भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली से सेंसेक्स 605 अंक टूटकर बंद हुआ जबकि निफ्टी 25,683 पर फिसल गया। FII की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की तेजी और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा कमजोर की।
Closing Bell: शुक्रवार 9 जनवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के लिए दिन बेहद निराशाजनक रहा। कारोबार के अंत में बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख इंडेक्स बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। यह लगातार पांचवां कारोबारी दिन रहा, जब बाजार लाल निशान में बंद हुआ। मौजूदा सप्ताह की गिरावट सितंबर 2025 के बाद की सबसे खराब साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
सेंसेक्स और निफ्टी का क्लोजिंग हाल
बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) शुक्रवार को 604.72 अंक या 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,576.24 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स पर दबाव बना रहा और आखिरी घंटे में बिकवाली और तेज हो गई। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 193.55 अंक या 0.75 प्रतिशत टूटकर 25,683.30 पर बंद हुआ। निफ्टी का 25,700 के नीचे बंद होना बाजार के लिए एक कमजोर संकेत माना जा रहा है।
हफ्तेभर की गिरावट ने बढ़ाई चिंता
अगर पूरे हफ्ते के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो निफ्टी में करीब 2.45 प्रतिशत और सेंसेक्स में लगभग 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट 26 सितंबर 2025 को खत्म हुए सप्ताह के बाद सबसे ज्यादा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तेज साप्ताहिक गिरावट यह दिखाती है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर हुआ है और वे जोखिम लेने से बच रहे हैं।
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा बिकवाली
शुक्रवार के कारोबार में रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। रियल्टी शेयरों पर ऊंची ब्याज दरों और मांग को लेकर चिंता का असर दिखा। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में कमजोर खपत की आशंका से दबाव बना रहा, जबकि ऑटो शेयरों में लागत और डिमांड से जुड़े फैक्टर्स ने निवेशकों को सतर्क रखा।
बाजार गिरने की बड़ी वजहें
आज की गिरावट के पीछे कई बड़े कारण रहे। सबसे अहम वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली रही। विदेशी निवेशक बीते कुछ सत्रों से भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा, अमेरिका में टैरिफ बढ़ाने को लेकर चल रही हलचल ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है। ग्लोबल ट्रेड पर इसके असर की चिंता ने उभरते बाजारों में जोखिम भावना को कम किया है।
कच्चे तेल की कीमतों का असर
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में हालिया तेजी भी भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक साबित हुई है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और करंट अकाउंट डेफिसिट को लेकर चिंता बढ़ जाती है। इसी वजह से ऑटो, पेंट्स और कंज्यूमर सेक्टर जैसे तेल संवेदनशील शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।
इंडिया VIX में तेज उछाल
बाजार में डर को दर्शाने वाला इंडेक्स इंडिया VIX इस सप्ताह 15.6 प्रतिशत उछल गया। यह मई 2025 के बाद की सबसे तेज बढ़त मानी जा रही है। इंडिया VIX में तेजी का मतलब है कि निवेशक आने वाले दिनों में बाजार में ज्यादा उतार चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। बढ़ता VIX यह भी संकेत देता है कि बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।









