साहिबगंज में बाढ़ का कहर, 5 साल की बच्ची डूबी; गंगा 28.70 मीटर पर, दियारा के गांवों में घुसा पानी, NDRF तैनात

साहिबगंज में गंगा का जलस्तर 28.70 मीटर पहुंच गया है। दियारा क्षेत्र के गांवों में पानी घुसा है और NDRF की 30 सदस्यीय टीम राहत-बचाव में जुटी है।
साहिबगंज में बाढ़ का कहर, 5 साल की बच्ची डूबी; गंगा 28.70 मीटर पर, दियारा के गांवों में घुसा पानी, NDRF तैनात
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झारखंड के साहिबगंज जिले में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है। गंगा का जलस्तर 28.70 मीटर तक पहुंच गया है, जो साहिबगंज में निर्धारित खतरे के निशान 27.25 मीटर से करीब 1.45 मीटर ऊपर है। पानी बढ़ने के साथ जिले के दियारा क्षेत्रों के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बड़ी संख्या में परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। इसी बीच आपके दिए विवरण के अनुसार बाढ़ के पानी में 5 साल की बच्ची के डूबने की घटना भी सामने आई है, जिससे इलाके में दहशत और चिंता का माहौल है। बच्ची की तलाश और घटना की विस्तृत आधिकारिक जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है।

साहिबगंज में बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा गंगा के जलस्तर से लगाया जा सकता है। गुरुवार शाम 6 बजे नदी का जलस्तर 28.70 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक यहां खतरे का निशान 27.25 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर ऊपर बह रही है। इससे पहले सुबह 6 बजे जलस्तर 28.67 मीटर और दोपहर 2 बजे 28.69 मीटर दर्ज किया गया था। जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है।

इससे पहले 2026 की बाढ़ के दौरान भी साहिबगंज में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ता देखा गया था। 8 सितंबर की रिपोर्ट में नदी का जलस्तर 28.47 मीटर दर्ज किया गया था और उस समय भी केंद्रीय जल आयोग ने आगे बढ़ोतरी का अनुमान जताया था। उसी रिपोर्ट में बताया गया था कि जिले में बाढ़ से 51 हजार से ज्यादा परिवार यानी करीब 2.16 लाख लोग प्रभावित हुए थे। कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में पानी पहुंच गया था।

साहिबगंज में इस समय सबसे ज्यादा परेशानी दियारा क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को हो रही है। गंगा का पानी लगातार फैलने के कारण दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। कई परिवार अपने घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की तरफ जाने को मजबूर हैं। कुछ लोग अपने घरों की छतों, ऊंचे स्थानों या सड़कों के किनारे सामान लेकर शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं। बाढ़ के बीच सबसे बड़ी चुनौती छोटे बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और पशुओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की बनी हुई है।

आपके दिए विवरण के मुताबिक इसी बाढ़ के दौरान एक 5 साल की बच्ची पानी में डूब गई। घटना ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। बाढ़ के पानी में बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है, क्योंकि कई जगह घरों, खेतों और रास्तों के बीच पानी का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। सामान्य रास्ते जलमग्न होने के बाद बच्चों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। हालांकि इस बच्ची के डूबने की घटना के स्थान, बचाव अभियान और बच्ची की स्थिति को लेकर अभी तक कोई स्वतंत्र आधिकारिक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं मिली है, इसलिए इस मामले में आगे की प्रशासनिक जानकारी का इंतजार जरूरी है।

साहिबगंज में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। जिला उपायुक्त दीपक कुमार दूबे की पहल पर NDRF की 30 सदस्यीय टीम साहिबगंज पहुंच चुकी है। टीम को बाढ़ का पानी कम होने तक जिले में कैंप करने और जरूरत पड़ने पर लोगों के बचाव में मदद करने के लिए तैनात किया गया है। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है।

NDRF की तैनाती ऐसे समय में हुई है जब जिले के कई हिस्सों में पानी लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन पहले से ही बाढ़ प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए है। इससे पहले जिले में 38 गोताखोरों और 253 प्रशिक्षित आपदा स्वयंसेवकों को भी तैयार रखा गया था। करीब 190 नावों को भी जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल के लिए तैयार रखने की जानकारी सामने आई थी। इससे पता चलता है कि प्रशासन संभावित रूप से और गंभीर स्थिति से निपटने के लिए संसाधनों को सक्रिय कर रहा है।

बाढ़ का असर केवल गांवों तक सीमित नहीं है। साहिबगंज के कई शहरी इलाकों में भी पानी पहुंच चुका है। भारतीय कॉलोनी, पाइप रोड, हबीबपुर, अलीनगर, शास्त्रीनगर और रसूलपुर दहला जैसे निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति सामने आई है। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। कुछ लोगों ने पंचायत भवनों और दूसरे सुरक्षित स्थानों में शरण ली है।

राजमहल और सदर प्रखंड के कई दियारा इलाकों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। पानी बढ़ने के कारण गांवों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है। सड़कें डूबने से आवागमन मुश्किल हो गया है। नाव ही कई स्थानों पर आने-जाने का प्रमुख साधन बन गई है। ऐसे में किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना या किसी आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाना भी कठिन हो सकता है।

बाढ़ के बीच बिजली व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन को सावधानी बरतनी पड़ रही है। जिन इलाकों में पानी ट्रांसफॉर्मर तक पहुंच गया है, वहां सुरक्षा कारणों से बिजली आपूर्ति बंद की गई है। अधिकारियों का कहना है कि पानी कम होने और स्थिति सुरक्षित होने के बाद ही बिजली बहाल की जाएगी। यह कदम करंट लगने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी माना जा रहा है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पीने के साफ पानी की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। कई जगह हैंडपंप और कुएं बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं। इससे दूषित पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क किया है। अलग-अलग स्थानों पर मेडिकल कैंप लगाने की तैयारी की गई है, जहां डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी जरूरी दवाओं के साथ मौजूद रहेंगे।

बाढ़ का असर पशुओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के सामने मवेशियों के लिए चारा जुटाने की समस्या खड़ी हो गई है। खेत और चारा वाली फसलें पानी में डूबने से पशुपालकों की मुश्किल बढ़ गई है। राहत सामग्री के साथ कई इलाकों में पशुओं के लिए चारा भी उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। राजमहल के प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक अधिकारियों ने नाव से पहुंचकर लोगों के बीच खाद्य सामग्री, चूड़ा, गुड़, मोमबत्ती, तिरपाल और चारा आदि वितरित किया है।

प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे बढ़ते पानी के बीच जोखिम लेकर नदी, नाले या तेज बहाव वाले रास्तों को पार न करें। खासकर छोटे बच्चों को पानी के आसपास अकेला नहीं छोड़ने की जरूरत है। बाढ़ के दौरान पानी की गहराई कई जगह दिखाई नहीं देती और जमीन के नीचे गड्ढे या कटाव भी हो सकता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए स्कूल बंद रखने का निर्णय भी लिया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल 12 सितंबर तक बंद रखने की जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को बाढ़ के पानी से होकर स्कूल जाने की मजबूरी से बचाना है।

साहिबगंज में गंगा के जलस्तर को लेकर रिकॉर्ड की चर्चा भी तेज है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 2025 में साहिबगंज में गंगा का अधिकतम जलस्तर 28.70 मीटर तक पहुंचा था, जबकि 2021 में यह 28.90 मीटर दर्ज किया गया था। इसलिए 28.70 मीटर का मौजूदा स्तर निश्चित रूप से गंभीर है, लेकिन इसे “चार साल का रिकॉर्ड टूटना” कहना उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर सही नहीं होगा, क्योंकि 2021 का 28.90 मीटर इससे ऊपर था।

केंद्रीय जल आयोग के वास्तविक समय के आंकड़ों में भी 10 सितंबर की शाम साहिबगंज में गंगा का जलस्तर 28.70 मीटर दर्ज किया गया था और इसे खतरे के स्तर से ऊपर बताया गया। आंकड़े उस समय नदी के स्थिर रहने की स्थिति भी दिखाते हैं।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, राहत सामग्री उपलब्ध कराना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल बचाव अभियान चलाना है। NDRF टीम की मौजूदगी से बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने की क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा नावों, गोताखोरों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को भी जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है।

साहिबगंज में बाढ़ की स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि गंगा का पानी खतरे के निशान से काफी ऊपर है और निचले इलाकों में लगातार फैल रहा है। घरों में पानी घुसने के साथ लोगों के सामने भोजन, पीने का पानी, बिजली, पशुओं के चारे और सुरक्षित आवागमन जैसी कई समस्याएं एक साथ खड़ी हो गई हैं। बच्चों की सुरक्षा सबसे संवेदनशील मुद्दा है और आपके दिए विवरण में 5 साल की बच्ची के डूबने की घटना इसी खतरे को सामने लाती है।

फिलहाल बच्ची के डूबने की घटना को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है। वहीं गंगा के 28.70 मीटर तक पहुंचने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में NDRF की तैनाती की पुष्टि ताजा रिपोर्टों और जलस्तर आंकड़ों से होती है। आने वाले समय में नदी के जलस्तर में होने वाला बदलाव साहिबगंज की बाढ़ की स्थिति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।

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