BRICS Foreign Ministers Meeting 2026 की शुरुआत गुरुवार से नई दिल्ली में होने जा रही है। भारत की मेजबानी में आयोजित यह अहम बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
नई दिल्ली: भारत की राजधानी नई दिल्ली में आज से BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो रही है। दो दिवसीय इस उच्चस्तरीय सम्मेलन की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे। यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है, जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक संकटों का सामना कर रही है।
बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के विदेश मंत्री, वरिष्ठ राजनयिक और प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे। माना जा रहा है कि इस सम्मेलन में वैश्विक तनाव, क्षेत्रीय सुरक्षा, बहुपक्षीय सहयोग, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के एजेंडे जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी।
क्या है BRICS समूह?
BRICS दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। हाल के वर्षों में इस संगठन का प्रभाव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में तेजी से बढ़ा है। BRICS देशों का उद्देश्य वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करना और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में नई दिल्ली में यह अहम बैठक आयोजित की जा रही है।
वैश्विक तनाव के बीच हो रही है बैठक
यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया सहित कई क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं। यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व की स्थिति, वैश्विक व्यापार चुनौतियां और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक के दौरान सदस्य देश वर्तमान वैश्विक हालात पर अपने विचार साझा करेंगे और सामूहिक सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय शासन संरचनाओं में सुधार पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
एजेंडे में क्या-क्या शामिल?

विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि 14 और 15 मई को आयोजित इस बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इनमें शामिल हैं:
- वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां
- आर्थिक और व्यापारिक सहयोग
- बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार
- विकासशील देशों के हितों की रक्षा
- वैश्विक दक्षिण की भूमिका को मजबूत करना
- आगामी BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियां
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में सदस्य देश वैश्विक आर्थिक संतुलन और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को लेकर साझा रणनीति पर भी विचार कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात
सम्मेलन में शामिल होने वाले कई विदेशी प्रतिनिधिमंडल नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। यह बैठक भारत के लिए कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि BRICS के मंच के जरिए भारत वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को और मजबूत करना चाहता है। हाल ही में भारत ने BRICS 2026 अध्यक्षता के लिए आधिकारिक लोगो और वेबसाइट भी लॉन्च की थी। अधिकारियों के अनुसार, इस बार सम्मेलन की थीम “मानवता सबसे पहले” और जन-केंद्रित विकास के विचार पर आधारित है।
यह चौथा अवसर होगा जब भारत BRICS से जुड़े किसी बड़े शिखर आयोजन की मेजबानी कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी सक्रिय भूमिका के जरिए विकासशील देशों की आवाज को प्रमुखता से उठाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, BRICS समूह में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। डिजिटल विकास, हरित ऊर्जा, आर्थिक सुधार और वैश्विक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। BRICS देशों का उद्देश्य पश्चिमी संस्थाओं पर निर्भरता कम करते हुए वैकल्पिक वैश्विक आर्थिक ढांचे को मजबूत करना है।








