BRICS समिट का आखिरी दिन: साझा करेंसी नहीं, स्थानीय मुद्राओं में कारोबार पर जोर; PM मोदी की आज 4 द्विपक्षीय बैठकें

BRICS समिट के अंतिम दिन PM मोदी 4 विश्व नेताओं से बैठक करेंगे। साझा करेंसी का फिलहाल प्रस्ताव नहीं, स्थानीय मुद्रा, डिजिटल पेमेंट और आतंकवाद पर जोर।

BRICS समिट के अंतिम दिन PM मोदी चार विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। भारत ने स्पष्ट किया है कि साझा करेंसी का फिलहाल प्रस्ताव नहीं है। सदस्य देशों में स्थानीय मुद्राओं से व्यापार, डिजिटल भुगतान और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर जोर दिया जा रहा है।

नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS समिट का आज, 13 सितंबर 2026, आखिरी दिन है। सम्मेलन के अंतिम दिन ओपन बैठक होगी, जिसमें BRICS सदस्य देशों के नेता और आमंत्रित देशों के प्रमुख शामिल होंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई विश्व नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। समिट के दौरान भारत ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल BRICS देशों के लिए कोई साझा करेंसी बनाने का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर चर्चा जारी है।

BRICS में साझा करेंसी का फिलहाल प्रस्ताव नहीं

BRICS समिट के पहले दिन भारत ने साझा करेंसी को लेकर स्थिति स्पष्ट की। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, फिलहाल BRICS देशों की अपनी कोई साझा मुद्रा शुरू करने का प्रस्ताव नहीं है।

हालांकि, सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में आपसी व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर चर्चा हो रही है। इसका उद्देश्य सीमा-पार कारोबार को आसान बनाना, भुगतान प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना और लेन-देन की लागत कम करना है।

BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशों को भी गति मिल सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि BRICS ने कोई साझा मुद्रा या एकल भुगतान प्रणाली अपना ली है।

नई दिल्ली डेक्लरेशन को BRICS देशों की मंजूरी

BRICS देशों ने शनिवार को समिट के दौरान नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। इसमें कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों की साझा स्थिति सामने रखी गई।

डेक्लरेशन में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जानी चाहिए।

इसके अलावा आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर भी सहमति जताई गई।

यह संयुक्त रुख ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और ईरान, सऊदी अरब तथा UAE जैसे देशों के कई क्षेत्रीय मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं।

PM मोदी ने BRICS के भविष्य को लेकर रखे 5 अहम विचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट के दौरान BRICS की भूमिका और भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उनके बयान में अगले दो दशकों के लिए संगठन की दिशा तय करने से लेकर ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने तक कई मुद्दे शामिल रहे।

1. अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा

PM मोदी ने BRICS के अगले 20 वर्षों के लिए नया एजेंडा तैयार करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने फैसलों को लागू करने के लिए एक स्थायी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया।

2. ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों के नियम तय करने में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी होनी चाहिए।

यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई तकनीकों से जुड़े वैश्विक नियमों और मानकों को लेकर विकसित और विकासशील देशों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर बहस चलती रही है।

3. युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने की जरूरत

PM मोदी ने युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय बातचीत तथा कानून से जुड़ी ट्रेनिंग देने का सुझाव दिया। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया के लिए तैयार करना है।

4. नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क

प्रधानमंत्री ने मुसीबत में फंसे नाविकों के लिए देशों के बीच एक इमरजेंसी नेटवर्क बनाने की बात कही। इसके तहत जरूरत पड़ने पर नाविकों को चिकित्सा सहायता, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकासी में मदद मिल सकेगी।

5. भविष्य साझा है तो फैसले भी साझा होने चाहिए

PM मोदी ने कहा कि अगर दुनिया का भविष्य साझा है, तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए। इस संदेश के जरिए उन्होंने वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।

दिल्ली में BRICS समिट के कारण ट्रैफिक डायवर्जन

BRICS समिट के अंतिम दिन 13 सितंबर को नई दिल्ली में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कई इलाकों में यातायात नियंत्रित रहेगा।

इस दौरान 22 प्रमुख डायवर्जन प्वाइंट बनाए गए हैं और 35 से अधिक सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है।

सरदार पटेल मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट, तीन मूर्ति मार्ग, अकबर रोड, जनपथ, अशोक रोड, बाराखंभा रोड, टॉल्स्टॉय मार्ग, मथुरा रोड, लोधी रोड, अफ्रीका एवेन्यू और एपीजे अब्दुल कलाम रोड समेत कई प्रमुख मार्गों पर आम वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना है।

दिल्ली में रहने वाले और शहर से गुजरने वाले लोगों को यात्रा से पहले यातायात स्थिति की जानकारी लेने और वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।

BRICS समिट में शामिल होने दिल्ली पहुंचे सऊदी विदेश मंत्री

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद शनिवार देर रात नई दिल्ली पहुंचे। वह 18वें BRICS समिट में शामिल होंगे।

सऊदी अरब को इस समिट में आमंत्रित देश के रूप में शामिल किया गया है। उनकी मौजूदगी ऐसे समय महत्वपूर्ण है जब BRICS का विस्तार और पश्चिम एशिया के देशों के साथ संगठन के संबंध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं।

तनाव के बीच ईरान और UAE के राष्ट्रपतियों की मुलाकात

BRICS समिट से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की।

दोनों नेताओं की बैठक पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हुई। क्षेत्रीय मुद्दों पर ईरान और UAE के रुख कई मामलों में अलग रहे हैं, लेकिन दोनों देश पिछले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश करते रहे हैं।

ऐसे माहौल में दोनों राष्ट्रपतियों की बातचीत को संवाद का रास्ता खुला रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश

BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग का एक प्रमुख मुद्दा स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाना है। सदस्य देश आपसी व्यापार में डॉलर के इस्तेमाल को कम करने और अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

इसके साथ ही अलग-अलग देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एकीकृत पेमेंट सिस्टम या साझा करेंसी नहीं है।

भारत की अध्यक्षता में हो रहे समिट में स्थानीय मुद्राओं में कारोबार और आसान डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। भारत BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ने की संभावना पर भी जोर दे रहा है।

बैंक की रिपोर्ट से निकला था BRICS नाम

BRICS की शुरुआत एक औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में नहीं हुई थी। वर्ष 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था। इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में रेखांकित किया गया था।

इसके बाद वर्ष 2006 में चारों देश एक साथ आए और BRIC समूह बना। वर्ष 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई।

वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के समूह में शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। इसके बाद ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी पूर्ण सदस्य बने।

आज BRICS दुनिया के प्रमुख आर्थिक और बहुपक्षीय मंचों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सदस्य देशों की वैश्विक GDP में हिस्सेदारी 27% से अधिक है, जबकि यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी करीब 14% बताई जाती है।

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