बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई जारी रही। चेक बाउंस मामले में कोर्ट ने फिलहाल उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है और अगली सुनवाई सोमवार, 16 फरवरी 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव की जमानत याचिका पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई सोमवार, 16 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने राजपाल यादव से कहा कि उन्हें अब तक दो दर्जन से अधिक मौके दिए जा चुके हैं। कोर्ट ने दूसरे पक्ष से भी जमानत याचिका पर जवाब मांगा है।
अदालत की टिप्पणियाँ और राजपाल यादव की स्थिति
सुनवाई के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजपाल यादव से कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें अब तक कम से कम दो दर्जन मौके दिए जा चुके हैं। कोर्ट ने यह भी बताया कि कई बार राशि भुगतान का आश्वासन देने के बावजूद अभिनेता ने भुगतान नहीं किया। न्यायालय ने कहा, “आप जेल इसलिए गए हैं क्योंकि आपने अपना वादा पूरा नहीं किया। अदालत के आदेश के बावजूद आपने आत्मसमर्पण नहीं किया, और केवल जब अदालत ने दोबारा आदेश जारी किया तब आपने आत्मसमर्पण किया।
बार एंड बेंच के अनुसार, अदालत ने दूसरी पार्टी से भी जमानत याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा और इसके लिए सोमवार को सुनवाई होगी।

मुरली प्रोजेक्ट्स का पक्ष
इस मामले में मुरली प्रोजेक्ट्स के वकील ने याचिका का विरोध किया। वकील ने तर्क दिया कि बचाव पक्ष पिछली सुनवाई के दौरान भ्रम या गलत सूचना का दावा नहीं कर सकता, विशेषकर तब जब राजपाल यादव का प्रतिनिधित्व उसी समय वरिष्ठ अधिवक्ता भास्कर उपाध्याय कर रहे थे। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि राजपाल यादव द्वारा 3 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। न्यायालय ने कहा कि मामला लंबे समय से लंबित है और कई बार वादे होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
राजपाल यादव के वकील ने अदालत से अंतरिम जमानत का अनुरोध करते हुए बताया कि अभिनेता अपने बड़े भाई की बेटी की शादी में शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि राजपाल यादव बकाया राशि जमा करने के लिए तैयार हैं और इस संबंध में उन्हें बॉलीवुड इंडस्ट्री के सदस्यों और अन्य स्रोतों से आर्थिक सहायता भी प्राप्त हुई है। हालांकि अदालत ने कहा कि कानून के अनुसार सहानुभूति का असर सीमित है, और इसे याचिका को मंजूरी देने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
अगली सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 16 फरवरी 2026 को निर्धारित की है। इस सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्कों और दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि चेक बाउंस के मामलों में जमानत मिलने में वित्तीय लेन-देन और कोर्ट के आदेशों के पालन का विशेष महत्व होता है।










