प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को भारत मंडपम में करीब 45 मिनट तक द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से स्वागत किया और बाद में एक ही कार से औद्योगिक प्रदर्शनी का दौरा किया।
नई दिल्ली; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात करीब 45 मिनट चली। बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें तमिल साहित्य की प्रसिद्ध कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवाद भेंट किया।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक ही कार से इंडस्ट्रियल एग्जिबिशन पहुंचे। दोनों नेताओं की इस अनौपचारिक शैली ने बैठक के दौरान भारत-रूस संबंधों की अहमियत को भी रेखांकित किया।
बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध सामग्री में सामने नहीं आई है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बातचीत संभावित है।
Su-57 फाइटर जेट पर हो सकती है बड़ी डील
मोदी-पुतिन बैठक से पहले सबसे ज्यादा चर्चा संभावित रक्षा समझौते को लेकर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत रूस से Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट खरीदने पर विचार कर सकता है।
रूस ने इस लड़ाकू विमान के निर्माण और इससे जुड़ी जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश की है। Su-57 को एक एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट के तौर पर पेश किया जाता है।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह के विमान की क्षमता दूसरे देश के क्षेत्र में प्रवेश कर एयरस्ट्राइक करने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, मोदी-पुतिन बैठक में Su-57 सौदे को लेकर अंतिम निर्णय या औपचारिक समझौते की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।
S-400 और BrahMos-NG भी एजेंडे में संभव
रक्षा क्षेत्र में Su-57 के अलावा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की बाकी खेप और एडवांस BrahMos-NG से जुड़े सहयोग पर भी चर्चा की संभावना जताई गई है।
भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में सहयोग रहा है और दोनों देश सैन्य उपकरणों, तकनीक और उत्पादन से जुड़े कई क्षेत्रों में साथ काम करते रहे हैं। ऐसे में मौजूदा बैठक में रक्षा सहयोग के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, उपलब्ध सामग्री में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बैठक के दौरान इन सभी मुद्दों पर वास्तव में क्या निर्णय हुआ।
2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
मोदी-पुतिन बातचीत में आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो सकता है। दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर चर्चा संभावित है।
इसके साथ ही उद्योग, रेलवे, स्टील और टनलिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी बातचीत हो सकती है। भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में अधिक अवसर उपलब्ध कराने और दोनों देशों के बीच औद्योगिक साझेदारी को विस्तार देने पर भी ध्यान रहने की संभावना है।
भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग को रक्षा संबंधों से आगे बढ़ाकर कई नए क्षेत्रों तक ले जाने की कोशिशों के संदर्भ में यह बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
परमाणु ऊर्जा और ईंधन आपूर्ति पर भी चर्चा संभव
परमाणु ऊर्जा भी संभावित बातचीत के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग बढ़ाने, ईंधन की आपूर्ति और संयंत्रों के रखरखाव से जुड़े विषयों पर चर्चा हो सकती है।
रूस के साथ परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। हालांकि, शुक्रवार की बैठक में इस क्षेत्र को लेकर किसी नए समझौते की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है।
महत्वपूर्ण खनिज और उर्वरक सहयोग
मोदी-पुतिन बातचीत का संभावित एजेंडा महत्वपूर्ण खनिजों तक भी पहुंच सकता है। दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और उनकी आपूर्ति में सहयोग बढ़ाने की संभावना जताई गई है।
इसके अलावा रूस से भारत को उर्वरक की आपूर्ति बनाए रखने और इस क्षेत्र में नए संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू करने पर भी चर्चा हो सकती है।
यह सहयोग भारत की औद्योगिक जरूरतों और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इन मुद्दों पर बैठक में हुए वास्तविक निर्णय की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध सामग्री में सामने नहीं आई है।
रूस में भारतीय कुशल कामगारों पर भी चर्चा संभव
दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही और रोजगार से जुड़े विषय भी संभावित एजेंडे में शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक रूस में भारतीय कुशल कामगारों की संख्या बढ़ाने और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को आसान बनाने पर बातचीत हो सकती है।
ऐसे सहयोग से दोनों देशों के बीच आर्थिक और मानवीय संपर्क को विस्तार देने की कोशिशों को बढ़ावा मिल सकता है।
तिरुक्कुरल की रूसी प्रति क्यों खास है?
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तिरुक्कुरल की रूसी भाषा में अनुवादित प्रति भेंट की। यह तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना है।
तिरुक्कुरल में कुल 1,330 दोहे हैं। इनमें नैतिक जीवन, शासन, अर्थव्यवस्था, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जुड़े विचार प्रस्तुत किए गए हैं। इसे तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं में शामिल किया जाता है और इसे ‘तमिल वेद’ भी कहा जाता है।
इस रचना का कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसका रूसी अनुवाद 2026 में प्रकाशित हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले अगस्त में उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान भी तिरुक्कुरल का उल्लेख कर चुके हैं। उन्होंने उस समय इसके उज्बेक भाषा में अनुवाद का सुझाव दिया था। मोदी के अनुसार, ऐसा अनुवाद उज्बेकिस्तान के लोगों को भारतीय दर्शन और विचारों को समझने में मदद कर सकता है।
BRICS शिखर सम्मेलन के बीच अहम मुलाकात
मोदी-पुतिन बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत में BRICS Summit 2026 से जुड़े कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। शुक्रवार को BRICS व्यापार मंच प्रमुख कार्यक्रम है और पुतिन इसके पूर्ण सत्र को संबोधित करने वाले हैं। इसके अलावा वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक और इनोप्रोम प्रदर्शनी में भी शामिल होने वाले हैं।
शनिवार, 12 सितंबर को BRICS नेताओं का शिखर सम्मेलन दोपहर 2:35 बजे बंद कमरे के सत्र के साथ शुरू होगा। इस सत्र में समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा होगी।
इसके बाद शाम 4:25 बजे भारत नवाचार प्रदर्शनी, 5:05 बजे नेताओं का सामूहिक फोटो सत्र और पौधरोपण तथा शाम 7:30 बजे प्रधानमंत्री मोदी की ओर से रात्रिभोज का कार्यक्रम निर्धारित है।
BRICS में मिस्र के राष्ट्रपति भी पहुंचे
BRICS Summit 2026 में हिस्सा लेने के लिए मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी भी भारत पहुंचे। एयरपोर्ट पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने उनका स्वागत किया।
रविवार, 13 सितंबर को BRICS नेताओं का पहुंचना सुबह 9:55 बजे शुरू होगा। इसके बाद सुबह 10:35 बजे आधिकारिक सामूहिक फोटो और 10:50 बजे शिखर सम्मेलन का उद्घाटन सत्र निर्धारित है।
भारत-रूस संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बैठक
मोदी और पुतिन की 45 मिनट की बैठक ऐसे समय हुई है जब दोनों देश रक्षा के साथ-साथ व्यापार, उद्योग, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक और कुशल कामगारों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
Su-57, S-400 और BrahMos-NG जैसे रक्षा सहयोग के संभावित मुद्दों के अलावा 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य और आर्थिक साझेदारी के विस्तार पर भी नजर है।
फिलहाल बैठक में हुए फैसलों की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। इसलिए संभावित रक्षा समझौतों और अन्य सहयोग के मुद्दों को फिलहाल रिपोर्टों में सामने आए संभावित एजेंडे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।









