नोएडा और ग्रेटर नोएडा में साइबर ठगी के चार अलग-अलग मामलों में लोगों से कुल 42 लाख 80 हजार 400 रुपये की रकम ठग लिए जाने का मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। एक व्यक्ति को ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर लाखों रुपये निवेश करा लिए गए, जबकि दूसरे व्यक्ति को एनपीसीएल का बिजली बिल जमा कराने की प्रक्रिया के नाम पर झांसा दिया गया। इसके अलावा दो लोगों के बैंक खातों से उनकी जानकारी के बिना लाखों रुपये निकाले जाने की शिकायत सामने आई है। पीड़ितों की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उन बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है, जिनके माध्यम से ठगी की रकम आगे भेजी गई।
साइबर ठगी का पहला मामला नोएडा के सेक्टर-11 से सामने आया है। यहां रहने वाले श्याम नारायण राम को अज्ञात साइबर ठगों ने ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश कर कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का झांसा दिया। ठगों ने उन्हें इस तरह विश्वास में लिया कि वह उनके बताए तरीके से रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करते चले गए। उन्हें उम्मीद थी कि ट्रेडिंग में निवेश की गई रकम बढ़कर वापस मिलेगी और उन्हें अच्छा खासा मुनाफा होगा। लेकिन जब रकम वापस नहीं मिली और ठगों से संपर्क करना मुश्किल हो गया तो उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला।
इस मामले में श्याम नारायण राम से कुल 20 लाख 60 हजार 400 रुपये की ठगी की गई। पीड़ित ने रकम गंवाने के बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी शिकायत 20 नवंबर 2025 को दर्ज हुई थी। अब साइबर क्राइम थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पीड़ित से किन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई और बाद में उस पैसे को किन-किन खातों में भेजा गया।
ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर लोगों को कम समय में असाधारण मुनाफा मिलने का लालच देते हैं। शुरुआत में पीड़ित को छोटी रकम निवेश करने के लिए कहा जा सकता है और स्क्रीन पर मुनाफा दिखाकर उसका भरोसा बढ़ाया जाता है। इसके बाद बड़ी रकम निवेश करने के लिए दबाव बनाया जाता है। नोएडा के इस मामले में भी पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि ठगों ने पीड़ित से संपर्क किस माध्यम से किया और उसे रकम ट्रांसफर करने के लिए किस तरह तैयार किया गया।
दूसरा मामला ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव का है। यहां 39 वर्षीय जगत सिंह को एनपीसीएल का बिजली बिल जमा कराने के नाम पर साइबर ठगी का शिकार बनाया गया। पीड़ित के अनुसार एक अज्ञात व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और बिजली बिल जमा कराने की प्रक्रिया से जुड़ी मदद के नाम पर उन्हें अपने विश्वास में लिया। इसके बाद उनके बैंक खातों से कुल 7 लाख 82 हजार रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर कर लिए गए।
बिजली बिल से जुड़ी साइबर ठगी के मामले में अपराधी अक्सर खुद को बिजली विभाग या बिजली कंपनी का कर्मचारी बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। कई बार बिल बकाया होने, कनेक्शन काटे जाने या तत्काल भुगतान करने जैसी बात कहकर लोगों में घबराहट पैदा की जाती है। इसके बाद उन्हें किसी लिंक पर क्लिक करने, कोई एप डाउनलोड करने या बैंक संबंधी जानकारी साझा करने के लिए कहा जा सकता है। ग्रेटर नोएडा के इस मामले में पुलिस यह जांच कर रही है कि पीड़ित के बैंक खाते से रकम किस माध्यम से निकली और ठगी में कौन-कौन से बैंक खाते इस्तेमाल किए गए।
तीसरा मामला ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 क्षेत्र से सामने आया है। यहां रहने वाले अभय कुमार गुप्ता के बैंक खाते से अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से कुल 6 लाख 38 हजार रुपये निकाले गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह रकम 1 जुलाई से 1 अगस्त 2025 के बीच कई ट्रांजेक्शन के जरिए खाते से बाहर गई। पीड़ित के मुताबिक जब खाते से रकम निकलने की जानकारी हुई तो उन्होंने साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत 6 अगस्त 2026 को दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
चौथा मामला नोएडा के सेक्टर-63 स्थित छिजारसी गांव से जुड़ा है। यहां कुलभूषण शर्मा के बैंक खाते से करीब 8 लाख रुपये निकाले जाने की शिकायत है। शिकायत के मुताबिक 7 अगस्त 2026 को करीब 11 बजे उनके खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए गए। इनमें 4 लाख रुपये, 3.50 लाख रुपये और 50 हजार रुपये की रकम शामिल बताई गई है। खाते से रकम निकलने के बाद पीड़ित को ठगी का पता चला और उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
इन चारों मामलों को मिलाकर साइबर अपराधियों ने कुल 42 लाख 80 हजार 400 रुपये की रकम पर हाथ साफ किया है। पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती ठगी की रकम के अंतिम लाभार्थियों और पूरे नेटवर्क का पता लगाने की है। साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जांच के साथ-साथ पुलिस लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड खंगाल रही है। रकम एक खाते से दूसरे खाते में और फिर कई अन्य खातों में भेजी गई है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चारों मामलों के पीछे अलग-अलग साइबर गिरोह हैं या किसी मामले में एक ही नेटवर्क की भूमिका हो सकती है। इसके लिए बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, डिजिटल संपर्क और अन्य उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। ठगी में इस्तेमाल खातों की जानकारी मिलने के बाद पुलिस संबंधित लोगों से पूछताछ कर सकती है और रकम की आगे की आवाजाही का पता लगाया जा सकता है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ऑनलाइन निवेश के नाम पर साइबर ठगी के मामले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। साइबर अपराधी लोगों की बदलती डिजिटल आदतों का फायदा उठा रहे हैं। ऑनलाइन ट्रेडिंग और शेयर बाजार में बढ़ती रुचि को देखते हुए ठग अब निवेश के नाम पर आकर्षक मुनाफे का लालच देकर लोगों से बड़ी रकम ट्रांसफर करा रहे हैं। शुरुआत में बातचीत सामान्य निवेश सलाह के रूप में शुरू होती है, लेकिन बाद में पीड़ित को बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
बिजली बिल के नाम पर होने वाली ठगी में भी लोगों की रोजमर्रा की जरूरत को हथियार बनाया जाता है। बिजली कनेक्शन कटने का डर दिखाकर लोगों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए मजबूर किया जा सकता है। साइबर विशेषज्ञ लगातार सलाह देते हैं कि बिजली बिल या बैंकिंग से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए अनजान व्यक्ति के बताए लिंक, मोबाइल एप या नंबर पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
नोएडा में सामने आए मामलों से यह भी स्पष्ट होता है कि साइबर ठगी केवल किसी एक आयु या वर्ग तक सीमित नहीं है। अलग-अलग इलाकों में रहने वाले लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाया गया। किसी से निवेश के नाम पर लाखों रुपये लिए गए तो किसी के बैंक खाते से बिना जानकारी के रकम निकल गई। इससे यह जरूरी हो जाता है कि बैंक खाते और डिजिटल लेनदेन पर नियमित नजर रखी जाए।
अगर किसी व्यक्ति के खाते से बिना अनुमति के रकम निकल जाती है तो उसे तुरंत बैंक को सूचित करना चाहिए और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करनी चाहिए। रकम जितनी जल्दी रिपोर्ट की जाएगी, उतनी जल्दी संबंधित लेनदेन को ट्रैक करने और संभावित रूप से धनराशि को रोकने की कोशिश की जा सकती है। किसी भी तरह की साइबर धोखाधड़ी होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और संबंधित हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज करना महत्वपूर्ण है।
पुलिस की जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि 42.80 लाख रुपये की ठगी के पीछे कौन लोग हैं। पुलिस उन खातों की जानकारी जुटा रही है जिनमें रकम पहुंची। इसके साथ ही बैंकिंग लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई। यदि जांच में संगठित साइबर गिरोह का पता चलता है तो पुलिस उसके अन्य सदस्यों तक पहुंचने का भी प्रयास कर सकती है।
इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि डिजिटल लेनदेन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा को लेकर लोगों की जागरूकता कितनी जरूरी है। ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश करने से पहले प्लेटफॉर्म और व्यक्ति की विश्वसनीयता जांचना, किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर न करना और बिजली बिल या बैंकिंग सेवा के नाम पर आए संदिग्ध संदेशों से सावधान रहना बेहद जरूरी है।
फिलहाल चारों मामलों में पुलिस की जांच जारी है। ठगी की रकम किन खातों में पहुंची, उन खातों का संचालन कौन कर रहा था और अपराधियों ने पीड़ितों तक पहुंचने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया, इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आएंगे। पुलिस के मुताबिक बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।










