नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन शनिवार से शुरू होगा। 10 साल बाद मोदी, पुतिन और जिनपिंग एक साथ दिखेंगे। 11 सदस्य देशों के साथ 10 पार्टनर देश शामिल होंगे। PPP आधार पर BRICS की अर्थव्यवस्था अमेरिका से करीब तीन गुना बड़ी बताई गई है।
BRICS SUMMIT 2026: नई दिल्ली में शनिवार से 18वां BRICS शिखर सम्मेलन शुरू होने जा रहा है। भारत की मेजबानी में हो रहे इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 10 साल बाद एक साथ नजर आएंगे। तीनों नेता इससे पहले 2016 में गोवा में हुए BRICS सम्मेलन में साथ शामिल हुए थे। इस बार BRICS के 11 सदस्य देशों के साथ 10 पार्टनर देशों के नेता भी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। समूह की अहमियत केवल इसके सदस्यों की संख्या से नहीं, बल्कि इसकी विशाल आबादी और आर्थिक क्षमता से भी समझी जा सकती है। 11 सदस्य देशों में दुनिया की करीब 49.5% आबादी रहती है। यानी वैश्विक आबादी के लगभग हर दो में से एक व्यक्ति BRICS देशों में रहता है।
PPP के आधार पर BRICS की अर्थव्यवस्था अमेरिका से करीब 3 गुना
BRICS की आर्थिक ताकत को खरीदने की क्षमता यानी Purchasing Power Parity (PPP) के आधार पर भी देखा जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BRICS देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था दुनिया की करीब 39% अर्थव्यवस्था के बराबर है। यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के मुकाबले करीब तीन गुना बताई जा रही है।
इसी आर्थिक और जनसांख्यिकीय ताकत के कारण BRICS को वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में तेजी से प्रभाव बढ़ाने वाले समूह के तौर पर देखा जाता है। भारत की अध्यक्षता में होने वाले सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ भुगतान व्यवस्था, व्यापार और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
10 साल बाद मोदी-पुतिन-जिनपिंग एक मंच पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक साथ मौजूदगी इस सम्मेलन की प्रमुख घटनाओं में शामिल होगी। तीनों नेता इससे पहले 2016 में गोवा में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में साथ दिखाई दिए थे।
गोवा सम्मेलन से पहले 15 अक्टूबर 2016 को मोदी, जिनपिंग और पुतिन भारतीय अंदाज के कपड़ों में भी नजर आए थे। करीब एक दशक बाद तीनों नेताओं की एक मंच पर मौजूदगी ऐसे समय हो रही है, जब BRICS का विस्तार हो चुका है और समूह का वैश्विक आर्थिक प्रभाव बढ़ा है।
7 साल बाद भारत आए जिनपिंग, गलवान के बाद पहली बैठक
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार सुबह नई दिल्ली के लिए रवाना हुए। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 18वें BRICS सम्मेलन में शामिल होने भारत आ रहे हैं। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, यह करीब 7 साल बाद जिनपिंग का भारत दौरा है। जिनपिंग की भारत यात्रा का एक अहम पहलू यह भी है कि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी यह पहली आमने-सामने की बैठक होगी।
गलवान संघर्ष के बाद करीब 4 साल तक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच तनाव बना रहा। अब दोनों देश सीमा से लेकर व्यापार तक कई मुद्दों पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। सीमा विवाद को लेकर दोनों देश एक विशेषज्ञ समूह बनाने पर सहमत हुए हैं। इसके अलावा सीमा पर 2 अतिरिक्त सैन्य संपर्क केंद्र और पूर्वी तथा मध्य सेक्टर में 2 सैन्य हॉटलाइन बनाने पर भी सहमति बनी है। इन फैसलों को अब दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिलनी है।

चीन के साथ भारत का बड़ा व्यापार घाटा
भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंध भी BRICS सम्मेलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। 2025-26 में भारत ने चीन से करीब 11.4 लाख करोड़ रुपए का सामान आयात किया। इसके चलते चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 8.6 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा। इसलिए द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों का मुद्दा मोदी-जिनपिंग बैठक में महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हो सकता है।
डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश
BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने की कोशिश भी समूह के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सदस्य देश आपसी व्यापार में अमेरिकी डॉलर के इस्तेमाल को कम करने और एक-दूसरे की राष्ट्रीय मुद्राओं में लेन-देन बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इसके साथ विभिन्न देशों की ऑनलाइन भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई साझा भुगतान सिस्टम या एकल मुद्रा नहीं है।
भारत की अध्यक्षता में होने वाले सम्मेलन में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और आसान डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर जोर दिए जाने की उम्मीद है। भारत BRICS देशों के डिजिटल भुगतान सिस्टम और डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करना चाहता है। इससे सीमा-पार भुगतान आसान हो सकता है और हर लेन-देन में डॉलर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
BRICS में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
BRICS में वर्तमान में 11 सदस्य देश हैं—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया। समूह का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
BRICS की शुरुआत एक औपचारिक संगठन के रूप में नहीं हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था। इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में पेश किया गया था।
2006 में BRIC समूह अस्तित्व में आया और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। बाद में ईरान, मिस्र और इथियोपिया समेत अन्य देशों के जुड़ने से इसका दायरा और बढ़ा। आज BRICS दुनिया के प्रमुख आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की वैश्विक GDP में हिस्सेदारी 27% से अधिक बताई गई है, जबकि यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी करीब 14% है।
पाकिस्तान और तुर्किये की सदस्यता अब तक नहीं
BRICS के विस्तार के बाद कई देशों ने समूह में शामिल होने की कोशिश की। पाकिस्तान ने 2023 में सदस्यता के लिए आधिकारिक आवेदन किया था। उसे चीन और रूस का समर्थन भी मिला, लेकिन अब तक उसे BRICS की सदस्यता नहीं मिली है।
तुर्किये ने भी समूह में शामिल होने की कोशिश की, लेकिन उसे भी सफलता नहीं मिली। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि भारत पाकिस्तान और तुर्किये को BRICS में शामिल करने के पक्ष में नहीं था। हालांकि, भारत ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान की सदस्यता रोकने की बात नहीं कही है। BRICS में नए सदस्य को शामिल करने के लिए मौजूदा सभी सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। ऐसे में किसी एक सदस्य की आपत्ति से सदस्यता प्रक्रिया रुक सकती है।
BRICS सम्मेलन पर दुनिया की नजर
नई दिल्ली में होने वाला BRICS सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब समूह का विस्तार हो चुका है और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार तथा वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को लेकर चर्चा तेज है। मोदी, पुतिन और जिनपिंग की 10 साल बाद एक साथ मौजूदगी सम्मेलन को कूटनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाती है। इसके अलावा भारत-चीन संबंध, व्यापार, सीमा प्रबंधन और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी दुनिया की नजर रहेगी।











