उत्तर प्रदेश के नोएडा में साइबर अपराधियों ने ठगी के अलग-अलग तरीके अपनाकर पांच लोगों को अपना शिकार बनाया और उनसे कुल 39 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। किसी को शेयर बाजार में निवेश करके कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया गया, तो किसी को मोबाइल पर एपीके (APK) फाइल भेजकर अपने जाल में फंसाया गया। डिजिटल माध्यमों से की गई इन धोखाधड़ी की घटनाओं में पीड़ितों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इन घटनाओं ने एक बार फिर ऑनलाइन निवेश, अनजान मोबाइल एप और संदिग्ध लिंक के जरिए होने वाली साइबर ठगी के खतरे को सामने ला दिया है।
साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए केवल फोन कॉल या फर्जी संदेशों का सहारा नहीं लेते, बल्कि वे निवेश की जानकारी, आकर्षक रिटर्न, नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप के जरिए लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में शुरुआत में पीड़ितों को ऐसा महसूस कराया जाता है कि उन्हें सही निवेश सलाह मिल रही है या उनके लिए कोई उपयोगी सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ाकर उन्हें पैसे ट्रांसफर करने या मोबाइल में कोई फाइल डाउनलोड करने के लिए तैयार किया जाता है। जब तक पीड़ित को धोखाधड़ी का एहसास होता है, तब तक उसके खाते से बड़ी रकम निकल चुकी होती है।
शेयर ट्रेडिंग के नाम पर होने वाली ठगी में अपराधी अक्सर खुद को शेयर बाजार का विशेषज्ञ, निवेश सलाहकार या किसी वित्तीय कंपनी से जुड़ा व्यक्ति बताते हैं। वे दावा करते हैं कि उनके पास ऐसे निवेश विकल्प हैं, जिनसे कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। कुछ मामलों में लोगों को सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप या टेलीग्राम समूहों के जरिए जोड़ा जाता है। वहां निवेश से जुड़े संदेश, कथित बाजार विश्लेषण और मुनाफे के आकर्षक उदाहरण साझा किए जाते हैं। इस तरह लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की जाती है कि संबंधित समूह या प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाना लाभदायक होगा।
ठगों का उद्देश्य पीड़ित को जल्द से जल्द निवेश के लिए राजी करना होता है। वे कभी सीमित समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की बात कहते हैं, तो कभी किसी विशेष निवेश अवसर को हाथ से निकल जाने का डर दिखाते हैं। ऐसे संदेशों में अक्सर कम जोखिम के साथ ज्यादा कमाई का दावा किया जाता है, जबकि वास्तविक शेयर बाजार में किसी भी निवेश पर मुनाफे की गारंटी नहीं होती। जब कोई व्यक्ति इन दावों पर भरोसा करके पैसे जमा करना शुरू करता है, तो अपराधी उससे अलग-अलग चरणों में और रकम मंगवा सकते हैं। इस तरह छोटी रकम से शुरू हुआ लेनदेन धीरे-धीरे बड़ी आर्थिक क्षति में बदल सकता है।
कई ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी में पीड़ितों को एक ऐसे एप या वेबसाइट पर निवेश का विवरण दिखाया जाता है, जो देखने में वास्तविक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसा लगता है। वहां जमा की गई रकम और कथित मुनाफे का आंकड़ा प्रदर्शित किया जा सकता है। इससे व्यक्ति को लगता है कि उसका निवेश बढ़ रहा है और वह सही जगह पैसे लगा रहा है। लेकिन स्क्रीन पर दिखाई देने वाला मुनाफा अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं होता कि वास्तव में शेयर बाजार में निवेश किया गया है। जब पीड़ित अपनी रकम निकालने की कोशिश करता है, तो उससे टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, सुरक्षा राशि या अन्य किसी शुल्क के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे जा सकते हैं। रकम देने से इनकार करने पर खाते को बंद करने या फ्रीज करने की धमकी दी जा सकती है। कई मामलों में इसके बाद आरोपी संपर्क करना बंद कर देते हैं।
नोएडा में सामने आए मामलों में मोबाइल पर एपीके फाइल भेजकर ठगी करने का तरीका भी शामिल है। एपीके एंड्रॉयड मोबाइल फोन पर एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होने वाला फाइल फॉर्मेट है। सामान्य परिस्थितियों में एप किसी विश्वसनीय स्रोत से इंस्टॉल किया जाता है, लेकिन साइबर अपराधी इसी तकनीकी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। वे बैंक कर्मचारी, क्रेडिट कार्ड सेवा प्रदाता या किसी अन्य संस्था का प्रतिनिधि बनकर फोन कर सकते हैं और किसी सुविधा, दस्तावेज, भुगतान या खाते से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर फाइल डाउनलोड करने को कह सकते हैं। फाइल के जरिए मोबाइल पर हानिकारक गतिविधियां कराई जा सकती हैं या उपयोगकर्ता को ऐसी अनुमतियां देने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, जिनका फायदा उठाकर संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाई जा सके।
ऐसी फाइलों के जरिए होने वाली ठगी में सबसे बड़ी समस्या यह है कि पीड़ित को शुरुआत में खतरे का अंदाजा नहीं होता। फोन पर आया संदेश किसी आधिकारिक सूचना जैसा दिखाई दे सकता है। उसमें किसी सेवा का नाम, लोगो या जरूरी कार्रवाई का उल्लेख हो सकता है। व्यक्ति यह समझकर फाइल डाउनलोड कर लेता है कि वह अपने खाते, कार्ड या किसी सुविधा से जुड़ा काम कर रहा है। लेकिन अनजान स्रोत से एप इंस्टॉल करना और उसे जरूरत से ज्यादा अनुमतियां देना बैंकिंग जानकारी तथा निजी डेटा की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति के भेजे गए लिंक या फाइल को खोलने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
साइबर ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ितों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ कई तरह की व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बैंक खाते से रकम निकल जाने पर परिवार के जरूरी खर्च, बचत और भविष्य की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। जिन लोगों ने निवेश के लिए अपनी जमा पूंजी या उधार ली गई रकम का इस्तेमाल किया होता है, उनके लिए नुकसान और भी गंभीर हो सकता है। कई पीड़ित शुरुआत में शर्मिंदगी या चिंता के कारण शिकायत करने में देर कर देते हैं, जबकि ऐसी घटनाओं में समय पर सूचना देना महत्वपूर्ण होता है। बैंक और संबंधित साइबर अपराध एजेंसियों को जल्द जानकारी मिलने पर संदिग्ध लेनदेन की जांच और उपलब्ध कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए रकम रोकने की संभावना पर काम किया जा सकता है। हालांकि, पैसे की वापसी की गारंटी नहीं होती और हर मामले का परिणाम जांच तथा लेनदेन की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
पुलिस के लिए इन मामलों की जांच में केवल पीड़ितों के बयान ही नहीं, बल्कि डिजिटल साक्ष्य भी महत्वपूर्ण होंगे। किस मोबाइल नंबर या सोशल मीडिया अकाउंट से संपर्क किया गया, पैसे किन बैंक खातों में भेजे गए, लेनदेन किस समय हुआ और किसी संदिग्ध एप या लिंक का इस्तेमाल किया गया या नहीं—इन सभी पहलुओं की जांच की जा सकती है। ऑनलाइन ठगी में इस्तेमाल होने वाले बैंक खाते, मोबाइल नंबर और डिजिटल पहचान कई बार अलग-अलग व्यक्तियों या स्थानों से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे मामलों में लेनदेन की कड़ियों को जोड़ना और आरोपियों की पहचान करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। फिलहाल इन घटनाओं में पुलिस की कार्रवाई और आगे सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
ऑनलाइन निवेश करने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी व्यक्ति के कहने पर जल्दबाजी में पैसा ट्रांसफर न करें। निवेश से पहले संबंधित वित्तीय संस्था और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए। केवल व्हाट्सऐप समूह में साझा किए गए मुनाफे के स्क्रीनशॉट, अनजान व्यक्ति की सलाह या तेजी से पैसा दोगुना करने के दावे पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। शेयर बाजार में निवेश करने के लिए अधिकृत ब्रोकर और आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बिना जोखिम के असाधारण मुनाफे की गारंटी देता है, तो उसके दावे को संदेह की नजर से देखना चाहिए।
मोबाइल सुरक्षा के मामले में भी सावधानी जरूरी है। किसी अनजान नंबर से भेजी गई एपीके फाइल डाउनलोड नहीं करनी चाहिए। बैंक, कार्ड या सरकारी सेवा के नाम पर फाइल भेजे जाने पर संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ग्राहक सेवा माध्यम से पुष्टि करनी चाहिए। मोबाइल पर किसी एप को इंस्टॉल करने के बाद वह कौन-कौन सी अनुमतियां मांग रहा है, इस पर भी ध्यान देना चाहिए। अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन साझा करने, रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल करने या ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन और बैंकिंग विवरण साझा करने से बचना चाहिए। बैंक या वित्तीय संस्थान के नाम पर संपर्क करने वाला व्यक्ति भी यदि गोपनीय जानकारी मांगता है, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना आवश्यक है।
अगर किसी व्यक्ति के खाते से अनधिकृत रकम निकल जाती है या उसे साइबर ठगी का संदेह होता है, तो उसे तुरंत अपने बैंक को सूचित करना चाहिए और भारत के साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश करनी चाहिए। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है। लेनदेन के संदेश, बैंक स्टेटमेंट, संदिग्ध फोन नंबर, चैट, लिंक और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना चाहिए। इन जानकारियों से शिकायत की जांच में मदद मिल सकती है। किसी भी परिस्थिति में ठगी की रकम वापस दिलाने का दावा करने वाले अनजान व्यक्ति को अग्रिम शुल्क या अतिरिक्त बैंकिंग जानकारी नहीं देनी चाहिए, क्योंकि ऐसे दावे के नाम पर दोबारा ठगी होने का खतरा भी रहता है।
नोएडा में पांच लोगों से 39 लाख रुपये की कथित साइबर ठगी का मामला बताता है कि ऑनलाइन अपराधी लोगों की निवेश संबंधी उम्मीदों और डिजिटल सेवाओं पर भरोसे का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। शेयर ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच हो या एपीके फाइल डाउनलोड कराने का बहाना, दोनों ही स्थितियों में सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण बचाव है। पुलिस ने शिकायतों के आधार पर मामले दर्ज किए हैं और जांच के बाद ही ठगी में शामिल लोगों, इस्तेमाल किए गए खातों और डिजिटल माध्यमों के बारे में पूरी जानकारी सामने आ सकेगी। तब तक लोगों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी आकर्षक निवेश प्रस्ताव या अनजान फाइल पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जांचें और संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचना दें।













