BRICS समिट से पहले PM मोदी से मिलेंगे पुतिन और पजशकियान, रक्षा से कारोबार तक अहम मुद्दों पर चर्चा

BRICS समिट के लिए ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान और रूसी राष्ट्रपति पुतिन दिल्ली पहुंचे। PM मोदी से बैठक में Su-57, S-400, परमाणु ऊर्जा और व्यापार पर चर्चा संभव।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान BRICS समिट में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंच गए हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी दिल्ली पहुंच चुके हैं। आज PM मोदी से उनकी अहम द्विपक्षीय बैठक होगी।

नई दिल्ली: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान BRICS समिट में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। राष्ट्रपति के रूप में यह उनका पहला भारत दौरा है। अमेरिका-ईरान युद्ध की पृष्ठभूमि में उनके भारत दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पजशकियान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शुक्रवार शाम 6:15 बजे द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत में भारत और ईरान के संबंधों तथा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत पहुंचने से पहले पजशकियान ने BRICS के महत्व और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि BRICS बैंक देशों को डॉलर पर निर्भरता कम करने और अमेरिका के प्रभुत्व की कोशिशों का मुकाबला करने के लिए बनाया गया है।

पुतिन भी दिल्ली पहुंचे

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार देर रात दिल्ली पहुंचे। विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उनका काफिला होटल आईटीसी मौर्या के लिए रवाना हुआ। पुतिन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शुक्रवार दोपहर 3:30 बजे बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं की मुलाकात में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के साथ रक्षा, परमाणु ऊर्जा, कारोबार और भुगतान व्यवस्था से जुड़े मुद्दे अहम रह सकते हैं।

रूस की ओर से भारत में Su-57 फाइटर जेट के उत्पादन और उससे जुड़ी जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश पर भी बातचीत होने की संभावना है। ऐसे में रक्षा सहयोग इस बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकता है।

Su-57 डील पर हो सकती है चर्चा

पुतिन के दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत की उम्मीद है। रूस ने भारत में Su-57 फाइटर जेट के उत्पादन और आवश्यक तकनीक साझा करने की पेशकश की है। भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। इससे पहले 2016 में गोवा में आयोजित BRICS समिट के दौरान दोनों देशों के बीच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील पर सहमति बनी थी।

इस बार भी पुतिन की भारत यात्रा में रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। S-400 की बाकी खेप की आपूर्ति और उसके रखरखाव से जुड़े मुद्दे बातचीत का हिस्सा हो सकते हैं। इसके अलावा Su-30MKI लड़ाकू विमानों के अपग्रेड पर भी चर्चा हो सकती है। ‘सुपर सुखोई’ योजना के तहत इन विमानों में बेहतर रडार और नए हथियार लगाए जाने की योजना से संबंधित विषयों पर दोनों पक्ष बातचीत कर सकते हैं।

ब्रह्मोस के नए संस्करण पर भी नजर

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग में ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण है। दोनों देश इसके नए और हल्के संस्करण पर मिलकर काम करने की तैयारी में हैं। ब्रह्मोस-NG इस सहयोग का अहम हिस्सा है। यह मौजूदा ब्रह्मोस की तुलना में हल्की होगी और इसे तेजस जैसे लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकेगा। ऐसे में पुतिन और मोदी की बातचीत में रक्षा उत्पादन, तकनीक साझेदारी और दोनों देशों के संयुक्त रक्षा कार्यक्रमों से जुड़े मुद्दों को जगह मिलने की संभावना है।

परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर जोर

रक्षा क्षेत्र के अलावा परमाणु ऊर्जा भी भारत-रूस बातचीत का महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम भारत में कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र पर काम कर रही है। दोनों देशों के बीच भारत में रूसी तकनीक के जरिए नए परमाणु बिजली संयंत्र लगाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हो सकती है।

इसके अलावा भारत और रूस छोटे आकार के परमाणु रिएक्टर विकसित करने में सहयोग की संभावनाएं तलाश सकते हैं। ये रिएक्टर बड़े परमाणु बिजली संयंत्रों की तुलना में छोटे आकार के होते हैं।

रुपये-रूबल में कारोबार बढ़ाने की कोशिश

भारत और रूस के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने का मुद्दा भी बातचीत में शामिल हो सकता है। दोनों देश डॉलर की जगह रुपये और रूबल में व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इस व्यवस्था से दोनों देशों के बीच भुगतान प्रक्रिया आसान करने और डॉलर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि रूस डॉलर को हटाने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि भुगतान के आसान तरीकों के लिए तैयार है। उन्होंने बताया था कि BRICS देशों के साथ रूस का करीब 90 प्रतिशत कारोबार स्थानीय मुद्राओं में हो रहा है। भारत और रूस के पास एक-दूसरे की मुद्राओं का जमा हुआ पैसा भी है। ऐसे में दोनों पक्ष इन फंड्स के इस्तेमाल और रुपये-रूबल में भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने के तरीकों पर चर्चा कर सकते हैं।

रूस तक पहुंच आसान करने वाले कॉरिडोर पर चर्चा

भारत और रूस के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए कनेक्टिविटी भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। दोनों देश इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग को आगे बढ़ाने पर चर्चा कर सकते हैं। INSTC भारत को ईरान के रास्ते रूस से जोड़ता है। यह व्यापारिक कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण मार्ग है और भारत, ईरान तथा रूस के बीच परिवहन संबंधों को मजबूत करने में भूमिका निभा सकता है। वहीं चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग से भारत और रूस के पूर्वी हिस्से के बीच माल पहुंचाने में लगने वाला समय करीब 40 दिन से घटकर 20-22 दिन तक होने की संभावना बताई गई है।

पुतिन के साथ आया भारी सुरक्षा काफिला

पुतिन के भारत पहुंचने से पहले उनका सुरक्षा और परिवहन काफिला भी दिल्ली पहुंच गया था। गुरुवार को नोएडा के जेवर एयरपोर्ट पर रूस के तीन ट्रांसपोर्ट विमान पहुंचे। इनमें IL-76 विमान भी शामिल था। राष्ट्रपति के साथ आने वाली ऑरस सीनेट बख्तरबंद लिमोजिन भी भारत पहुंची। पुतिन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला IL-96-300PU विमान ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ के रूप में जाना जाता है और इसे चलते-फिरते राष्ट्रपति कमांड सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

दिल्ली में पुतिन की अंदरूनी सुरक्षा रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस (FSO) संभालेगी, जबकि भारतीय एजेंसियां सुरक्षा का बाहरी घेरा संभालेंगी। पुतिन के खाने की भी अलग से जांच की जाएगी और रूस अपने रसोइयों का इस्तेमाल करेगा। रूस की दूसरी IL-96 विशेष उड़ान राजनयिकों के साथ पहले ही दिल्ली पहुंच चुकी थी। रूस के डिप्टी प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव भी भारत पहुंच चुके हैं।

BRICS समिट में कई अहम नेताओं की मौजूदगी

BRICS समिट के लिए दिल्ली में दुनिया के कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी 18वें BRICS समिट में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने उनका स्वागत किया।

समिट के दौरान भारत की ओर से विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकों का सिलसिला जारी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हैदराबाद हाउस में ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। BRICS से जुड़े कार्यक्रमों में मेहमानों के लिए भारतीय भोजन को भी विशेष महत्व दिया गया है। दिल्ली के द ललित होटल में मेहमानों के लिए तैयार विशेष भारतीय मेन्यू में मिलेट्स को प्रमुखता दी गई है।

भारत के लिए अहम कूटनीतिक और रणनीतिक मंच

पजशकियान और पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब BRICS का मंच वैश्विक कूटनीति और आर्थिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण बना हुआ है। पजशकियान का राष्ट्रपति बनने के बाद पहला भारत दौरा दोनों देशों के संबंधों के लिए अहम है। वहीं पुतिन और मोदी की बैठक में रक्षा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, स्थानीय मुद्रा में भुगतान और परिवहन कॉरिडोर जैसे मुद्दे भारत-रूस संबंधों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

BRICS समिट के दौरान होने वाली इन उच्चस्तरीय बैठकों पर वैश्विक स्तर पर नजर रहेगी, क्योंकि इनमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और बदलती वैश्विक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।

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