कि 1 सितंबर को सुनवाई के दौरान असिस्टेंट कमिश्नर सुनंदा कुमार ने उनसे सीधे पैसे की मांग की। आरोप के मुताबिक, अधिकारी ने ₹75 हजार देने को कहा था और स्टाफ के लिए ₹10 हजार अलग से मांगे थे। इसके बाद NGO की ओर से CBI को मामले की जानकारी दी गई।
DSP रुबी चौधरी के नेतृत्व में हुई कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद CBI के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मामले की जांच की। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई गई। पटना ACB की टीम ने DSP रुबी चौधरी के नेतृत्व में कार्रवाई की।
NGO प्रतिनिधि के मुताबिक, CBI की योजना के अनुसार उन्होंने असिस्टेंट कमिश्नर से संपर्क किया और आयकर कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि तय योजना के तहत रिश्वत की रकम दी गई। लेन-देन होते ही पहले से मौजूद CBI टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोप है कि सुनंदा कुमार ने रिश्वत की रकम खुद लेने के बजाय विभागीय क्लर्क के माध्यम से रकम ली। कार्रवाई के दौरान अधिकारी के पास से ₹15 हजार और स्टाफ के नाम पर ₹2,500 लिए जाने की बात सामने आई है। बाकी रकम अगले दिन देने की बात कही गई थी।
CBI जांच में सामने आएंगे पुराने लेन-देन
गिरफ्तारी के बाद CBI दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। दोनों को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया जाना है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि NGO के प्रमाणपत्र जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने का यह अकेला मामला है या पहले भी इस तरह के लेन-देन हुए हैं।
इसके लिए आयकर कार्यालय से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। NGO प्रतिनिधि ने आरोप लगाया है कि बिहार के 38 जिलों में मौजूद NGO भी इस तरह की मांगों से परेशान हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
NGO के लिए क्यों जरूरी हैं 12A और 80G
12A और 80G प्रमाणपत्र NGO के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। 12A से पात्र संस्थाओं को आयकर संबंधी छूट मिलती है, जबकि 80G के तहत NGO को दान देने वाले दानदाताओं को कर में छूट का लाभ मिल सकता है।
दिए गए विवरण के अनुसार, 80G के लिए आवेदन से पहले 12A प्रमाणपत्र की जरूरत होती है। इसी वजह से इन प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया NGO के लिए महत्वपूर्ण होती है और इनके जारी होने में किसी तरह की अनियमितता का सीधा असर संस्थाओं के कामकाज पर पड़ सकता है।












