सीएम धामी का कांग्रेस पर पलटवार, बोले- चुनावी हार से बौखलाकर SIR पर उठा रही सवाल

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने SIR पर कांग्रेस के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी हार के बाद पार्टी मतदाता सूची पर भ्रम फैला रही है।
सीएम धामी का कांग्रेस पर पलटवार, बोले- चुनावी हार से बौखलाकर SIR पर उठा रही सवाल
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार किया है। हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लगातार चुनावी हार का सामना कर रही पार्टी अब मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि वह पिछले दो वर्षों से इस पद पर हैं, जबकि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और उसमें संशोधन की प्रक्रिया पहले से चली आ रही है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करना और सूची को अधिक व्यवस्थित बनाना है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जब राजनीतिक परिस्थितियां उसके पक्ष में नहीं रहतीं, तब वह चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, कांग्रेस को इस विषय पर सवाल उठाने से पहले अपने पुराने बयानों और शासनकाल के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को भी देखना चाहिए।

हरिद्वार में मीडिया से बातचीत करते हुए धामी ने कांग्रेस नेताओं के पुराने बयानों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 के दौरान विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या बढ़ने को लेकर कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए गए थे। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अब जब मतदाता सूची को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया चल रही है, तो वही पार्टी इस पर आपत्ति जता रही है। उन्होंने इसे कांग्रेस के रुख में विरोधाभास बताते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में अलग-अलग अवधियों के दौरान मतदाताओं की संख्या में हुए बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने वर्ष 2001 से 2007, 2007 से 2012, 2012 से 2017 और 2017 से 2022 तक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई थी, जबकि भाजपा की सरकार के दौरान कुछ अवधियों में कमी दर्ज की गई। धामी ने इन बदलावों को अपनी दलील के समर्थन में पेश करते हुए कहा कि मतदाता संख्या में होने वाले परिवर्तन को राजनीतिक आरोपों के बजाय उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर समझा जाना चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस का नेतृत्व लंबे समय तक सत्ता में रहा है और अब चुनावी परिणामों के बाद एसआईआर की प्रक्रिया को मुद्दा बना रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता चुनावों में अपना फैसला सुना रही है। ये सभी टिप्पणियां मुख्यमंत्री की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा थीं। कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों और उन पर पार्टी के विस्तृत जवाब को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर देखना जरूरी है।

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। इस तरह के अभियान में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की जाती है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें और रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों को दूर किया जा सके। हालांकि, ऐसी प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि किसी पात्र नागरिक का नाम गलती से मतदाता सूची से बाहर न हो जाए। इसी कारण नाम हटाने, नए नाम जोड़ने, दावों और आपत्तियों के निपटारे तथा सुधार के लिए उपलब्ध प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजर रहती है।

उत्तराखंड में एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर चिंता जताई है। जागरण की एक अलग रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर नाम हटाए जाने और पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर रह जाने की आशंका का मुद्दा उठाया था। पार्टी ने नाम दोबारा जुड़वाने की प्रक्रिया को आसान बनाने और मतदाताओं को पर्याप्त अवसर देने की मांग भी की थी।

इस पृष्ठभूमि में एसआईआर को लेकर मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हुई है। एक ओर धामी इस प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक कारणों से सवाल उठाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं कांग्रेस की ओर से मतदाता सूची में हुए बदलावों और पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रखने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन दोनों पक्षों के बयानों को समझने के लिए आधिकारिक मतदाता सूची, नामों में हुए बदलाव के आंकड़ों और निर्वाचन विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी को देखना जरूरी है।

मतदाता सूची में बदलाव के आंकड़े अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं होते। किसी क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या बढ़ने या घटने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जिनमें स्थान परिवर्तन, मृत्यु, दोहरी प्रविष्टियां, रिकॉर्ड में सुधार और पात्रता से संबंधित जांच शामिल हैं। लेकिन यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हट जाता है, तो उसे शिकायत और सुधार की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम जुड़वाने का अवसर मिलना चाहिए। इसीलिए पुनरीक्षण की पारदर्शिता और दावों-आपत्तियों के उचित निपटारे का महत्व बना रहता है।

हरिद्वार जिले के प्रशासन ने एसआईआर से संबंधित जानकारी और सहायता के लिए आधिकारिक पेज उपलब्ध कराया है। इसमें अभियान से जुड़े दस्तावेज, मतदाता सूची, कार्यक्रम और नियंत्रण कक्ष के संपर्क विवरण दिए गए हैं। मतदाता अपने नाम की स्थिति जांचने या सूची से संबंधित समस्या के समाधान के लिए निर्वाचन विभाग की आधिकारिक व्यवस्था का सहारा ले सकते हैं।

मुख्यमंत्री धामी के बयान से साफ है कि उत्तराखंड में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी हार से बौखलाकर एसआईआर पर सवाल उठाने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और पात्र लोगों के नाम सुरक्षित रखने से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। इस पूरे विवाद में अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए राजनीतिक बयानों के साथ-साथ निर्वाचन विभाग के रिकॉर्ड, पुनरीक्षण के दौरान हुए बदलावों और शिकायतों के निपटारे की स्थिति को भी देखना आवश्यक है

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