मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी और गोपालगंज तक मंगलम का हाईटेक ठगी जाल आरोपी गिरफ्तार, 200 से ज्यादा जीविका दीदियां निशाने पर

मुजफ्फरपुर में मशरूम हाट और सरकारी योजना के नाम पर 2.67 करोड़ की कथित ठगी का खुलासा हुआ। मुख्य आरोपी आशुतोष मंगलम गिरफ्तार, बहन फरार है।
मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी और गोपालगंज तक मंगलम का हाईटेक ठगी जाल आरोपी गिरफ्तार, 200 से ज्यादा जीविका दीदियां निशाने पर
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मुजफ्फरपुर में मशरूम उत्पादन और मशरूम हाट के नाम पर जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं के साथ करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले का नेटवर्क केवल एक थाना या एक जिले तक सीमित नहीं था, बल्कि मुजफ्फरपुर से लेकर सीतामढ़ी और गोपालगंज तक फैला हुआ था। मामले में मुख्य आरोपी आशुतोष मंगलम को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसकी बहन शिवांगी समेत कुछ अन्य लोगों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि सरकारी योजनाओं के जरिए रोजगार और स्वरोजगार दिलाने, मशरूम उत्पादन शुरू कराने और बैंक से लोन दिलाने का भरोसा देकर लाभुकों को कथित तौर पर जाल में फंसाया गया।

पुलिस जांच के मुताबिक इस कथित नेटवर्क में 200 से अधिक जीविका दीदियों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है और अब तक दर्ज मामलों में करीब 2.67 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आंकड़ा सामने आया है। आरोप है कि महिलाओं के नाम पर बैंक से लोन स्वीकृत कराया गया, लेकिन लोन की राशि वास्तविक लाभुकों तक पहुंचने के बजाय संबंधित कंपनी या संस्था के खातों में ट्रांसफर करा ली गई। इसके बाद जिन परियोजनाओं के नाम पर पैसा लिया गया था, उन्हें शुरू नहीं कराया गया। जब लाभुकों ने रकम और परियोजना के बारे में सवाल उठाए तो कथित तौर पर उन्हें चेक दिए गए, लेकिन वे भी बाद में बाउंस हो गए।

पुलिस के अनुसार आरोपी आशुतोष मंगलम और उसकी बहन शिवांगी ने 'स्मार्ट ग्रैविटी एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी के जरिए महिलाओं को मशरूम उत्पादन, स्मार्ट हट, तकनीकी सहायता और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था। ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को बताया गया कि मशरूम की खेती और बिक्री के जरिए वे अच्छी आमदनी कर सकती हैं। इसके लिए बैंक से कर्ज दिलाने की बात कही गई। आरोप है कि इसी भरोसे के आधार पर कई महिलाओं के नाम पर बड़ी रकम के लोन स्वीकृत कराए गए।

इस मामले में बोचहां और मुसहरी के आकांक्षी प्रखंडों की जीविका दीदियां मुख्य रूप से निशाने पर थीं। ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर के अनुसार बोचहां की 60 महिलाओं के नाम पर बिहार ग्रामीण बैंक से 1 करोड़ 18 लाख 58 हजार 727 रुपये का लोन स्वीकृत कराया गया। वहीं मुसहरी की 60 महिलाओं के नाम पर 72 लाख 67 हजार 25 रुपये का लोन पास हुआ। दोनों मामलों में बैंक शाखा प्रबंधकों की शिकायत के आधार पर 2025 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

यानी शुरुआती स्तर पर ही 120 महिलाओं के नाम पर करीब 1.91 करोड़ रुपये के लोन का मामला सामने आया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोन की रकम वास्तव में कहां गई और जिन महिलाओं के नाम पर कर्ज कराया गया, उन्हें उसका कितना हिस्सा मिला या मिला भी या नहीं। इस जांच में बैंक खातों की जानकारी, लोन से संबंधित दस्तावेज, कंपनी के रिकॉर्ड और रकम के ट्रांजेक्शन को अहम साक्ष्य माना जा रहा है।

मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि पुलिस जांच में सीतामढ़ी और गोपालगंज में भी आरोपी के खिलाफ पुराने मामलों की जानकारी सामने आई है। प्रभात खबर के अनुसार सरैया थाना क्षेत्र में मशरूम हट के नाम पर 21 लाख रुपये, सीतामढ़ी के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में चेक बाउंस और धोखाधड़ी के जरिए 16 लाख रुपये तथा गोपालगंज के थावे थाना क्षेत्र में 39 लाख 6 हजार 650 रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। इन मामलों को जोड़ने के बाद पुलिस को आशंका है कि आरोपी का कामकाज कई जिलों तक फैला हुआ था।

यही वजह है कि इस पूरे मामले को एक सामान्य लोन विवाद के बजाय अंतरजिला कथित धोखाधड़ी नेटवर्क के तौर पर जांचा जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी तक अलग-अलग जिलों की महिलाओं की जानकारी कैसे पहुंचती थी और उन्हें सरकारी योजना के नाम पर किस तरह भरोसे में लिया जाता था। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस जांच में लाभुकों तक पहुंचने के लिए जीविका संगठन से जुड़े लोगों और सोशल मीडिया के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

मशरूम हाट और मशरूम उत्पादन का मॉडल महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से आकर्षक बनाया गया था। ग्रामीण महिलाओं को यह समझाया गया कि बैंक से लोन लेकर मशरूम उत्पादन शुरू किया जा सकता है और कंपनी की ओर से तकनीकी सहायता, हट या इंफ्रास्ट्रक्चर तथा बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसे में महिलाओं को यह प्रस्ताव आर्थिक रूप से फायदेमंद लगा और वे कर्ज लेने के लिए तैयार हुईं। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर उनके नाम पर बैंक से रकम उठाई गई।

सबसे बड़ी परेशानी अब उन महिलाओं के सामने है जिनके नाम पर बैंक का कर्ज दर्ज हो गया। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस जांच में एक एजेंसी पर 110 जीविका दीदियों के नाम पर करीब 3.63 करोड़ रुपये के लोन लिए जाने का आरोप भी सामने आया है। इन महिलाओं का कहना है कि उनके नाम पर करीब 3.30 लाख रुपये तक का कर्ज कराया गया, लेकिन उन्हें परियोजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिला। लोन की किस्तें नहीं चुकने से कुछ मामलों में ब्याज बढ़ता गया और महिलाओं पर आर्थिक बोझ बढ़ गया।

यही कारण है कि इस मामले का असर केवल कथित ठगी की रकम तक सीमित नहीं है। यदि किसी महिला के नाम पर बैंक लोन है और वह रकम उसके इस्तेमाल में ही नहीं आई, तो उसके सामने बैंक की देनदारी, ब्याज और क्रेडिट रिकॉर्ड जैसी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। इसलिए पुलिस की जांच के साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि जिन लाभुकों के नाम पर कर्ज कराया गया, उनकी वास्तविक स्थिति क्या है और उन्हें इस कथित फर्जीवाड़े से राहत कैसे मिलेगी।

मामले में पुलिस ने आशुतोष मंगलम को गिरफ्तार कर लिया है। वह मुजफ्फरपुर के काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के दामूचक का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के मुताबिक उसकी बहन शिवांगी भी इस मामले में नामजद आरोपी है और अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल फोन में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, दस्तावेज और अन्य डिजिटल जानकारी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस कथित नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे। अगर कंपनी बनाने, लोन आवेदन तैयार करने, दस्तावेज जमा कराने, बैंक प्रक्रिया आगे बढ़ाने या लाभुकों को योजना समझाने में दूसरे लोग शामिल थे तो उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी। इसी तरह यह भी पता लगाया जा रहा है कि कंपनी के बैंक खातों में पहुंची रकम को बाद में किन खातों में ट्रांसफर किया गया।

इस मामले में फर्जी कंपनी के इस्तेमाल का आरोप भी जांच को गंभीर बनाता है। पुलिस के अनुसार 'स्मार्ट ग्रैविटी एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड' के जरिए महिलाओं को योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा दिया गया। यदि जांच में कंपनी का इस्तेमाल केवल लोन हासिल करने और रकम ट्रांसफर करने के लिए किए जाने की पुष्टि होती है, तो पुलिस के सामने आर्थिक लेनदेन की पूरी श्रृंखला सामने लाने की चुनौती होगी। हालांकि कंपनी से जुड़े सभी आरोप अभी जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।

मुजफ्फरपुर में इस मामले की जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। आजतक के अनुसार सरकारी योजना के तहत मशरूम उत्पादन शुरू करने के इच्छुक लोगों को कथित तौर पर निशाना बनाया गया और एक बड़े अधिकारी की पत्नी को भी ठगे जाने की बात जांच में सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने कितने लोगों से संपर्क किया था और उसके कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।

इस पूरे मामले की जांच अब कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। एक तरफ पुलिस दर्ज प्राथमिकी में सामने आई रकम और आरोपों की जांच कर रही है, तो दूसरी तरफ दूसरे जिलों में दर्ज मामलों को भी आपस में जोड़ा जा रहा है। सीतामढ़ी और गोपालगंज से सामने आए मामले यह संकेत देते हैं कि आरोपी के खिलाफ शिकायतें केवल मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं हैं। इससे पुलिस को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित ठगी का तरीका अलग-अलग जगहों पर एक जैसा था या हर जिले में अलग रणनीति अपनाई गई।

पुलिस के लिए बैंकिंग ट्रेल सबसे अहम कड़ी हो सकती है। अगर लाभुकों के नाम पर लोन स्वीकृत हुआ, फिर रकम कंपनी या संस्था के खातों में गई और वहां से दूसरी जगह ट्रांसफर हुई, तो बैंक रिकॉर्ड से पैसों की आवाजाही का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा चेक बाउंस होने से जुड़े रिकॉर्ड भी यह समझने में मदद कर सकते हैं कि रकम वापस करने के नाम पर क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी।

मामले में एसडीएम पूर्वी के न्यायालय में भी कार्यवाही चल रही है और आजतक के अनुसार अगली सुनवाई 16 सितंबर को होनी है। इस बीच पुलिस का ध्यान कथित ठगी की रकम, लाभुकों के नाम पर लिए गए लोन और कंपनी के खातों में हुए लेनदेन की जांच पर है।

इस घटना ने जीविका जैसे स्वयं सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने वाली योजनाओं में दस्तावेजी और बैंकिंग निगरानी की जरूरत को भी सामने ला दिया है। किसी भी सरकारी योजना में लाभुक के नाम पर लोन या वित्तीय सहायता स्वीकृत होने के बाद यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि रकम वास्तविक लाभुक और वास्तविक परियोजना तक पहुंचे। यदि किसी परियोजना का निरीक्षण या सत्यापन होता है तो वह भी इस तरह के मामलों में महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था बन सकता है।

ग्रामीण महिलाओं के लिए बैंक लोन की प्रक्रिया कई बार जटिल होती है। ऐसे में यदि कोई संस्था या कंपनी सरकारी योजना का नाम लेकर आवेदन, बैंक प्रक्रिया और परियोजना तैयार करने की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेती है, तो लाभुक उसके दावों पर भरोसा कर सकती हैं। इसी भरोसे का कथित गलत इस्तेमाल इस मामले की जांच का महत्वपूर्ण पहलू है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिलाओं को कंपनी और योजना के बारे में किस तरह जानकारी दी गई थी और किसने उन्हें बैंक से कर्ज लेने के लिए तैयार किया।

फिलहाल मुख्य आरोपी आशुतोष मंगलम पुलिस की गिरफ्त में है और उससे पूछताछ जारी है। उसकी बहन शिवांगी की गिरफ्तारी के लिए भी छापेमारी चल रही है। पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

मुजफ्फरपुर से शुरू हुई यह जांच अब सीतामढ़ी और गोपालगंज तक पहुंच चुकी है। 21 लाख रुपये के मशरूम हट मामले से लेकर सीतामढ़ी के 16 लाख रुपये और गोपालगंज के 39.06 लाख रुपये के कथित धोखाधड़ी मामलों तक, पुलिस अब इन घटनाओं के बीच संबंध तलाश रही है।

कुल मिलाकर, मशरूम हाट के नाम पर सामने आया यह मामला सरकारी योजना, बैंक लोन, निजी कंपनी और जीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं के नाम के इस्तेमाल के आरोपों के कारण गंभीर है। पुलिस के अनुसार 2.67 करोड़ रुपये के दर्ज मामलों में मुख्य आरोपी गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन जांच का दायरा इससे कहीं बड़ा हो सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस फरार आरोपियों तक कब पहुंचती है, बैंक खातों से रकम की पूरी ट्रेल कितनी सामने आती है और कितनी महिलाओं के नाम पर कितने लोन स्वीकृत कराए गए थे। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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