Community Solar क्या है? बिना Rooftop Panel के ऐसे घटाएं बिजली बिल, जानें पूरा सिस्टम

Community Solar से बिना Rooftop Panel लगाए भी बिजली बिल कम किया जा सकता है। जानें यह सिस्टम कैसे काम करता है, खर्च कितना है और भारत में कहां उपलब्ध है।

कम्युनिटी सोलर ऐसी व्यवस्था है, जिसमें बिना घर की छत पर सोलर पैनल लगाए भी सौर ऊर्जा का लाभ लिया जा सकता है। इसमें लोग साझा सोलर प्लांट में हिस्सेदारी लेकर या सब्सक्रिप्शन के जरिए अपने बिजली बिल पर छूट प्राप्त करते हैं।

 Community Solar System India: कम्युनिटी सोलर उन लोगों के लिए एक उपयोगी विकल्प बनकर उभर रहा है जिनके पास अपनी छत नहीं है या जो सोलर पैनल लगाने का बड़ा खर्च नहीं उठा सकते। इस मॉडल में साझा सोलर पावर प्लांट से बनने वाली बिजली का लाभ उपभोक्ताओं को बिजली बिल में क्रेडिट के रूप में मिलता है, जिससे बिना अतिरिक्त रखरखाव के बिजली खर्च कम किया जा सकता है।

क्या है कम्युनिटी सोलर और क्यों बढ़ रही इसकी मांग?

देश में सौर ऊर्जा का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन हर व्यक्ति अपनी छत पर सोलर पैनल नहीं लगवा सकता। कई लोग किराए के मकान में रहते हैं, कुछ के पास पर्याप्त छत नहीं होती, जबकि कई परिवार शुरुआती निवेश करने में सक्षम नहीं होते। ऐसे लोगों के लिए कम्युनिटी सोलर एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आया है।

इस मॉडल में किसी एक बड़े स्थान पर उच्च क्षमता वाला सोलर पावर प्लांट लगाया जाता है। इच्छुक उपभोक्ता इस प्लांट में अपनी जरूरत के अनुसार हिस्सेदारी खरीद सकते हैं या फिर मासिक सब्सक्रिप्शन लेकर इससे जुड़ सकते हैं। प्लांट में बनने वाली बिजली सीधे पावर ग्रिड में भेजी जाती है और उपभोक्ता के हिस्से की बिजली का क्रेडिट उसके मासिक बिजली बिल में समायोजित कर दिया जाता है। इससे बिना घर पर सोलर सिस्टम लगाए भी बिजली बिल में अच्छी बचत हो सकती है।

कम्युनिटी सोलर कैसे काम करता है?

कम्युनिटी सोलर सिस्टम का संचालन काफी आसान प्रक्रिया पर आधारित है। सबसे पहले ऐसी जगह का चयन किया जाता है जहां पूरे साल पर्याप्त धूप उपलब्ध रहती है। वहां सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जाता है, जिसे बिजली कंपनी, निजी संस्था या स्थानीय प्रशासन संचालित कर सकता है।

इसके बाद उपभोक्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार प्लांट की क्षमता में हिस्सेदारी खरीदते हैं या मासिक सदस्यता लेते हैं। प्लांट से उत्पन्न बिजली सीधे राष्ट्रीय या राज्य बिजली ग्रिड में भेजी जाती है। उपभोक्ता के घर में बिजली पहले की तरह सामान्य सरकारी मीटर के जरिए ही पहुंचती है, लेकिन उसके हिस्से की सौर ऊर्जा के बराबर क्रेडिट बिजली कंपनी उसके मासिक बिल से घटा देती है। इस पूरी प्रक्रिया में उपभोक्ता को अलग से किसी तकनीकी रखरखाव की जरूरत नहीं पड़ती।

भारत में कहां उपलब्ध है यह सुविधा?

भारत में कम्युनिटी सोलर की शुरुआत अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन कुछ राज्यों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में Virtual Net Metering जैसी नीतियों के जरिए इस मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है।

दिल्ली की सोलर नीति में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), हाउसिंग सोसायटी और अपार्टमेंट समूहों को साझा सोलर प्लांट लगाने की अनुमति दी गई है। इससे एक ही प्लांट से बनने वाली बिजली का लाभ कई परिवारों को एक साथ मिल सकता है। फिलहाल यह सुविधा बड़े शहरों, आवासीय सोसायटियों और कुछ पायलट प्रोजेक्ट्स तक सीमित है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसके विस्तार की संभावना जताई जा रही है।

कम्युनिटी सोलर पर कितना खर्च आता है?

यदि कोई उपभोक्ता स्थायी रूप से इस योजना से जुड़ना चाहता है, तो वह प्लांट में अपनी क्षमता का हिस्सा खरीद सकता है। वर्तमान अनुमान के अनुसार 1 kW क्षमता खरीदने के लिए लगभग ₹40,000 से ₹60,000 तक का एकमुश्त निवेश करना पड़ सकता है। इसके बाद करीब 25 वर्षों तक उस हिस्से से बनने वाली बिजली का लाभ बिल में मिलता रहता है।

दूसरा विकल्प सब्सक्रिप्शन मॉडल है, जिसमें उपभोक्ता को केवल नाममात्र की जॉइनिंग फीस और मासिक शुल्क देना होता है। यह मॉडल उन लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक है जो शुरुआती बड़ा निवेश नहीं करना चाहते। आमतौर पर इस मॉडल के तहत मिलने वाली बिजली पारंपरिक बिजली दरों की तुलना में लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक सस्ती पड़ सकती है।

रूफटॉप सोलर और कम्युनिटी सोलर में क्या अंतर है?

यदि आपके पास अपना घर और पर्याप्त छत उपलब्ध है, तो रूफटॉप सोलर सिस्टम लंबी अवधि में अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है। सरकार की विभिन्न सब्सिडी योजनाओं का लाभ लेकर बिजली बिल में 90 से 100 प्रतिशत तक की बचत संभव हो सकती है। हालांकि इसमें शुरुआती निवेश, इंस्टॉलेशन और रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी तरह उपभोक्ता की होती है।

दूसरी ओर, कम्युनिटी सोलर में न तो छत की आवश्यकता होती है और न ही सिस्टम के रखरखाव की चिंता। किरायेदार, अपार्टमेंट में रहने वाले लोग या सीमित बजट वाले परिवार बिना किसी तकनीकी झंझट के बिजली बिल में नियमित बचत कर सकते हैं। हालांकि इसमें बचत का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम होता है और आमतौर पर 10 से 20 प्रतिशत तक सीमित रहता है।

क्या कम्युनिटी सोलर आपके लिए सही विकल्प है?

यदि आप किराए के मकान में रहते हैं, आपके पास अपनी छत नहीं है या आप कम निवेश में सौर ऊर्जा का लाभ लेना चाहते हैं, तो कम्युनिटी सोलर एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। वहीं, यदि आपका अपना घर है और आप लंबे समय के लिए निवेश कर सकते हैं, तो रूफटॉप सोलर सिस्टम अधिक बचत देने वाला समाधान साबित हो सकता है।

आने वाले समय में जैसे-जैसे राज्यों में Virtual Net Metering और साझा सोलर परियोजनाओं का विस्तार होगा, वैसे-वैसे कम्युनिटी सोलर भारत में स्वच्छ ऊर्जा अपनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। इससे न केवल उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कमी आएगी, बल्कि देश में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी नई गति मिलेगी।

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