ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और युवा शक्ति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत वास्तविक समय में अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का अनुभव कर रहा है और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में दुनिया में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
Nirmala Sitharaman: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की आर्थिक क्षमता, युवा आबादी और डिजिटल बुनियादी ढांचे को देश की प्रमुख ताकत बताते हुए कहा कि भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का वास्तविक लाभ उठा रहा है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में बोलते हुए वित्त मंत्री ने भारत की तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था, डिजिटल सार्वजनिक ढांचे और तकनीकी प्रगति का उल्लेख किया।
अपने संबोधन के दौरान सीतारमण ने उन लोगों पर भी कटाक्ष किया, जो भारत की आर्थिक प्रगति और युवाओं की क्षमता को लेकर लगातार सवाल उठाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहले इस्तेमाल किए गए ‘नाराज फूफाजी’ वाले मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए ऐसे आलोचकों को जवाब दिया।
‘नाराज फूफाजी’ वाले बयान से संशयवादियों पर निशाना
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को लेकर कुछ लोग लगातार नकारात्मक दृष्टिकोण पेश करते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे संशयवादी भारत की प्रगति की रफ्तार और युवा आबादी की क्षमता पर सवाल उठाने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे लोगों के पास यह पूछने के लिए हमेशा नए कारण होते हैं कि क्या भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश वास्तव में अवसर है या अब यह देश पर बोझ बन चुका है। सीतारमण के अनुसार, इस तरह की बहसों के बावजूद भारत की युवा आबादी देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बनी हुई है।
उन्होंने जोर दिया कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में युवा शक्ति की भूमिका केंद्रीय है। उनके मुताबिक, देश को अपनी उपलब्धियों को पहचानते हुए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का बढ़ता प्रभाव
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में वित्त मंत्री ने भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल क्षेत्र में ऐसी प्रणालियां विकसित की हैं, जिनका प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की वित्तीय भागीदारी पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का उदाहरण देते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान ने वित्तीय लेनदेन को बड़े पैमाने पर बदल दिया है। UPI के जरिए होने वाले लगातार बढ़ते लेनदेन को भारत की डिजिटल क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
सीतारमण ने यह भी कहा कि भारत प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रही प्रगति को भी उन्होंने देश की तकनीकी महत्वाकांक्षा और नवाचार क्षमता से जोड़ा।

टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर
वित्त मंत्री ने भारत में एक व्यापक फेडरल इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि ऐसा मंच देश के अलग-अलग तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों को एक साझा इकोसिस्टम में जोड़ सकता है। इससे कंपनियों, वित्तीय संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल और वित्तीय नवाचार को केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय व्यापक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाना है।
CBDC और डिजिटल करेंसी पर बढ़े प्रयोग
सीतारमण ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के थोक और खुदरा पायलट प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया। डिजिटल रुपया भारत की भुगतान और वित्तीय प्रणाली के संभावित अगले चरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वित्त मंत्री के अनुसार, डिजिटल वित्तीय तकनीकों के विस्तार के साथ नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। नई तकनीकों को अपनाते समय उनके प्रभाव और संभावित जोखिमों का आकलन करना होगा।
AI को बताया ‘दो धारी तलवार’
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी Artificial Intelligence (AI) के बढ़ते इस्तेमाल पर भी सीतारमण ने सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने AI को ऐसी तकनीक बताया, जिसके फायदे और जोखिम दोनों हैं। उनके मुताबिक, AI वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान करने में मदद कर सकती है, लेकिन दूसरी ओर अपराधी इसी तकनीक का इस्तेमाल अधिक जटिल धोखाधड़ी के लिए भी कर सकते हैं। इसलिए तकनीकी विकास के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है।
वित्त मंत्री ने कहा कि नवाचार से दक्षता बढ़नी चाहिए, लेकिन इसके कारण नई सिस्टमेटिक कमजोरियां पैदा नहीं होनी चाहिए। इसके लिए वित्तीय संस्थानों, तकनीकी कंपनियों और नियामकों को मिलकर काम करने की जरूरत होगी।










