El Nino Impact in India: भारत के 218 जिलों में सूखे जैसे हालात, 86 जिलों में भारी बारिश से बढ़ी चिंता

El Nino Impact in India के बीच देश के 218 जिलों में सूखे जैसे हालात हैं, जबकि 86 जिलों में भारी बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। जानें मौसम और बारिश का ताजा असर।

देशभर में पिछले चार हफ्तों के दौरान हुई बारिश के आंकड़ों के आधार पर कम से कम 218 जिलों में सूखे जैसे हालात सामने आए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के स्टैंडर्डाइज्ड प्रेसिपिटेशन इंडेक्स (SPI) के अनुसार इन जिलों को मध्यम, गंभीर और बहुत ज्यादा सूखे की श्रेणियों में रखा गया है।

नई दिल्ली: भारत में अल नीनो (El Nino) के संभावित प्रभाव के बीच मानसूनी बारिश का असमान वितरण चिंता बढ़ा रहा है। देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार सप्ताह में देश के कम से कम 218 जिलों में मध्यम से लेकर गंभीर और अत्यधिक सूखे जैसी स्थिति दर्ज की गई है। दूसरी ओर, 86 जिलों में अत्यधिक बारिश या गीली परिस्थितियां देखने को मिली हैं।

मौसम की यह तस्वीर बताती है कि इस साल मानसून का असर देश के अलग-अलग हिस्सों में एक जैसा नहीं रहा है। कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी किसानों और कृषि गतिविधियों के लिए चुनौती बन रही है, जबकि दूसरी तरफ अत्यधिक बारिश से बाढ़, जलभराव और फसलों को नुकसान जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

218 जिलों में सूखे जैसे हालात

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) बारिश की स्थिति का आकलन करने के लिए स्टैंडर्डाइज्ड प्रेसिपिटेशन इंडेक्स (SPI) का इस्तेमाल करता है। यह इंडेक्स किसी निर्धारित अवधि में हुई बारिश की तुलना उस अवधि में सामान्य तौर पर होने वाली ऐतिहासिक बारिश से करता है। इसी आधार पर बारिश की कमी या अधिकता की गंभीरता का आकलन किया जाता है।

13 अगस्त से 9 सितंबर 2026 के बीच चार सप्ताह की अवधि में 218 जिले सूखे जैसी विभिन्न श्रेणियों में दर्ज किए गए। इनमें मध्यम, गंभीर और अत्यधिक सूखे की श्रेणियां शामिल हैं। यह संख्या 2023 की समान अवधि की तुलना में अधिक है। 2023 में इसी तरह की श्रेणियों में 188 जिले दर्ज किए गए थे। यानी इस साल ऐसे जिलों की संख्या 30 अधिक है। गौर करने वाली बात यह है कि 2023 भी सामान्य से कमजोर मानसून और मजबूत अल नीनो प्रभाव वाला वर्ष रहा था।

सूखे की गंभीरता में आया बदलाव

हालांकि, सूखे की सभी श्रेणियों को मिलाकर देखें तो तस्वीर थोड़ी अलग है। 2023 में हल्के से लेकर अत्यधिक सूखे की श्रेणी में कुल 469 जिले थे, जबकि 2026 की संबंधित चार सप्ताह की अवधि में यह संख्या घटकर 454 हो गई। लेकिन कुल संख्या कम होने के बावजूद सूखे की गंभीर श्रेणियों में बढ़ोतरी हुई है। हल्के सूखे वाले जिलों की संख्या 2023 में 281 थी, जो अब घटकर 236 रह गई है। इसके विपरीत मध्यम सूखे वाले जिलों की संख्या 97 से बढ़कर 120 और गंभीर सूखे वाले जिलों की संख्या 50 से बढ़कर 65 हो गई है।

बहुत अधिक सूखे वाले जिलों की संख्या हालांकि 41 से घटकर 33 हुई है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बारिश की कमी से प्रभावित कई क्षेत्रों में स्थिति हल्की कमी से आगे बढ़कर मध्यम या गंभीर श्रेणी में पहुंची है।

किन राज्यों में ज्यादा असर?

IMD के आकलन के अनुसार, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ, गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और मेघालय के कई जिलों में बारिश की कमी से जुड़ी स्थिति दिखाई दे रही है। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्से भी इस सूची में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मानसून की अनियमितता का असर कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है। 

भारत जैसे कृषि-निर्भर देश में बारिश की कमी का प्रभाव केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाद्य उत्पादन, ग्रामीण आय और कुछ कृषि वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

86 जिलों में अत्यधिक बारिश

दिलचस्प बात यह है कि बारिश की कमी के साथ-साथ अत्यधिक बारिश वाले जिलों की संख्या भी बढ़ी है। मध्यम, गंभीर और अत्यधिक गीली परिस्थितियों वाली श्रेणियों में इस साल 86 जिले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह संख्या 58 थी। गंभीर रूप से गीले जिलों की संख्या 11 से बढ़कर 26 हो गई है, जबकि अत्यधिक गीली स्थिति वाले जिले 14 से बढ़कर 16 हो गए हैं। इसका मतलब है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण अधिक असमान दिखाई दे रहा है।

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