ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद की, रोजाना 50 लाख बैरल की सप्लाई प्रभावित

ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद कर दी। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद इसी मार्ग से रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल यानबू भेजा जा रहा था।

ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद कर दी। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद इसी मार्ग से रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल यानबू भेजा जा रहा था। हमले में पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए और आग लगी।

रियाद: सऊदी अरब ने ड्रोन हमलों के बाद अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। गुरुवार को हुए हमलों में पाइपलाइन से जुड़े पंपिंग स्टेशनों में आग लगने और कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब ईरान युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण सऊदी अरब इसी पाइपलाइन के जरिए रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल यानबू भेज रहा था।

कई ड्रोन हमलों के बाद पाइपलाइन बंद

सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि पाइपलाइन से जुड़े इलाकों में गुरुवार को कई हमले किए गए। हमलों के बाद मंत्रालय की टीमें पाइपलाइन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने के साथ नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हमलों के पीछे कौन था। किसी देश या संगठन ने अभी तक इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है। सऊदी अधिकारियों की ओर से सामने आई जानकारी और हमले के बाद की तस्वीरों के आधार पर जांच जारी है।

पाइपलाइन को बंद करने का फैसला सऊदी अरब की तेल आपूर्ति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद यह मार्ग देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक कच्चा तेल पहुंचाने के लिए बेहद अहम हो गया था।

पंपिंग स्टेशनों को बनाया गया निशाना

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों में पाइपलाइन के आसपास स्थित पंपिंग स्टेशनों को निशाना बनाया गया। ये स्टेशन पाइपलाइन के भीतर तेल को दबाव के साथ आगे बढ़ाने और लंबी दूरी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शुक्रवार को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में एक पंपिंग स्टेशन पर आग से हुए नुकसान के निशान दिखाई दिए। दूसरी तस्वीर में स्टेशन से काला धुआं उठता नजर आया।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पाइपलाइन के मुख्य हिस्से को कितना नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा सऊदी अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को दोबारा कब चालू किया जाएगा। सैटेलाइट तस्वीरों में हमले के बाद पंपिंग स्टेशन से धुआं उठता दिखाई दिया।

सऊदी का दावा- इराक से आए ड्रोन

सऊदी विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि रियाद और मदीना क्षेत्रों में पाइपलाइन से जुड़े ठिकानों पर कई ड्रोन से हमला किया गया। सऊदी के मुताबिक, ये ड्रोन इराक से आए थे। रियाद ने यह भी कहा कि उसने फिलहाल जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है। सऊदी के अनुसार, इराकी प्रधानमंत्री के अनुरोध के बाद उसने सैन्य जवाब देने से परहेज किया है।

सऊदी अरब ने इराक से अपनी जमीन से होने वाले ऐसे हमलों को रोकने के लिए कार्रवाई करने की मांग की है। रियाद का कहना है कि इराक को अपने क्षेत्र का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने देना चाहिए। इराकी सरकार ने भी हमले की निंदा की है। उसने कहा है कि मामले की जांच की जाएगी और इराक की जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल दूसरे देशों पर हमले के लिए नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, हमले के जिम्मेदार पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद बढ़ी पाइपलाइन की अहमियत

सऊदी अरब का अधिकांश कच्चा तेल देश के पूर्वी हिस्से में स्थित तेल क्षेत्रों से निकलता है। सामान्य परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बड़ी मात्रा में तेल पहुंचाने के लिए समुद्री मार्गों का इस्तेमाल किया जाता है। फारस की खाड़ी से बाहर निकलने वाले तेल टैंकरों के लिए होर्मुज स्ट्रेट एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। लेकिन ईरान युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद इस समुद्री रास्ते से तेल भेजना मुश्किल हो गया।

ऐसे में सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर निर्भरता बढ़ाई। यह पाइपलाइन देश के पूर्वी हिस्से से कच्चे तेल को सीधे पश्चिमी तट पर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि तेल को होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती।

होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी अरब इसी पाइपलाइन के माध्यम से रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल यानबू भेज रहा था। यानबू पहुंचने के बाद कच्चे तेल को जहाजों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।

इसलिए पाइपलाइन पर हुआ हमला केवल स्थानीय बुनियादी ढांचे से जुड़ी घटना नहीं है। इससे क्षेत्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

लाल सागर पर भी बढ़ता दबाव

होर्मुज स्ट्रेट के बाद अब लाल सागर का समुद्री मार्ग भी दबाव में आता दिखाई दे रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास अपनी स्थिति मजबूत करने का दावा किया है।

हूतियों ने सऊदी जहाजों को इस समुद्री रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं देने की बात कही है। संगठन के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि बाब अल-मंदेब के बीच स्थित पेरिम द्वीप पर सऊदी समर्थित सेनाओं ने अपना नियंत्रण खो दिया है।

हूतियों का दावा है कि अब उनके नियंत्रण में करीब 5,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

बाब अल-मंदेब स्ट्रेट वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। यह एशिया और यूरोप के बीच जहाजों की आवाजाही को जोड़ता है। लाल सागर के जरिए तेल समेत विभिन्न वस्तुओं की आवाजाही इसी क्षेत्र से होती है।

दो प्रमुख समुद्री मार्गों पर संकट का असर

होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट दोनों की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए मौजूदा घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए चिंता बढ़ा सकता है। होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात को जारी रखने का विकल्प अपनाया था।

अब उसी पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों पर ड्रोन हमलों और अस्थायी बंदी ने वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

यदि पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है, तो यानबू के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने वाले तेल की मात्रा प्रभावित हो सकती है। वहीं, लाल सागर और बाब अल-मंदेब में बढ़ता तनाव समुद्री परिवहन के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकता है।

हालांकि, फिलहाल पाइपलाइन को हुए वास्तविक नुकसान, बंदी की अवधि और तेल निर्यात पर अंतिम प्रभाव को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

वैश्विक तेल बाजार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है घटनाक्रम?

सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है और उसकी निर्यात क्षमता का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ऐसे समय में जब होर्मुज स्ट्रेट पहले ही बंद है, ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी तेल के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग बनी हुई थी।

इस पाइपलाइन के संचालन में रुकावट से बाजार में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। साथ ही, यदि क्षेत्र के अन्य समुद्री मार्ग भी लंबे समय तक प्रभावित होते हैं, तो एशिया और यूरोप तक तेल पहुंचाने की लागत और समय पर भी दबाव बढ़ सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सऊदी अरब पाइपलाइन को कितनी जल्दी सुरक्षित कर दोबारा शुरू कर पाता है और जांच में ड्रोन हमलों के पीछे किसकी भूमिका सामने आती है।

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