डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के बुकावु में आग की चपेट में दो स्कूल आने से 26 छात्रों की मौत हो गई। मृतकों में 19 लड़कियां और 7 लड़के हैं। 29 छात्रों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। आग की वजह स्पष्ट नहीं है।
बुकावु: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के बुकावु शहर में गुरुवार को आग लगने की एक भीषण घटना में 26 छात्रों की मौत हो गई। मृतकों में 19 लड़कियां और 7 लड़के शामिल हैं। हादसे में 29 छात्र घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। रिपोर्टों के अनुसार, आग की शुरुआत स्कूल परिसर से पहले एक घर में हुई और देखते ही देखते आसपास के इलाकों तक फैल गई। आग की चपेट में फुराहा सेकेंडरी स्कूल और उजामा प्राइमरी स्कूल भी आ गए। फुराहा सेकेंडरी स्कूल में उस समय कई छात्र मौजूद थे, जिनमें से कुछ आग और धुएं के बीच अंदर फंस गए।
घर से शुरू हुई आग स्कूलों तक पहुंची
बुकावु के घनी आबादी वाले इलाके में गुरुवार को आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, आग सबसे पहले एक घर में लगी थी। इसके बाद आसपास के दूसरे घरों और दोनों स्कूलों तक आग फैल गई।
इस इलाके में बड़ी संख्या में मकान लकड़ी से बने होने के कारण आग के तेजी से फैलने की बात सामने आई है। आग ने देखते ही देखते कई संरचनाओं को अपनी चपेट में ले लिया और स्कूलों में मौजूद छात्रों के लिए स्थिति बेहद खतरनाक हो गई।
फुराहा सेकेंडरी स्कूल में फंसे कुछ छात्रों की दम घुटने से मौत होने की जानकारी सामने आई है। आग और धुएं के बीच स्कूल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे बच्चों को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
संकरा रास्ता बना बड़ी चुनौती
रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल से बाहर निकलने का रास्ता काफी संकरा था। आग लगने के बाद छात्रों में अफरा-तफरी मच गई और कई बच्चों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों से बाहर छलांग लगाने की कोशिश की।
कुछ छात्र दरवाजे की तरफ भागे, लेकिन एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के बाहर निकलने की कोशिश से भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान कई छात्र गिर गए और उनके ऊपर से अन्य लोग गुजर गए।
इस घटना ने आग लगने के बाद स्कूल भवन से सुरक्षित निकासी की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, हादसे के कारण और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक को लेकर अभी आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
26 छात्रों की मौत, 29 का इलाज जारी
हादसे में कुल 26 छात्रों की मौत की जानकारी सामने आई है। मृतकों में 19 लड़कियां और 7 लड़के हैं। इसके अलावा 29 छात्र घायल हुए हैं और अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है।
स्थानीय लोगों ने भी राहत और बचाव कार्य में मदद की। घायल बच्चों को आसपास के लोगों की सहायता से अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में आग से तबाह हुए घरों और इलाके में फैले मलबे के बीच लोगों को सामान तलाशते हुए देखा गया।
सोशल मीडिया पर सामने आई कुछ तस्वीरों में छोटे बच्चे जमीन पर बेसुध दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, ऐसी तस्वीरों और वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की गई है।
300 घरों के जलने की खबर
स्कूलों में आग लगने के साथ ही आसपास के रिहायशी इलाके भी प्रभावित हुए। रिपोर्टों में आग से करीब 300 घरों के जलने की जानकारी सामने आई है।
बुकावु के जिस हिस्से में यह घटना हुई, वहां बड़ी संख्या में लकड़ी से बने घर हैं। घनी आबादी और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली ज्वलनशील सामग्री के कारण आग के तेजी से फैलने की बात कही जा रही है।
फिलहाल आग की शुरुआत किस वजह से हुई, यह स्पष्ट नहीं है। आधिकारिक जांच के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

विद्रोही समूहों के नियंत्रण वाला क्षेत्र
बुकावु पूर्वी कांगो का एक प्रमुख शहर है। यह इलाका लंबे समय से अस्थिरता और सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे वाला क्षेत्र रवांडा-समर्थित AFC/M23 विद्रोहियों के नियंत्रण में है।
AFC/M23 ने फरवरी 2025 में पूर्वी कांगो में हमला किया था। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करती रही है।
हालांकि, स्कूलों में लगी आग और क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के बीच कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है। फिलहाल यह घटना एक अलग अग्निकांड के रूप में सामने आई है और आग के कारणों की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पूर्वी कांगो में खनिज संसाधनों को लेकर संघर्ष
पूर्वी कांगो लंबे समय से सशस्त्र संघर्ष का केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में ऐसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधन पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य तकनीकी उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।
इन खनिज संसाधनों और महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों पर नियंत्रण को लेकर अलग-अलग हथियारबंद समूहों के बीच संघर्ष होता रहा है। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी कांगो में 100 से अधिक हथियारबंद समूह सक्रिय हैं।
क्षेत्र में जारी अस्थिरता का असर आम नागरिकों की जिंदगी पर भी पड़ा है। हालांकि, बुकावु में स्कूलों की आग की घटना को मौजूदा सशस्त्र संघर्ष से सीधे जोड़ने वाली कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पांच दिन पहले किंशासा में भी बड़ा अग्निकांड
कांगो में यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब देश की राजधानी किंशासा में भी कुछ दिन पहले एक बड़े अग्निकांड में कम से कम 22 लोगों की मौत हुई थी।
घटना एक शादी समारोह के दौरान एक इमारत में हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, संकरे रास्तों और गलियों में बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से बाहर निकलने में मुश्किल हुई। लोगों ने एक-दूसरे को धक्का देते हुए बाहर निकलने की कोशिश की, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
बुकावु में हुए हादसे और किंशासा की घटना अलग-अलग परिस्थितियों में हुई हैं, लेकिन दोनों ने भीड़भाड़ वाली जगहों पर आग लगने के बाद सुरक्षित निकासी और आपातकालीन व्यवस्था की अहमियत को सामने रखा है।
हादसे की वजह की जांच जरूरी
बुकावु में 26 छात्रों की मौत ने स्थानीय स्तर पर गहरा दुख पैदा किया है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि आग के दौरान स्कूल में मौजूद कई बच्चों को बाहर निकलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाया। कुछ बच्चों ने खिड़कियों से कूदकर जान बचाने की कोशिश की, जबकि अन्य संकरे निकास मार्गों में फंस गए।
अभी आग लगने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है। इसलिए किसी विशेष कारण या लापरवाही को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।
जांच में आग की शुरुआत, उसके तेजी से फैलने की परिस्थितियों, स्कूलों की निकासी व्यवस्था और प्रभावित क्षेत्र में अग्नि सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। इस बीच अस्पतालों में भर्ती 29 छात्रों के स्वास्थ्य पर भी नजर बनी हुई है।
बुकावु की इस त्रासदी में 26 छात्रों की जान चली गई है और बड़ी संख्या में बच्चे घायल हुए हैं। यदि मृतकों की संख्या बढ़ती है, तो यह हादसा और भी गंभीर रूप ले सकता है। फिलहाल राहत कार्य, घायलों का उपचार और घटना की वास्तविक वजह का पता लगाना प्राथमिकता है।











