ट्रंप के चावल पर नए टैरिफ संकेत के बाद भारतीय बाजार में भारी गिरावट आई। सेंसेक्स–निफ्टी दिनभर दबाव में रहे और निवेशकों के लगभग 7 लाख करोड़ रुपये मिट गए। चावल कंपनियों के शेयर 10% तक टूटे, जिससे बाजार सेंटीमेंट कमजोर हुआ।
Closing Bell: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पूरे दिन दबाव में रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा भारत से आयात होने वाले चावल पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी ने निवेशकों की भावना को कमजोर कर दिया। इस बयान के बाद बाजार में यह डर बढ़ गया कि भारत–अमेरिका ट्रेड डील अब और देर में हो सकती है। यही कारण है कि शुरुआती मिनटों से ही बाजार में बिकवाली हावी रही और सेंटीमेंट लगातार बिगड़ता गया।
सेंसेक्स–निफ्टी में दिनभर गिरावट
तीस शेयरों वाला BSE Sensex 84,742 पर खुला लेकिन पहले ही घंटे में इसमें तेज गिरावट दर्ज हुई। दिन के दौरान यह 700 से ज्यादा अंक टूट गया और अंत में 436.41 अंकों की गिरावट के साथ 84,666.28 पर बंद हुआ। इसी तरह, Nifty 50 25,867 पर खुला और ट्रेडिंग के दौरान 25,728 के दिन के निचले स्तर तक फिसल गया। आखिर में यह 25,839.65 पर बंद हुआ। लगातार बिकवाली ने दोनों प्रमुख इंडेक्स की मजबूती को कमजोर कर दिया।
निवेशकों का मूड कमजोर
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, फेड की महत्वपूर्ण नीति बैठक से पहले निवेशकों का रुख बेहद सतर्क रहा। रुपये की कमजोरी भी बाजार पर दबाव बनाती रही। एफआईआई द्वारा लगातार बिकवाली और ट्रेड डील में अनिश्चितता ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली, जबकि पीएसयू बैंक, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सीमित खरीदारी दिखी। स्मॉल-कैप शेयरों ने तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे ब्रॉडर मार्केट में थोड़ी स्थिरता बनी रही।
ग्लोबल मार्केट्स से आए कमजोर संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी हावी रही। जापान में बॉन्ड यील्ड बढ़ने की वजह से दबाव बना है और उम्मीद है कि Bank of Japan अपनी अगली बैठक में सख्ती बढ़ा सकता है। अमेरिकी फेड की संभावित 25 बेसिस पॉइंट रेट कट की उम्मीद के बावजूद निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है। आने वाले दिनों में करेंसी मूवमेंट, एफआईआई फ्लो और केंद्रीय बैंकों के बयान बाजार की दिशा तय करेंगे।
टॉप लूज़र्स–गैनर्स की स्थिति
सेंसेक्स की कंपनियों में एशियन पेंट्स, टेक एम, एचसीएल टेक, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, टीसीएस और आईसीआईसीआई बैंक में 4.6 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं इटरनल, टाइटन, अदानी पोर्ट्स, बीईएल और एसबीआई हरे निशान में बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने मुख्य इंडेक्स की तुलना में बेहतर मजबूती दिखाई।
सेक्टोरल प्रदर्शन रहा कमजोर
निफ्टी आईटी, ऑटो और फार्मा इंडेक्स लगभग 1 प्रतिशत टूटे। वहीं निफ्टी एफएमसीजी, मीडिया, केमिकल्स और पीएसयू बैंक भी लाल निशान में बंद हुए। लगातार विदेशी बिकवाली ने सेक्टोरल इंडेक्स पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
दिसंबर में ट्रेड डील मुश्किल
ट्रंप ने चावल और कनाडा से आने वाले फर्टिलाइज़र पर नए टैरिफ लगाने का संकेत दिया है। उनका तर्क है कि ये आयात अमेरिकी किसानों को चुनौती दे रहे हैं। हालांकि अमेरिकी ट्रेड अधिकारी इस सप्ताह भारत में चर्चा जारी रखेंगे, लेकिन क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों के कारण दिसंबर में कोई बड़ी घोषणा होने की संभावना बहुत कम है। इससे भारतीय बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
दो दिन में निवेशकों के ₹7 लाख करोड़ डूबे
लगातार गिरावट की वजह से निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप दो ट्रेडिंग सेशंस में 6.77 लाख करोड़ रुपये घट गया। शुक्रवार को मार्केट कैप 47,171,042 करोड़ रुपये था जो मंगलवार तक घटकर 46,493,974 करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट बाजार में कमजोर धारणा का सीधा संकेत है।
चावल कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह गिरे
ट्रंप के बयान का सबसे सीधा असर भारतीय चावल कंपनियों पर दिखा। केआरबीएल, एलटी फूड्स और जीआरएम इंडस्ट्रीज के शेयर 10 प्रतिशत तक टूट गए। निवेशकों ने चावल एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियों में भारी बिकवाली की और यह सेक्टर दिनभर दबाव में रहा।
एशियाई बाजार भी लाल निशान में
वॉल स्ट्रीट की गिरावट के बाद एशियाई बाजार भी कमजोरी में रहे। चीन का CSI 300 इंडेक्स 0.11 प्रतिशत नीचे आया और हांगकांग का हैंग सेंग 0.41 प्रतिशत गिरा। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का KOSPI भी लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी टेक चिप H200 की बिक्री पर मंजूरी मिलने से हालांकि सेंटीमेंट थोड़ा मिला-जुला रहा, लेकिन कुल मिलाकर दबाव अधिक रहा।










