उज्जैन के प्रसिद्ध हरसिद्धि मंदिर में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता सती की कोहनी गिरी थी। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा, भव्य आरती और दीपस्तंभों पर दीप प्रज्वलित किए जा रहे हैं।
उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध हरसिद्धि मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी मानी जाने वाली माता हरसिद्धि के मंदिर में घटस्थापना के साथ विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। मंदिर के विशाल दीपस्तंभों पर दीप प्रज्वलित करने और शाम की भव्य आरती में शामिल होने के लिए भक्तों में उत्साह देखा जा रहा है।
नवरात्रि के पहले दिन हरसिद्धि मंदिर में भक्तों की भीड़
उज्जैन में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही धार्मिक स्थलों पर उत्सव का माहौल है। शहर के प्रसिद्ध हरसिद्धि मंदिर में सुबह से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। घटस्थापना के बाद मंदिर में विशेष अनुष्ठान शुरू किए गए हैं।

हरसिद्धि मंदिर को उज्जैन के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी का मंदिर है। नवरात्रि के नौ दिनों में यहां माता की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया जाता है और सुबह-शाम पूजा-अर्चना होती है।
मंदिर के पुजारी लाला गिरी के अनुसार, नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन शाम सात बजे ढोल-नगाड़ों के साथ विशेष आरती की जाती है। इस दौरान स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले भक्त भी माता के दर्शन करते हैं।
माता सती की कोहनी गिरने से जुड़ी है मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार, उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर वाले स्थान पर माता सती की कोहनी गिरी थी। इसी मान्यता के कारण इस स्थल को शक्ति उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मंदिर की धार्मिक महत्ता के साथ इसका ऐतिहासिक महत्व भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
मंदिर में नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-पाठ और श्रृंगार की परंपरा निभाई जाती है। भक्त माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं। हालांकि, माता सती से जुड़ी यह कथा धार्मिक मान्यता पर आधारित है।
मंदिर के विशाल दीपस्तंभ हैं खास आकर्षण
हरसिद्धि मंदिर परिसर में बने दो विशाल दीपस्तंभ इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं। इन्हें शिव और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में इन स्तंभों पर लगी सैकड़ों दीपमालिकाओं को प्रज्वलित किया जाता है। एक साथ जलते दीपों का दृश्य मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बनता है।
मंदिर के पुजारी शेषनारायण पुरी के अनुसार, दीप प्रज्वलित करने के लिए भक्त पहले से अपनी बारी तय कराते हैं। नवरात्रि के दौरान दीपस्तंभों को रोशन करने को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है।
नवरात्रि के अवसर पर हरसिद्धि मंदिर में पूजा, आरती और दीप प्रज्वलन की परंपराएं उज्जैन की धार्मिक पहचान को भी दर्शाती हैं। इन नौ दिनों में मंदिर में भक्तों की आवाजाही बढ़ने के साथ पूरा परिसर भक्ति और उत्सव के वातावरण से भर जाता है।










