अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह ने कभी IAS अधिकारी बनने का सपना देखा था, लेकिन उनका करियर फिल्मो की ओर मुड़ गया। साल 1996 में ‘माचिस’ से उन्हें पहचान मिली और फिल्मफेयर बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड भी हासिल हुआ।
बॉलीवुड: भारतीय सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हुए हैं, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक सपने के साथ की, लेकिन जिंदगी उन्हें किसी दूसरी दिशा में ले गई। अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह भी ऐसे ही सितारों में शामिल हैं। कभी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अधिकारी बनने की इच्छा रखने वाले चंद्रचूड़ ने आखिरकार अभिनय की दुनिया को अपना करियर बनाया। साल 1996 में आई फिल्म ‘माचिस’ ने उन्हें ऐसी पहचान दिलाई कि वह हिंदी सिनेमा के चर्चित अभिनेताओं में गिने जाने लगे।
अपनी सहज अदाकारी, सादगी और गंभीर किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले चंद्रचूड़ सिंह ने 1990 के दशक में कई फिल्मों में काम किया। फिल्म ‘जोश’ में वह ऐश्वर्या राय के साथ नजर आए, जबकि ‘माचिस’ में उनके अभिनय को खास सराहना मिली। 11 अक्टूबर को जन्मदिन मनाने वाले अभिनेता का सफर इस बात की मिसाल है कि करियर की राह हमेशा पहले से तय नहीं होती। कई बार परिस्थितियां और रुचियां इंसान को एक बिल्कुल नई मंजिल तक पहुंचा देती हैं।
दिल्ली में हुआ जन्म, राजनीति और शाही परिवार से रहा संबंध
चंद्रचूड़ सिंह का जन्म 11 अक्टूबर 1968 को दिल्ली में हुआ था। उनका पारिवारिक संबंध राजनीति और शाही पृष्ठभूमि से रहा है। उनके पिता कैप्टन बलदेव सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के खैर क्षेत्र से ताल्लुक रखते थे और राजनीति में सक्रिय रहे। उनकी मां कृष्णा कुमारी देवी ओडिशा के बोलांगीर के शाही परिवार से थीं।
चंद्रचूड़ के परिवार में कला और मनोरंजन से जुड़े लोग भी हैं। उनके भाई अभिमन्यु सिंह अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में काम कर चुके हैं, जबकि उनके दूसरे भाई आदित्य सिंह फिल्म निर्माण से जुड़े हैं। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद चंद्रचूड़ का शुरुआती लक्ष्य फिल्मों में करियर बनाना नहीं था। उनकी दिलचस्पी पढ़ाई, संगीत और प्रशासनिक सेवा जैसे क्षेत्रों में भी थी।
दून स्कूल से सेंट स्टीफंस कॉलेज तक की पढ़ाई
चंद्रचूड़ सिंह की शिक्षा देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में हुई। उन्होंने देहरादून के दून स्कूल और वेल्हम बॉयज स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली पहुंचे और सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
पढ़ाई के दौरान उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखा। इसके लिए उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी भी शुरू की। IAS अधिकारी बनने की इच्छा उनके जीवन की एक अहम दिशा थी, लेकिन समय के साथ उनका रुझान कला और अभिनय की ओर बढ़ने लगा।
चंद्रचूड़ की दिलचस्पी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं थी। वह शास्त्रीय संगीत के प्रशिक्षित गायक भी हैं। संगीत के प्रति उनके लगाव ने उन्हें अभिनय की दुनिया में आने से पहले ही कला से जोड़ दिया था। उन्होंने दिल्ली के वसंत वैली स्कूल में बच्चों को संगीत सिखाने का काम भी किया। इसके अलावा, वह अपने पुराने स्कूल दून स्कूल में इतिहास के शिक्षक के रूप में भी काम कर चुके हैं।
इस तरह फिल्मों में आने से पहले चंद्रचूड़ का जीवन पढ़ाई, शिक्षण और संगीत के बीच आगे बढ़ रहा था। हालांकि, आगे चलकर अभिनय उनके करियर का प्रमुख हिस्सा बन गया।
‘तेरे मेरे सपने’ से शुरू हुआ फिल्मी सफर
चंद्रचूड़ सिंह ने साल 1996 में फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। यह फिल्म अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ABCL) के बैनर तले बनी थी। फिल्म के जरिए उन्हें बड़े पर्दे पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।
हालांकि, उनके करियर को असली पहचान इसी साल रिलीज हुई फिल्म ‘माचिस’ से मिली। निर्देशक गुलजार की इस फिल्म में चंद्रचूड़ ने ऐसा अभिनय किया, जिसने दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का ध्यान खींचा। फिल्म की कहानी और उसके गंभीर विषय ने भी इसे खास बनाया।
‘माचिस’ में चंद्रचूड़ सिंह के अभिनय को सराहना मिली और उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड भी हासिल हुआ। यह सम्मान उनके शुरुआती करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। फिल्म ने उन्हें एक ऐसे अभिनेता के रूप में स्थापित करने में मदद की, जो गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदारों को पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से पेश कर सकता है।
‘माचिस’ की सफलता के बाद चंद्रचूड़ को हिंदी फिल्म उद्योग में पहचान मिलने लगी। हालांकि, किसी कलाकार के करियर को केवल एक फिल्म से परिभाषित नहीं किया जा सकता, लेकिन इस फिल्म ने निश्चित रूप से उनके लिए नए अवसरों के दरवाजे खोले।

‘जोश’ में ऐश्वर्या राय के साथ आई नजर
‘माचिस’ के बाद चंद्रचूड़ सिंह ने अलग-अलग तरह की फिल्मों में काम किया। उनकी चर्चित फिल्मों में ‘दाग: द फायर’, ‘क्या कहना’, ‘दिल क्या करे’ और ‘आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया’ जैसी फिल्में शामिल हैं।
साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म ‘जोश’ में वह ऐश्वर्या राय के साथ नजर आए। फिल्म में शाहरुख खान भी प्रमुख भूमिका में थे। ‘जोश’ में चंद्रचूड़ की मौजूदगी ने उन्हें उन दर्शकों के बीच भी पहचान दिलाई, जो उन्हें ‘माचिस’ के गंभीर किरदार से अलग अंदाज में देखना चाहते थे।
चंद्रचूड़ सिंह की खासियत यह रही कि उन्होंने अपने करियर में केवल एक ही तरह की भूमिका तक खुद को सीमित नहीं रखा। रोमांटिक कहानियों से लेकर गंभीर विषयों पर बनी फिल्मों तक, उन्होंने अलग-अलग किरदार निभाने की कोशिश की। पर्दे पर उनका शांत और सहज अंदाज उनकी अभिनय शैली का अहम हिस्सा रहा।
सफलता के बाद भी करियर में आए उतार-चढ़ाव
फिल्मी दुनिया में शुरुआती सफलता मिलने के बाद भी किसी अभिनेता का करियर हमेशा एक जैसी गति से आगे नहीं बढ़ता। चंद्रचूड़ सिंह के करियर में भी उतार-चढ़ाव आए। उनकी कुछ फिल्मों को पहचान मिली, जबकि कुछ परियोजनाएं दर्शकों के बीच उतनी चर्चा नहीं बटोर सकीं।
इसके बावजूद 1990 के दशक में उनके काम को याद किया जाता है। खासकर ‘माचिस’ में निभाया गया उनका किरदार उनके करियर की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल है। ‘जोश’ जैसी फिल्म में काम करने से उन्हें एक अलग तरह के दर्शक वर्ग तक पहुंचने का अवसर भी मिला।
चंद्रचूड़ का सफर यह भी दिखाता है कि मनोरंजन जगत में सफलता केवल लोकप्रियता से नहीं मापी जाती। किसी कलाकार के काम, उसके चुने हुए किरदारों और दर्शकों पर छोड़े गए प्रभाव का भी महत्व होता है।
निजी जिंदगी भी रही चर्चा में
चंद्रचूड़ सिंह की निजी जिंदगी की बात करें तो उन्होंने साल 1999 में अवंतिका कुमारी से शादी की थी। इस शादी से उनका एक बेटा है। समय के साथ दोनों के रिश्ते में बदलाव आए और बाद में वे अलग हो गए।
अभिनेता आम तौर पर अपनी निजी जिंदगी की तुलना में अपने काम को लेकर अधिक चर्चा में रहे हैं। उनके जीवन की कहानी में पढ़ाई, संगीत, शिक्षण और अभिनय जैसे अलग-अलग पड़ाव शामिल हैं।
IAS की तैयारी से बॉलीवुड तक का अनोखा सफर
चंद्रचूड़ सिंह की कहानी किसी ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिसने जीवन में एक लक्ष्य तय किया, लेकिन आगे चलकर अपनी रुचि और परिस्थितियों के अनुसार दूसरी राह चुनी। IAS अधिकारी बनने का सपना देखने वाले चंद्रचूड़ ने पहले शिक्षा और संगीत के क्षेत्र में अनुभव हासिल किया, फिर अभिनय को अपना पेशा बनाया।
‘तेरे मेरे सपने’ से फिल्मी सफर शुरू करने के बाद ‘माचिस’ ने उन्हें खास पहचान दिलाई। इसके बाद ‘जोश’ समेत कई फिल्मों में काम करके उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग जगह बनाई।
आज भी चंद्रचूड़ सिंह का नाम उन अभिनेताओं में लिया जाता है, जिन्होंने अपनी सहज अदाकारी से दर्शकों पर प्रभाव छोड़ा। उनका सफर बताता है कि किसी व्यक्ति की मंजिल हमेशा उसके शुरुआती सपने से तय नहीं होती। कभी-कभी जीवन में आने वाला एक नया अवसर पूरी दिशा बदल देता है—और चंद्रचूड़ सिंह के लिए अभिनय की दुनिया ऐसा ही अवसर साबित हुई।











