इंग्लैंड और वेल्स में असिस्टेड डाइंग को कानूनी मान्यता देने वाला प्रस्ताव शुक्रवार को फिर हाउस ऑफ कॉमन्स में मतदान के लिए आएगा। विधेयक छह महीने से कम जीवन प्रत्याशा वाले वयस्कों को निर्धारित सुरक्षा उपायों के तहत जीवन समाप्त करने में सहायता लेने की अनुमति देता है।
लंदन: इंग्लैंड और वेल्स में असिस्टेड डाइंग को कानूनी बनाने की प्रक्रिया शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच सकती है। सांसद उस प्रस्ताव पर मतदान करेंगे, जिसके जरिए इस व्यवस्था को लागू करने वाला विधेयक आगे बढ़ाया जा सकेगा। इस विधेयक के तहत ऐसे वयस्क, जिनके पास छह महीने से कम समय तक जीवित रहने की संभावना है, कुछ निर्धारित शर्तों और सुरक्षा उपायों के अधीन अपना जीवन समाप्त करने के लिए सहायता लेने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
विधेयक की प्रायोजक लेबर सांसद लॉरेन एडवर्ड्स ने कानून पारित होने में हो रही देरी को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कानून में देरी की वास्तविक मानवीय कीमत है। हालांकि, विधेयक के विरोधियों का तर्क है कि प्रस्ताव में कमजोर और संवेदनशील लोगों की पर्याप्त सुरक्षा के लिए जरूरी प्रावधान नहीं हैं।
पहले भी कॉमन्स से मिला था समर्थन
इंग्लैंड और वेल्स में कानून बदलने का पिछला प्रयास हाउस ऑफ कॉमन्स में सांसदों के समर्थन से आगे बढ़ा था। लेकिन इस साल की शुरुआत में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में यह प्रक्रिया रुक गई।
लॉर्ड्स में सांसदों ने विधेयक में 1,200 से अधिक संशोधन पेश किए थे। इसके कारण कानून को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया लंबी हो गई और विधेयक हाउस ऑफ लॉर्ड्स में अटक गया।
लॉरेन एडवर्ड्स ने कहा कि वह सांसदों से उसी कानून को दोबारा हाउस ऑफ लॉर्ड्स भेजने का समर्थन मांग रही हैं, ताकि वहां शुरू की गई प्रक्रिया पूरी की जा सके।
उनके अनुसार, लॉर्ड्स की भूमिका कानूनों की जांच करने, उनमें सुधार करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें बेहतर बनाने की है। उन्होंने कहा कि यदि लॉर्ड्स इस विधेयक में संशोधन करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है और फिर इसे अंतिम निर्णय के लिए सांसदों के पास वापस भेज सकता है।
लॉरेन एडवर्ड्स ने देरी की मानवीय कीमत बताई
एडवर्ड्स ने कानून में देरी को लेकर कहा कि मौजूदा व्यवस्था में मौजूद कथित अन्याय और क्रूरता को दूर करने के लिए विधेयक को आगे बढ़ाना जरूरी है।
उनका कहना है कि कानून बनाने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स दोनों की अपनी भूमिका है। उनके मुताबिक, कॉमन्स से पारित विधेयक पर लॉर्ड्स द्वारा समीक्षा और संशोधन किया जा सकता है, लेकिन यदि समान विधेयक दोबारा कॉमन्स से पारित हो जाता है तो लॉर्ड्स उसकी प्रगति को रोक नहीं सकता।
एडवर्ड्स ने कहा कि मौजूदा कानून को बदलने में देरी का असर वास्तविक लोगों के जीवन पर पड़ रहा है।
डेम एस्थर रैंटजन ने बिल के समर्थन की अपील की
असिस्टेड डाइंग की प्रमुख समर्थक और अनुभवी प्रसारक डेम एस्थर रैंटजन ने सांसदों से विधेयक का समर्थन करने की अपील की है।
86 वर्षीय रैंटजन खुद टर्मिनल कैंसर से जूझ रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी अपनी जिंदगी “असहनीय” हो गई है।
रैंटजन ने पहले स्विट्जरलैंड में एक assisted suicide clinic जाने की योजना बनाई थी, लेकिन अब उन्होंने कहा कि वह इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि वहां यात्रा करना उनके लिए संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिन चीजों से वह बचना चाहती थीं, अब उन्हें उन्हीं परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है।
उनका मामला इस बहस को व्यक्तिगत और मानवीय आयाम देता है। समर्थकों का कहना है कि गंभीर और अंतिम अवस्था की बीमारी से जूझ रहे वयस्कों को अपने जीवन के अंतिम चरण के बारे में निर्णय लेने का विकल्प मिलना चाहिए।
विधेयक में क्या हैं सुरक्षा उपाय?
प्रस्तावित कानून में कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक यह है कि असिस्टेड डाइंग के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को दो डॉक्टरों की मंजूरी हासिल करनी होगी।
इसके अलावा, आवेदन की समीक्षा एक विशेषज्ञ पैनल द्वारा भी की जाएगी। इन प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल निर्धारित पात्रता मानदंड पूरा करने वाले लोग ही इस प्रक्रिया में आगे बढ़ सकें।
विधेयक के समर्थकों का कहना है कि इन सुरक्षा उपायों से प्रक्रिया में चिकित्सकीय और विशेषज्ञ निगरानी बनी रहेगी।
हालांकि, विरोधी पक्ष इन उपायों को पर्याप्त नहीं मानता।

विरोधियों को जबरदस्ती और दबाव की चिंता
विधेयक की सबसे बड़ी आलोचनाओं में से एक यह है कि इसमें कमजोर लोगों को दबाव या जबरदस्ती से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा नहीं है।
विरोधियों को आशंका है कि गंभीर बीमारी, उम्र, पारिवारिक परिस्थितियों या अन्य कारणों से कमजोर व्यक्ति खुद को अपने जीवन को समाप्त करने के लिए दबाव में महसूस कर सकते हैं।
कुछ आलोचकों का यह भी कहना है कि कानून बदलने के बजाय सरकार की प्राथमिकता बेहतर palliative care यानी जीवन के अंतिम चरण में मरीजों को राहत और देखभाल उपलब्ध कराने पर होनी चाहिए।
इस दृष्टिकोण के अनुसार, अंतिम अवस्था के मरीजों के दर्द और अन्य कठिनाइयों को बेहतर चिकित्सा एवं देखभाल के जरिए कम करने पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।
लेबर सांसद एश्ले डाल्टन ने जताई गंभीर आपत्ति
लेबर सांसद एश्ले डाल्टन ने भी विधेयक का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहली बार भी इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया था और उनकी चिंताएं अब भी बनी हुई हैं।
डाल्टन के अनुसार, विधेयक में गंभीर खामियां हैं और यह सुरक्षित नहीं है।
उन्होंने विशेष रूप से कमजोर लोगों पर संभावित दबाव या जबरदस्ती को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि प्रस्ताव में शामिल सुरक्षा उपाय ऐसे लोगों की पर्याप्त सुरक्षा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
उनकी आपत्ति इस बहस के उस महत्वपूर्ण हिस्से को सामने लाती है जिसमें यह सवाल उठाया जा रहा है कि किसी व्यक्ति की अपनी इच्छा और बाहरी दबाव के बीच अंतर कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।
हाउस ऑफ लॉर्ड्स की भूमिका पर भी नजर
यदि समान विधेयक हाउस ऑफ कॉमन्स से पारित होता है, तो हाउस ऑफ लॉर्ड्स उसमें संशोधन का सुझाव दे सकता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में लॉर्ड्स उसकी प्रगति को रोक नहीं सकेगा।
यही कारण है कि शुक्रवार का मतदान विधेयक के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समर्थक चाहते हैं कि इसे दोबारा लॉर्ड्स के पास भेजा जाए ताकि वहां इसकी समीक्षा पूरी हो सके।
वहीं, विरोधियों का मानना है कि कानून में बदलाव से पहले कमजोर लोगों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को और मजबूत किया जाना चाहिए।
ब्रिटेन में संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक बहस
असिस्टेड डाइंग का मुद्दा इंग्लैंड और वेल्स में लंबे समय से संवेदनशील सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय रहा है। इसके केंद्र में एक तरफ गंभीर और अंतिम अवस्था की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अपने जीवन के अंतिम चरण के बारे में निर्णय लेने का अधिकार देने की मांग है।
दूसरी तरफ यह चिंता है कि कानून में बदलाव से ऐसे लोगों पर अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है जो बीमारी, उम्र या अन्य परिस्थितियों के कारण पहले से कमजोर स्थिति में हैं।
शुक्रवार का मतदान इसी व्यापक बहस में अगला महत्वपूर्ण चरण होगा। एक ओर लॉरेन एडवर्ड्स और डेम एस्थर रैंटजन जैसे समर्थक कानून में बदलाव को मानवीय आवश्यकता बता रहे हैं, जबकि एश्ले डाल्टन समेत विरोधी सांसद मौजूदा सुरक्षा उपायों को अपर्याप्त मानते हैं।
इसलिए आगे की प्रक्रिया में न केवल विधेयक के समर्थन का स्तर महत्वपूर्ण होगा, बल्कि हाउस ऑफ लॉर्ड्स में इसकी जांच, संभावित संशोधन और कमजोर लोगों की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।











