तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में शिक्षा बजट की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य बताया। उन्होंने Gen Z, Gen Alpha और Gen Beta को विकास विजन से जोड़ने की बात कही। सरकार 2047 तक राज्य को 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना चाहती है।
हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि उनकी सरकार राज्य के बजट में शिक्षा क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा में व्यापक बदलावों के जरिए Gen Z के साथ Gen Alpha और Gen Beta को भी तेलंगाना के विकास अभियान से जोड़ना चाहती है।
शिक्षा बजट को 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार रात विधानसभा में दो घंटे से अधिक लंबे भाषण के दौरान शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी सरकार की प्राथमिकताओं का विस्तार से उल्लेख किया। शिक्षा विभाग भी उनके पास है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य शिक्षा के लिए बजट आवंटन को बढ़ाकर कुल राज्य बजट का 15 प्रतिशत करना है।
रेवंत रेड्डी के अनुसार, पिछली BRS सरकार ने 2023-24 में शिक्षा के लिए 18,955 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जो राज्य के बजट का 6.53 प्रतिशत था। उनकी सरकार ने 2025-26 में शिक्षा के लिए आवंटन बढ़ाकर 23,729 करोड़ रुपये कर दिया, जो कुल बजट का 7.78 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य शिक्षा क्षेत्र की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत तक पहुंचाना है।
Gen Z से आगे Gen Alpha और Gen Beta पर जोर
रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना के भविष्य को आकार देने में केवल मौजूदा युवा पीढ़ी को ध्यान में रखना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने Gen Z के साथ Gen Alpha और Gen Beta को भी शिक्षा नीति और राज्य के विकास के विजन से जोड़ने की बात कही।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2034 तक तेलंगाना की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना और ‘Telangana Rising 2047’ विजन के तहत 2047 तक इसे 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, शिक्षा नीति के जरिए इन पीढ़ियों को इस दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्य में भागीदार बनाने की योजना है।
उन्होंने कहा कि Gen Z को लेकर काफी चर्चा होती है, लेकिन उनकी सोच केवल इसी पीढ़ी तक सीमित नहीं है। Gen Alpha और Gen Beta को भी भविष्य की शिक्षा व्यवस्था और राज्य की विकास यात्रा का हिस्सा बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
नई शिक्षा नीति के लिए आयोग गठित
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार ने नई शिक्षा नीति तैयार करने के लिए एक शिक्षा आयोग का गठन किया था। आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुका है।
अब पूर्व सांसद के. केशव राव की अध्यक्षता वाली समिति इस रिपोर्ट का परीक्षण करेगी। रेवंत रेड्डी ने विधानसभा के सभी सदस्यों से समिति के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत करने की अपील की।
सरकार का उद्देश्य शिक्षा नीति को राज्य की दीर्घकालिक विकास योजनाओं के साथ जोड़ना है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा को आर्थिक और सामाजिक बदलाव का प्रमुख माध्यम बताया।
सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू
रेवंत रेड्डी ने कहा कि उनकी सरकार ने सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की हैं। उनके अनुसार, पहले साल इन कक्षाओं में 64,000 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया।
सरकार ने नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए मिड-डे मील उपलब्ध कराने की बात भी कही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बेहतर गुणवत्ता और स्वच्छता के साथ नाश्ता तथा भोजन उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीकृत रसोई विकसित की गई हैं।
उन्होंने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने का भी दावा किया। उनके अनुसार, सरकारी स्कूलों में छात्र नामांकन में 86,000 की वृद्धि हुई है। रेवंत रेड्डी ने इसे शिक्षा मंत्री के तौर पर अपने प्रदर्शन का प्रमाण बताया।
BJP के शिक्षा मंत्री संबंधी बयान पर जवाब
मुख्यमंत्री ने BJP के फ्लोर लीडर ए. महेश्वर रेड्डी की उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई, जिसमें राज्य में पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री नहीं होने की बात कही गई थी।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रुचि है। उन्होंने शिक्षा को देश के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि कक्षा में ही देश का भविष्य तैयार होता है और शिक्षा लोगों की परिस्थितियों तथा भविष्य को बदलने की क्षमता रखती है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग में सरकार की ओर से किए गए कामों का भी उल्लेख किया।
55 दिनों में 10,006 शिक्षक पद भरने का दावा
रेवंत रेड्डी ने कहा कि दिसंबर 2023 में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद पहले वर्ष में सिर्फ 55 दिनों के भीतर 10,006 शिक्षक रिक्तियां भरी गईं।
उन्होंने पिछली BRS सरकार पर शिक्षा क्षेत्र की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री के अनुसार, BRS के 10 वर्ष के कार्यकाल में केवल 7,857 शिक्षक पद भरे गए थे।
इन आंकड़ों के जरिए उन्होंने कांग्रेस सरकार की शिक्षा संबंधी प्राथमिकताओं और भर्ती प्रक्रिया को पिछली सरकार से बेहतर बताया।
पॉलीटेक्निक कॉलेजों के निजीकरण के आरोप को बताया गलत
मुख्यमंत्री ने विपक्षी BRS पर पॉलीटेक्निक कॉलेजों के निजीकरण को लेकर कथित तौर पर गलत प्रचार करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि पॉलीटेक्निक कॉलेजों का निजीकरण नहीं किया जा रहा है। इन्हें तकनीकी शिक्षा विभाग से सरकार की नई ‘Young India Skills University’ के तहत लाया जा रहा है।
रेवंत रेड्डी के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, इंटर्नशिप और व्यावहारिक प्रशिक्षण तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है।
सरकार का दावा है कि कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करने से विद्यार्थियों को रोजगार और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।
फीस रीइंबर्समेंट पर BJP के अभियान का जवाब
छात्रों की ट्यूशन फीस रीइंबर्समेंट योजना को लेकर BJP के अभियान पर भी मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को पिछली BRS सरकार से 5,430 करोड़ रुपये का बकाया विरासत में मिला था।
रेवंत रेड्डी के अनुसार, उनकी सरकार ने पिछले 32 महीनों में 3,488 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
उन्होंने कहा कि जिन कॉलेजों को Vigilance जांच में क्लीन चिट मिल चुकी है, उन्हें फीस रीइंबर्समेंट योजना के तहत भुगतान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ कॉलेजों ने योजना के तहत राशि प्राप्त करने के लिए अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल किया था। सरकार ऐसे संस्थानों को लेकर सतर्कता जांच और पात्रता के आधार पर भुगतान करने की नीति अपनाने की बात कर रही है।
शिक्षा को आर्थिक विकास की आधारशिला बनाने की तैयारी
रेवंत रेड्डी के विधानसभा भाषण का एक प्रमुख फोकस शिक्षा और आर्थिक विकास के बीच संबंध पर रहा। उन्होंने कहा कि तेलंगाना को 2034 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बदलना जरूरी है।
सरकार प्री-प्राइमरी शिक्षा, शिक्षक भर्ती, मिड-डे मील, कौशल प्रशिक्षण और नई शिक्षा नीति जैसे क्षेत्रों पर जोर दे रही है। साथ ही Gen Z, Gen Alpha और Gen Beta को दीर्घकालिक विकास विजन से जोड़ने की योजना भी मुख्यमंत्री ने सामने रखी।
हालांकि, शिक्षा बजट को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने और 2047 तक 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने जैसे लक्ष्य दीर्घकालिक सरकारी लक्ष्य हैं। इन लक्ष्यों की प्राप्ति भविष्य में बजट आवंटन, नीतियों के क्रियान्वयन, शिक्षा के परिणामों और राज्य की आर्थिक वृद्धि पर निर्भर करेगी।










