दरभंगा में जमीन विवाद में गोलीबारी, युवक घायल; 5 नामजद समेत 17 पर FIR, जांच के लिए SIT गठित

दरभंगा में एम्स के पास जमीन विवाद में गोलीबारी से विजय भगत घायल हुए। भाई के बयान पर 5 नामजद समेत 17 पर FIR दर्ज हुई, SIT ने जांच शुरू की है।
दरभंगा में जमीन विवाद में गोलीबारी, युवक घायल; 5 नामजद समेत 17 पर FIR, जांच के लिए SIT गठित
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दरभंगा में निर्माणाधीन एम्स के पास जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हुई गोलीबारी के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। बिशनपुर थाना क्षेत्र के पंचोभ-भरौल इलाके में जमीन को लेकर चल रहे विवाद ने बुधवार को हिंसक रूप ले लिया। दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी और मारपीट की स्थिति बनी और इसके बाद फायरिंग की बात सामने आई। घटना में विजय कुमार भगत नामक युवक गोली लगने से घायल हो गया। गोली उसके गर्दन और कंधे के बीच लगी बताई गई है। घटना के बाद उसे पहले डीएमसीएच की इमरजेंसी ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मामले में घायल युवक के भाई अजय भगत के बयान पर बिशनपुर थाने में कांड संख्या 156/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने पांच नामजद लोगों समेत कुल 17 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी में पांच नामजद लोगों के साथ 8 से 10 अज्ञात लोगों का भी जिक्र है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल एक पक्ष की ओर से आवेदन मिला है। दूसरे पक्ष की ओर से आवेदन मिलने पर उसके आधार पर भी प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस के अनुसार, घटना के पीछे करीब एक साल से चला आ रहा जमीन विवाद बताया जा रहा है। यह विवाद धर्मेंद्र साह और हनुमान नगर के मुखिया राम जी राम से जुड़े पक्षों के बीच बताया गया है। जमीन के कागजात को लेकर दोनों पक्षों ने पहले अंचल कार्यालय में आवेदन दिया था। मामले में अंचलाधिकारी की ओर से पक्षों को सक्षम न्यायालय में जाने की सलाह दी गई थी। इसके बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ और पिछले करीब एक महीने में दोनों पक्षों के बीच कई बार पंचायत कराकर मामला सुलझाने की कोशिश भी हुई। पुलिस के अनुसार, चार से पांच बार बातचीत और पंचायत होने के बावजूद जमीन का विवाद लगातार बना रहा।

बताया गया है कि विवादित जमीन निर्माणाधीन एम्स के आसपास विकसित की जा रही स्मार्ट सिटी क्षेत्र से जुड़ी है। अलग-अलग रिपोर्टों में जमीन का क्षेत्रफल करीब आठ कट्ठा बताया गया है। इसी जमीन पर निर्माण कार्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव चल रहा था। एक पक्ष की ओर से जमीन पर धारा 144 लगाने की मांग भी की गई थी। इसी बीच दूसरे पक्ष द्वारा निर्माण कार्य शुरू किए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया।

प्राथमिकी में दर्ज शिकायत के अनुसार, विजय भगत अपने कुछ साथियों के साथ मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां पहले से कई लोग मौजूद थे और दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने के बाद फायरिंग शुरू हो गई। शिकायत में नामजद लोगों पर हथियार लेकर फायरिंग करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है।

घटना के बाद इलाके में अफरातफरी की स्थिति बन गई। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर जुटे, जबकि फायरिंग करने वाले लोग वहां से निकल गए। पुलिस की कई टीमों ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। बिशनपुर के साथ मब्बी और सिमरी थाना क्षेत्रों की पुलिस भी मौके पर पहुंची और आसपास की गतिविधियों की जानकारी जुटाई। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि गोलीबारी में कितने लोग शामिल थे और फायरिंग किस हथियार से की गई।

घटना के दौरान शिवपुरी स्मार्ट सिटी कार्यालय में तोड़फोड़ की कोशिश किए जाने की भी बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने कार्यालय में लगे CCTV के DVR तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन मजबूत लोहे का गेट होने के कारण वे अंदर नहीं जा सके। इसके बाद कार्यालय के बाहर खड़ी दो बाइक को लाठी-डंडों से क्षतिग्रस्त किए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस ने दोनों क्षतिग्रस्त बाइक को जब्त कर लिया है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वे किसकी थीं और घटना के समय वहां कैसे पहुंचीं।

पुलिस को घटनास्थल और आसपास के इलाकों से CCTV फुटेज के अलावा कुछ मोबाइल वीडियो भी मिले हैं। इन फुटेज को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस इन वीडियो के जरिए मौके पर मौजूद लोगों की पहचान करने, गोलीबारी की घटनाक्रम को समझने और आरोपों की पुष्टि करने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया पर भी घटना से जुड़े कुछ वीडियो सामने आए हैं, लेकिन पुलिस जांच पूरी होने से पहले किसी वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति को आरोपी मानना उचित नहीं होगा।

घायल विजय भगत को गोली लगने के बाद पहले डीएमसीएच की इमरजेंसी में लाया गया था। यहां उनके परिजन और परिचितों की भीड़ जमा हो गई थी। इसके बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए अललपट्टी स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार गोली गर्दन और बाएं कंधे के बीच के हिस्से में लगी थी। फिलहाल पुलिस घायल के बयान और चिकित्सकीय रिपोर्ट को भी जांच का हिस्सा बना रही है।

इस मामले में पुलिस ने अब जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया है। एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी के निर्देश पर गठित टीम में बिशनपुर थाना पुलिस के साथ टेक्निकल सेल को भी शामिल किया गया है। SIT CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और दोनों पक्षों के बीच पहले से चल रहे विवाद से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी। पुलिस का उद्देश्य गोलीबारी में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट करना और घटना की पूरी कड़ी को जोड़ना है।

पुलिस के मुताबिक अभी तक घटना में इस्तेमाल हथियार या गोली के खोखे की बरामदगी की सूचना नहीं है। हालांकि, जांच जारी है और पुलिस आसपास के इलाके में भी साक्ष्य तलाश रही है। घटनास्थल से लेकर आसपास के रास्तों तक लगे CCTV कैमरों की फुटेज को देखा जा रहा है। इसके साथ ही पुलिस यह भी पता कर रही है कि घटना से पहले और बाद में वहां कौन-कौन लोग पहुंचे थे।

मामले में पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल प्राथमिकी एक पक्ष के बयान के आधार पर दर्ज की गई है। दूसरे पक्ष की ओर से शिकायत मिलने पर उसे भी जांच में शामिल किया जाएगा। इससे साफ है कि अभी पुलिस की जांच प्रारंभिक चरण में है और प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। पुलिस सभी उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

जमीन विवाद का यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि घटनास्थल निर्माणाधीन एम्स के आसपास का क्षेत्र है और यहां लगातार विकास एवं निर्माण गतिविधियां चल रही हैं। जमीन के बढ़ते मूल्य और स्वामित्व या कब्जे से जुड़े विवाद कई बार स्थानीय स्तर पर तनाव का कारण बनते हैं। इस मामले में भी पुलिस अब जमीन से जुड़े दस्तावेज, पूर्व में दिए गए आवेदन, पंचायत में हुई बातचीत और अंचल कार्यालय की कार्रवाई से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर सकती है, ताकि विवाद की वास्तविक पृष्ठभूमि सामने आ सके।

फिलहाल गोलीबारी के बाद पुलिस इलाके में निगरानी बनाए हुए है। नामजद और अज्ञात आरोपितों की भूमिका की जांच की जा रही है। CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई की तैयारी में है। घायल युवक का इलाज जारी है और मामले की जांच SIT की निगरानी में आगे बढ़ रही है। प्राथमिकी में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं होता; आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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