CII Report: 50% GER के लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी और ऑनलाइन मॉडल जरूरी

CII रिपोर्ट के मुताबिक 2035 तक 50% GER के लिए भारत को 8.6 करोड़ छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ना होगा। डिजिटल और नए शिक्षा मॉडल जरूरी बताए गए हैं

CII की रिपोर्ट के मुताबिक, NEP 2020 के तहत 2035 तक 50 प्रतिशत GER हासिल करना भारत के लिए बड़ी चुनौती है। इसके लिए 8.6 करोड़ छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ना होगा। मौजूदा ढांचे के साथ यह लक्ष्य कठिन माना जा रहा है, इसलिए डिजिटल और नए शिक्षा मॉडल जरूरी बताए गए हैं।

NEP 2020 GER लक्ष्य: CII और ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 2035 तक उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो हासिल करने के लिए बड़े बदलाव करने होंगे। यह लक्ष्य देशभर में लागू NEP 2020 के तहत तय किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि इसके लिए 8.6 करोड़ छात्रों को कॉलेज और यूनिवर्सिटी से जोड़ना होगा, जो मौजूदा संख्या से काफी ज्यादा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल पारंपरिक संस्थानों से यह संभव नहीं होगा, इसलिए डिजिटल यूनिवर्सिटी, ऑनलाइन कोर्स और इंडस्ट्री से जुड़े स्किल आधारित मॉडल अपनाने की जरूरत पड़ेगी।

2035 तक 50% GER का लक्ष्य क्यों चुनौतीपूर्ण

रिपोर्ट के अनुसार, NEP 2020 का लक्ष्य है कि 2035 तक ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो को 50 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। इसके लिए करीब 8.6 करोड़ छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ना होगा, जो मौजूदा आंकड़ों से काफी ज्यादा है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले एक दशक तक हर साल औसतन 5.3 प्रतिशत नामांकन वृद्धि की जरूरत बताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी केवल मौजूदा ढांचे के भरोसे संभव नहीं है।

सिर्फ कॉलेज नहीं, नए मॉडल भी जरूरी

CII रिपोर्ट साफ कहती है कि केवल पारंपरिक कॉलेज और यूनिवर्सिटी इस बढ़ती मांग को पूरा नहीं कर पाएंगे। फिजिकल कैंपस अहम बने रहेंगे, लेकिन उनके साथ नए विकल्पों को अपनाना जरूरी होगा।

डिजिटल यूनिवर्सिटी, ऑनलाइन क्रेडिट कोर्स, वर्चुअल लर्निंग और टेक्नोलॉजी आधारित पढ़ाई को बड़े पैमाने पर लागू करने की जरूरत बताई गई है, ताकि शिक्षा की पहुंच कैंपस से बाहर तक बढ़ाई जा सके।

बदलती जॉब स्किल्स और टेक्नोलॉजी की भूमिका

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि 2030 तक करीब 40 प्रतिशत जॉब स्किल्स बदल सकती हैं। ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों को रोजगार से जुड़े कोर्स डिजाइन करने होंगे।

माइक्रो क्रेडेंशियल, मॉड्यूलर कोर्स, इंडस्ट्री के साथ साझेदारी और AI आधारित असेसमेंट जैसे विकल्प तेजी से अपनाए जा रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ प्रशासन और गवर्नेंस में भी डिजिटल टूल्स की भूमिका बढ़ रही है।

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