कुल्लू के पर्सिमोन की पहली रेल खेप लुधियाना से हावड़ा रवाना, किसानों को मिलेंगे नए बाजार

कुल्लू से 2,600 किलो पर्सिमोन की पहली रेल खेप लुधियाना से हावड़ा रवाना हुई। 98 पैकेटों में भेजे फल से किसानों को नए बड़े बाजार मिलेंगे।

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से आए 2,600 किलोग्राम पर्सिमोन की पहली रेल खेप लुधियाना से हावड़ा भेजी गई। 98 पैकेटों में फल अमृतसर-हावड़ा मेल से रवाना हुआ, जिससे किसानों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिलेगी।

लुधियाना: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में उत्पादित पर्सिमोन को पहली बार रेल के जरिए देश के बड़े बाजार तक भेजा गया है। फिरोजपुर मंडल के प्रयासों से लुधियाना रेलवे स्टेशन से 98 पैकेटों में कुल 2,600 किलोग्राम फल हावड़ा रवाना किया गया। रेलवे अब पटना और गुवाहाटी जैसे अन्य शहरों तक भी इसकी ढुलाई शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

पहली बार रेल से हावड़ा पहुंचा कुल्लू का पर्सिमोन

हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में पैदा होने वाले पर्सिमोन फल की पहली रेल खेप लुधियाना से हावड़ा भेजी गई। फिरोजपुर मंडल की बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट के प्रयासों से शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत 98 पैकेटों में 2,600 किलोग्राम पर्सिमोन को अमृतसर-हावड़ा मेल के एसएलआर डिब्बे में लादा गया।

रेलवे के इस कदम से हिमाचल के बागवानी किसानों को अपने उत्पाद को देश के दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचाने के लिए परिवहन का एक नया विकल्प मिला है।

किसानों के लिए बढ़ रही पर्सिमोन की खेती की संभावनाएं

रेलवे के अनुसार, कुल्लू समेत हिमाचल प्रदेश के ठंडे बागवानी क्षेत्रों में किसान पर्सिमोन की खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इसकी खेती में अपेक्षाकृत कम लागत, बेहतर कीमत और घरेलू बाजार में बढ़ती मांग को इसकी प्रमुख वजहों में माना जा रहा है।

बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच पर्सिमोन को सेब की तुलना में अधिक अनुकूल फल भी माना जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसकी मांग बढ़ने से किसानों को अपने उत्पाद के लिए नए बाजार मिलने की संभावना बढ़ी है।

पर्सिमोन को जापानी फल और अमरफल के नाम से भी जाना जाता है। यह कम कैलोरी वाला पौष्टिक फल है और इसमें विटामिन सी, रेशे तथा शरीर के लिए उपयोगी अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।

हावड़ा, कोलकाता और सियालदह के बाद बढ़ेगा दायरा

फिलहाल हिमाचल प्रदेश से आने वाले पर्सिमोन को रेल के जरिए हावड़ा, कोलकाता और सियालदह तक भेजा जा रहा है। रेलवे आने वाले समय में इसके परिवहन का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

योजना के तहत पटना और गुवाहाटी जैसे प्रमुख शहरों तक भी पर्सिमोन की रेल ढुलाई शुरू की जा सकती है। इससे किसानों और व्यापारियों को अपने फल को बड़े और दूर के बाजारों तक पहुंचाने का अतिरिक्त माध्यम मिलेगा।

समयबद्ध माल परिवहन से किसानों को फायदा

फिरोजपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार ने कहा कि मंडल की विश्वसनीय और समयबद्ध माल परिवहन व्यवस्था व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। रेलवे की ओर से माल यातायात बढ़ाने के साथ पर्यावरण अनुकूल परिवहन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

फल को रेल के माध्यम से भेजने से किसानों और व्यापारियों को सड़क परिवहन के अलावा एक व्यवस्थित विकल्प मिलेगा। कुल्लू से पर्सिमोन की पहली रेल खेप को हिमाचल के बागवानी उत्पादों को देश के बड़े बाजारों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Leave a comment