BRICS समिट में जिनपिंग-पुतिन के बीच दिखे PM मोदी, बोले- टेक्नोलॉजी और मिनरल्स को हथियार बनाना गलत

BRICS समिट 2026 में PM मोदी ने टेक्नोलॉजी और जरूरी मिनरल्स को हथियार बनाने पर चिंता जताई। नई दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर सहमति बनी।

18वें BRICS समिट के समापन पर PM मोदी ने टेक्नोलॉजी और जरूरी मिनरल्स को हथियार की तरह इस्तेमाल करने को गलत बताया। उन्होंने मजबूत सप्लाई चेन और सहयोग पर जोर दिया। ग्रुप फोटो में मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन साथ दिखाई दिए।

नई दिल्ली: 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का समापन हो गया। सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों को हथियार की तरह इस्तेमाल करने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से वैश्विक प्रगति प्रभावित होती है। प्रधानमंत्री ने BRICS देशों से आपसी सहयोग बढ़ाने और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने की अपील की। समिट की शुरुआत भारत मंडपम में सदस्य देशों के नेताओं के ग्रुप फोटो सेशन से हुई। तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक ओर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नजर आए। यह तस्वीर BRICS सम्मेलन के दौरान वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच खास चर्चा में रही।

PM मोदी ने टेक्नोलॉजी और मिनरल्स को लेकर क्या कहा?

BRICS समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों को हथियार की तरह इस्तेमाल करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदमों का असर केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे दुनिया की आर्थिक और तकनीकी प्रगति प्रभावित हो सकती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में महामारी, जलवायु संबंधी आपदाओं और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया के देश एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी एक हिस्से में पैदा होने वाला संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में देशों के बीच सहयोग और भरोसा बढ़ाना जरूरी है।

मजबूत सप्लाई चेन पर BRICS देशों से जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने की बात कही, ताकि वैश्विक स्तर पर किसी संकट का असर कम किया जा सके।

उनका संदेश ऐसे समय में आया है, जब तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और रणनीतिक संसाधनों को लेकर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी हुई है। आधुनिक उद्योगों और ऊर्जा क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री ने BRICS को सहयोग, विकास और वैश्विक चुनौतियों के सामूहिक समाधान के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में पेश किया।

फोटो सेशन में जिनपिंग और पुतिन के बीच PM मोदी

समिट के दूसरे दिन भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं का ग्रुप फोटो सेशन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच खड़े दिखाई दिए।

यह दृश्य इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि BRICS सम्मेलन में शामिल प्रमुख शक्तियों के बीच वैश्विक राजनीति, व्यापार, सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। इसके बावजूद संगठन के मंच पर सदस्य देशों ने साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर सहयोग का संदेश दिया।

PM मोदी करेंगे 7 देशों के नेताओं से द्विपक्षीय बैठक

BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भी शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान सात देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें प्रस्तावित हैं।

समिट के पहले दिन भारत ने विदेशी नेताओं के लिए डिनर का आयोजन किया था। इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद को छोड़कर अन्य विश्व नेता शामिल हुए।

अबू धाबी के क्राउन प्रिंस समिट में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट गए थे। वहीं, PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आराम करने के लिए अपने होटल लौट गए थे।

BRICS देशों ने नई दिल्ली घोषणापत्र को दी मंजूरी

BRICS देशों ने शनिवार को सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी दी। इसमें कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों की साझा स्थिति सामने रखी गई।

घोषणापत्र में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की। सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने और आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।

इसके अलावा आतंकवादी संगठनों तक पहुंचने वाली फंडिंग को रोकने और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने पर भी सहमति जताई गई।

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच साझा बयान अहम

BRICS देशों के साझा घोषणापत्र को ऐसे समय में मंजूरी मिली है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है। ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात समेत क्षेत्र के अलग-अलग देशों के कई मुद्दों पर अलग-अलग हित और रुख हैं।

ऐसे वातावरण में BRICS के भीतर साझा बयान पर सहमति बनना समूह की कूटनीतिक भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घोषणापत्र में विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर सदस्य देशों के बीच सहयोग का संदेश दिया गया।

PM मोदी और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति रामाफोसा की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंधों तथा आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई।

BRICS के मंच पर भारत और दक्षिण अफ्रीका दोनों महत्वपूर्ण सदस्य हैं। ऐसे में दोनों देशों के नेताओं की बैठक संगठन के भीतर सहयोग के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण रही।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो भारत से रवाना

BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी सम्मेलन के बाद दिल्ली से रवाना हो गए।

उनका भारत दौरा BRICS सम्मेलन की गतिविधियों के बीच हुआ। सम्मेलन में विभिन्न देशों के नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, बहुपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

वैश्विक मीडिया ने भारत की कूटनीति को सराहा

BRICS नई दिल्ली घोषणापत्र को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। रॉयटर्स ने सम्मेलन को भारत की महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ईरान, सऊदी अरब, UAE, चीन और रूस जैसे अलग-अलग हितों वाले देशों को साझा बयान पर सहमत कराने में भूमिका निभाई।

वहीं, फाइनेंशियल टाइम्स ने BRICS को लेकर चीन और भारत के दृष्टिकोण में अंतर की ओर ध्यान दिलाया। रिपोर्ट में कहा गया कि चीन BRICS को वैश्विक ताकत के रूप में मजबूत करना चाहता है, जबकि भारत इसे अमेरिका-विरोधी गुट के बजाय विकासशील देशों के बीच सहयोग के मंच के तौर पर देखता है।

BRICS में भारत का संतुलित रुख

नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में भारत ने वैश्विक सहयोग और बहुपक्षवाद पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के इस्तेमाल से लेकर सप्लाई चेन की मजबूती तक कई ऐसे मुद्दे शामिल रहे, जिनका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

समिट में चीन और रूस जैसी प्रमुख शक्तियों की मौजूदगी के बीच भारत ने विभिन्न हितों वाले देशों के साथ संवाद और सहमति बनाने पर जोर दिया। नई दिल्ली घोषणापत्र पर सदस्य देशों की सहमति और आतंकवाद की निंदा को सम्मेलन के प्रमुख परिणामों में गिना जा रहा है।

कुल मिलाकर, 18वें BRICS सम्मेलन में भारत ने वैश्विक दक्षिण, बहुपक्षीय सहयोग और साझा विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी। प्रधानमंत्री मोदी की विभिन्न नेताओं के साथ बैठकों और BRICS घोषणापत्र पर बनी सहमति ने भारत की कूटनीतिक भूमिका को केंद्र में रखा।

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