उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नजीबाबाद विधानसभा सीट प्रदेश की चर्चित सीटों में गिनी जाती है। विधानसभा क्षेत्र संख्या 17 वाली यह सीट नगीना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। फिलहाल यहां समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक तसलीम अहमद काबिज हैं, जो लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।
नजीबाबाद: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। बिजनौर जिले की नजीबाबाद विधानसभा सीट पर इस बार भी दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है। यहां समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक तसलीम अहमद लगातार तीन चुनाव जीतकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित कर चुके हैं। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) पिछले कई चुनावों से इस सीट पर जीत की तलाश में है।
ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा के सामने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखने की चुनौती होगी, जबकि बीजेपी सत्ता विरोधी माहौल और विपक्षी वोटों के समीकरण का फायदा उठाने की कोशिश करेगी। नजीबाबाद सीट का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां मतदाताओं ने अलग-अलग समय पर वामपंथी दल, बहुजन समाज पार्टी (BSP) और सपा को मौका दिया है।
वर्ष 1991 में बीजेपी ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन उसके बाद पार्टी यहां दोबारा विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकी। आगामी चुनाव में बीजेपी और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के संभावित गठबंधन के सामने सपा-कांग्रेस के संभावित तालमेल की चुनौती अहम हो सकती है। हालांकि, चुनावी गठबंधन और उम्मीदवारों को लेकर अंतिम तस्वीर सामने आने के बाद ही मुकाबले की वास्तविक दिशा स्पष्ट होगी।
नजीबाबाद सीट का चुनावी इतिहास क्या कहता है?
नजीबाबाद विधानसभा सीट बिजनौर जिले में स्थित है और नगीना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राजेंद्र ने 34,730 वोट हासिल करके जीत दर्ज की थी। उन्होंने वामपंथी उम्मीदवार तिलक राम को 15,829 वोटों से हराया था। यह नजीबाबाद में बीजेपी की पहली और अब तक की आखिरी जीत रही।
इसके बाद 1993, 1996 और 2002 के विधानसभा चुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के रामस्वरूप सिंह ने लगातार तीन जीत दर्ज कीं। इन चुनावों में उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को हराकर क्षेत्र में वामपंथी राजनीति की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
वर्ष 2007 में राजनीतिक समीकरण बदले और बीएसपी के शीशराम ने जीत हासिल की। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में तसलीम अहमद बीएसपी के टिकट पर मैदान में उतरे और 62,713 वोट हासिल करके बीजेपी के राजीव कुमार अग्रवाल को हराया। इस जीत के साथ नजीबाबाद में तसलीम अहमद की राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हुआ।
पार्टी बदली, लेकिन तसलीम अहमद की जीत का सिलसिला नहीं रुका

2017 के विधानसभा चुनाव में तसलीम अहमद ने बीएसपी छोड़कर सपा का दामन थाम लिया। इसके बावजूद उनका जनसमर्थन बरकरार रहा। उन्होंने 81,082 वोट हासिल किए, जबकि बीजेपी के राजीव कुमार अग्रवाल को 79,080 वोट मिले। इस तरह तसलीम अहमद ने महज 2,002 वोटों के अंतर से करीबी मुकाबला जीत लिया।
2022 के विधानसभा चुनाव में तसलीम अहमद ने अपनी स्थिति और मजबूत की। सपा उम्मीदवार के तौर पर उन्होंने 1,02,675 वोट हासिल किए और बीजेपी के राजा भरतेंद्र सिंह को 23,770 वोटों से पराजित किया। बीजेपी उम्मीदवार को 78,905 वोट मिले, जबकि बीएसपी के शहनवाज आलम 44,727 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
लगातार तीन चुनाव जीतने के कारण तसलीम अहमद 2027 में भी सपा की रणनीति के केंद्र में रह सकते हैं। हालांकि, अगले चुनाव में पार्टी किसे उम्मीदवार बनाती है और स्थानीय मुद्दे किस तरह प्रभाव डालते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
2027 में BJP-RLD बनाम सपा-कांग्रेस का मुकाबला?
नजीबाबाद विधानसभा सीट पर 2027 के चुनावी समीकरण गठबंधन की राजनीति से प्रभावित हो सकते हैं। यदि बीजेपी और आरएलडी साथ चुनाव लड़ते हैं, तो दोनों दलों के समर्थक मतों को एकजुट करने की रणनीति महत्वपूर्ण होगी। वहीं, सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने की स्थिति में विपक्षी मतों का बंटवारा रोकना उनके लिए अहम साबित हो सकता है।
हालांकि, इन संभावित गठबंधनों को अभी निश्चित चुनावी व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उम्मीदवारों की घोषणा, सीटों के बंटवारे और स्थानीय नेताओं की भूमिका से मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है।
जातीय और सामाजिक समीकरण होंगे अहम
नजीबाबाद में मुस्लिम, अनुसूचित जाति और विभिन्न पिछड़े वर्गों के मतदाता चुनावी परिणाम को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए सामाजिक समीकरणों के साथ स्थानीय समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना भी जरूरी होगा। रोजगार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, किसानों से जुड़े सवाल और स्थानीय बुनियादी ढांचा मतदाताओं की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकते हैं। उम्मीदवार की क्षेत्र में सक्रियता और जनता के साथ उसका जुड़ाव भी चुनावी परिणाम पर असर डाल सकता है।
क्या सपा लगा पाएगी जीत की चौथी हैट्रिक?
नजीबाबाद में 1993 से 2002 तक रामस्वरूप सिंह ने लगातार तीन जीत दर्ज की थीं। इसके बाद तसलीम अहमद ने 2012, 2017 और 2022 में जीत की हैट्रिक लगाकर इतिहास के एक और महत्वपूर्ण अध्याय को दोहराया। अब 2027 में सपा के सामने लगातार चौथी जीत हासिल करने की चुनौती होगी, जबकि बीजेपी अपनी तीन दशक से अधिक पुरानी हार के सिलसिले को तोड़ने की कोशिश करेगी।









