बुलेट ट्रेन का महाप्लान! रेल मंत्री ने बताया रोडमैप, हाई-स्पीड कॉरिडोर परियोजना में लगेगा ₹16 लाख करोड़

रेल मंत्री ने 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाने की घोषणा की। स्वदेशी तकनीक, तेज निर्माण और दक्षिण भारत नेटवर्क से देश में बुलेट ट्रेन क्रांति संभव होगी।

वित्त मंत्री के बजट भाषण के बाद रेल मंत्री ने 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की। ₹16 लाख करोड़ के निवेश से स्वदेशी तकनीक और तेज निर्माण के साथ पूरे देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क का विस्तार होगा।

Railway Budget 2026: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है, जिनमें लगभग 16 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा। उन्होंने कहा कि मंत्रालय अगले कुछ महीनों में इन कॉरिडोर के निर्माण के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार करेगा।

स्वदेशीकरण और तेजी से निर्माण

मंत्री ने बताया कि इन 7 कॉरिडोर के निर्माण में स्वदेशीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजनाएं पहले कॉरिडोर की तुलना में काफी तेजी से पूरी होंगी। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर के अनुभव से इंजीनियरों ने सिविल, ओवरहेड उपकरण, सिग्नलिंग सिस्टम, रोलिंग स्टॉक और स्टेशन निर्माण में ज्ञान अर्जित किया है, जिसे नए कॉरिडोर में लागू किया जाएगा।

अनुभव का लाभ

वैष्णव ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के निर्माण से देश ने बहुत कुछ सीखा। इंजीनियरों को तकनीकी समझ में सुधार हुआ है, जिससे नए कॉरिडोर के निर्माण में समय और लागत दोनों पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। सरकार ने हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए आवश्यकताओं को मानकीकृत करने का काम भी किया है। विस्तृत योजना तैयार होने के बाद यह तय किया जाएगा कि ये कॉरिडोर पूरी तरह स्वदेशी वित्त पोषण और विनिर्माण के साथ बने।

पहला कॉरिडोर 

पहला हाई-स्पीड कॉरिडोर जापान इंटरनैशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के सहयोग से बनाया जा रहा है। JICA परियोजना लागत का 80 प्रतिशत से अधिक वित्तपोषण कर रही है। प्रारंभिक देरी के कारण इसकी लागत लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गई है। नए कॉरिडोर पूरी तरह एलिवेटेड होंगे, जिससे निर्बाध आवागमन सुनिश्चित होगा।

दक्षिण भारत का हाई-स्पीड नेटवर्क

वैष्णव ने बताया कि दक्षिण भारत में चेन्नई-बेंगलूरु-हैदराबाद हाई-स्पीड नेटवर्क एक साउथ हाई-स्पीड ट्रायंगल बनाएगा। यह प्रमुख आर्थिक और आईटी केंद्रों को जोड़ने में मदद करेगा। सभी 7 कॉरिडोर पर एक साथ काम होगा, जिससे पूरे देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का विस्तार तेजी से संभव होगा।

स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम का विकास

मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन का सबसे जटिल हिस्सा प्रोपल्शन सिस्टम है। भारत ने इसे स्वदेशी बनाने में काफी काम किया है। अब भारतीय डिजाइन और निर्मित प्रोपल्शन सिस्टम अमेरिका, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, फ्रांस और स्पेन सहित कई देशों में निर्यात किया जा रहा है। यह देश के तकनीकी विकास का बड़ा संकेत है।

बुनियादी ढांचा निवेश

ईवाई इंडिया के पार्टनर और इन्फ्रास्ट्रक्चर लीडर कुलजीत सिंह ने कहा कि 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर पर निवेश, वित्त वर्ष 2027 में रेलवे के पूरे बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए प्रस्तावित 12.2 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक पूंजीगत व्यय से अधिक है। यह निर्माण और अन्य रेलवे बुनियादी ढांचा सेवा कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत है।

नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर

वैष्णव ने बताया कि पश्चिम बंगाल के दानकुनी से गुजरात के सूरत तक नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा। मार्ग के आसपास आर्थिक उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगा। 2,052 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के साथ एकीकृत होगा और पश्चिमी तट के बंदरगाहों तक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा।

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