दिल्ली पुलिस ने जहांगीरपुरी में चार बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, उनके पास वैध यात्रा या पहचान दस्तावेज नहीं थे। जांच में पांच स्मार्टफोन मिले, जिनमें IMO ऐप और बांग्लादेशी पहचान दस्तावेजों की सामग्री मिली। डिपोर्टेशन प्रक्रिया शुरू की गई।
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के नॉर्थ-वेस्ट जिले के फॉरेनर सेल ने जहांगीरपुरी इलाके में कार्रवाई करते हुए चार बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई 7 सितंबर की सुबह भलस्वा फ्लाईओवर के पास की गई। जांच के दौरान पांच स्मार्टफोन बरामद हुए, जिनमें बांग्लादेशी राष्ट्रीय पहचान दस्तावेजों से जुड़ी सामग्री मिलने की बात कही गई है।
भलस्वा फ्लाईओवर के पास पुलिस का ऑपरेशन
दिल्ली पुलिस के अनुसार, नॉर्थ-वेस्ट जिले का फॉरेनर सेल गुप्त सूचनाओं और निगरानी के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रहा था। इसी क्रम में टीम को जहांगीरपुरी पुलिस स्टेशन क्षेत्र में भलस्वा फ्लाईओवर के पास कुछ संदिग्ध लोगों के मौजूद होने की सूचना मिली। पुलिस टीम ने 7 सितंबर की सुबह इलाके में कार्रवाई की और चार संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया। शुरुआती पूछताछ के दौरान वे कथित तौर पर भारत में रहने से संबंधित कोई वैध यात्रा या पहचान दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
इसके बाद पुलिस ने दस्तावेजों की विस्तृत जांच, पूछताछ और डिजिटल जानकारी के आधार पर उनकी पहचान और नागरिकता से संबंधित जानकारी की जांच की। पुलिस का दावा है कि जांच में चारों के बांग्लादेशी नागरिक होने और भारत में वैध दस्तावेजों के बिना रहने की बात सामने आई।
पुलिस के मुताबिक ट्रांसजेंडर के भेष में घूम रहे थे
पुलिस के अनुसार, चारों संदिग्ध इलाके में ट्रांसजेंडर के भेष में घूम रहे थे। उन्हें रोकने के बाद पुलिस ने उनकी पहचान और भारत में रहने की वैधता की जांच की।
लंबी पूछताछ और उपलब्ध डिजिटल जानकारी की जांच के बाद पुलिस ने उनकी नागरिकता के बारे में जानकारी जुटाई। पुलिस के मुताबिक, चारों बांग्लादेश के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं।
हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से सामने रखे गए आरोप और जांच के निष्कर्षों को संबंधित कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना है। चारों की ओर से इन आरोपों पर कोई अलग पक्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।
पांच स्मार्टफोन बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने पांच स्मार्टफोन बरामद किए। पुलिस के मुताबिक, इन मोबाइल फोन में IMO ऐप इंस्टॉल था। इसके अलावा फोन की गैलरी में बांग्लादेशी राष्ट्रीय पहचान दस्तावेज मौजूद होने की बात भी पुलिस ने कही है।
पुलिस ने डिजिटल फुटप्रिंट की जांच को संदिग्धों की पहचान और नागरिकता की पुष्टि की प्रक्रिया का हिस्सा बताया। मोबाइल फोन और उनमें मौजूद डिजिटल सामग्री मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही है।
पुलिस के अनुसार, चारों संदिग्ध शुरुआती पूछताछ में भारत में अपने रहने से संबंधित वैध यात्रा या पहचान दस्तावेज नहीं दिखा पाए थे। इसके बाद दस्तावेजों और डिजिटल जानकारी की विस्तृत जांच की गई।
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान
उत्तर-पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- सैदक उर्फ मेघा दास, उम्र 35 वर्ष
- मो. नूर मोहम्मद, उम्र 21 वर्ष
- नाज़िमुद्दीन उर्फ नेहा कक्कन, उम्र 29 वर्ष
- मो. जाहिद हसन उर्फ शिवांगी रॉय, उम्र 23 वर्ष
पुलिस के मुताबिक, चारों बांग्लादेश के अलग-अलग जिलों से संबंधित हैं।
पुलिस ने उनकी पहचान और नागरिकता की जांच के दौरान मोबाइल फोन में मौजूद सामग्री तथा अन्य डिजिटल फुटप्रिंट का भी इस्तेमाल किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच में इन्हें बांग्लादेशी नागरिक पाया गया।
विदेशी नागरिकों की निगरानी पर पुलिस का जोर
दिल्ली पुलिस का फॉरेनर सेल राजधानी में विदेशी नागरिकों से संबंधित मामलों और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी करता है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में भी कार्रवाई गुप्त सूचना और लगातार निगरानी के आधार पर की गई।
पुलिस ने कहा कि संदिग्धों से पूछताछ के दौरान उनके पास भारत में रहने के लिए जरूरी वैध यात्रा या पहचान दस्तावेज नहीं मिले। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई।
यह कार्रवाई दिल्ली में बिना वैध दस्तावेज रहने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ चल रही पुलिस की मुहिम के तहत की गई बताई गई है।
FRRO के सामने पेशी, डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू
दिल्ली पुलिस के अनुसार, मामले में कानून के प्रावधानों के तहत जरूरी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। गिरफ्तार किए गए चारों बांग्लादेशी नागरिकों को फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के सामने पेश किया गया।
पुलिस ने बताया कि तय प्रक्रिया के तहत उन्हें भारत से वापस भेजने यानी डिपोर्टेशन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में नागरिकता, दस्तावेज और भारत में रहने की वैधता की जांच के बाद संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इस मामले में भी पुलिस ने FRRO के समक्ष प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी है।
पहले भी सामने आया था ओवरस्टे का मामला
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब दिल्ली में हाल ही में वीजा शर्तों का उल्लंघन कर निर्धारित अवधि से अधिक समय तक भारत में रहने वाले दो बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी।
1 सितंबर को सामने आए उस मामले में पुलिस ने बताया था कि दोनों को भारत में रहने की अनुमति 15 दिनों के लिए दी गई थी, लेकिन वे निर्धारित अवधि से अधिक समय तक यहां रहे।
जहांगीरपुरी की ताजा कार्रवाई में हालांकि पुलिस ने चारों आरोपियों के पास वैध यात्रा या पहचान दस्तावेज नहीं होने की बात कही है और उनकी नागरिकता की जांच के बाद उन्हें बांग्लादेशी नागरिक बताया है।
जांच में डिजिटल सबूतों की भूमिका
इस मामले की एक प्रमुख विशेषता मोबाइल फोन और डिजिटल जानकारी की जांच है। पुलिस के मुताबिक, पांच स्मार्टफोन बरामद किए गए और उनमें मौजूद सामग्री की जांच की गई।
फोन में IMO ऐप इंस्टॉल होने तथा बांग्लादेशी राष्ट्रीय पहचान दस्तावेजों से संबंधित सामग्री मिलने का दावा किया गया है। पुलिस ने लगातार पूछताछ और डिजिटल फुटप्रिंट की जांच को चारों की पहचान स्थापित करने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन मोबाइल फोन के इस्तेमाल, संपर्कों या किसी अन्य गतिविधि से संबंधित कोई अतिरिक्त आरोप सामने नहीं आया है। इसलिए मामले में डिजिटल सामग्री से जुड़े निष्कर्षों को पुलिस की जांच के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
आगे की कार्रवाई क्या होगी?
चारों को FRRO के सामने पेश किए जाने के बाद डिपोर्टेशन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आगे की कार्रवाई संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होगी।
पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि चारों भारत में कब दाखिल हुए, किस रास्ते से आए या दिल्ली में कितने समय से रह रहे थे। इसी तरह, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनके खिलाफ किसी अन्य आपराधिक मामले से संबंधित जांच चल रही है या नहीं।
फिलहाल मामला मुख्य रूप से उनकी नागरिकता, भारत में रहने की वैधता और आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता से जुड़ी पुलिस कार्रवाई के रूप में सामने आया है।










