दरभंगा जिले में इस अभियान के तहत जाले प्रखंड के स्कूलों में छात्र-छात्राओं की खेल प्रतिभा पहचानने के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, पंजीकरण की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर 2026 बताई गई है।
इस पहल में बच्चों को केवल पढ़ाई तक सीमित रहने के बजाय खेल के मैदान में भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। कोई छात्र कम दूरी की दौड़ में तेज है, तो कोई लंबी दौड़ में अपनी सहनशक्ति दिखा सकता है। वहीं कबड्डी में चुस्ती, फुर्ती और टीम के साथ तालमेल रखने वाले बच्चों को भी अपनी क्षमता साबित करने का मौका मिलेगा।
बिहार सरकार के मशाल-2.0 कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूलों और ग्रामीण इलाकों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। इसकी प्रतियोगिताओं में एथलेटिक्स, कबड्डी, फुटबॉल, वॉलीबॉल और साइकिलिंग जैसी खेल विधाएं शामिल हैं। चयन प्रक्रिया विद्यालय स्तर से शुरू होकर क्लस्टर, प्रखंड, जिला और राज्य स्तर तक आगे बढ़ती है।
इस व्यवस्था से उन बच्चों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है, जिनके पास निजी खेल अकादमी में प्रशिक्षण लेने की सुविधा नहीं है। गांवों में कई बच्चे स्थानीय स्तर पर बेहतर खेलते हैं, लेकिन उचित मार्गदर्शन, संसाधनों और प्रतियोगिताओं की कमी के कारण उनकी प्रतिभा सामने नहीं आ पाती। स्कूल स्तर पर नियमित प्रतियोगिताएं होने से ऐसे खिलाड़ियों की पहचान करना आसान हो सकता है।
कार्यक्रम में लड़के और लड़कियां दोनों भाग ले सकते हैं। आधिकारिक मशाल पोर्टल के अनुसार, अंडर-14 और अंडर-16 आयु वर्ग के लिए अलग-अलग स्पर्धाएं निर्धारित हैं। इनमें 60 और 80 मीटर की दौड़, लंबी दौड़, लंबी कूद, साइकिलिंग और कबड्डी शामिल हैं। कुछ खेलों में आयु वर्ग के अनुसार अलग नियम लागू होते हैं।
चयनित खिलाड़ियों को आगे के स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा। राज्य स्तर पर सफल खिलाड़ियों को पुरस्कार और उन्नत प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका मकसद प्रतिभावान बच्चों को खेल में आगे बढ़ने और भविष्य में उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचने के लिए तैयार करना है।
स्कूलों में इस तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित होने से बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नियमित अभ्यास की आदत भी विकसित हो सकती है। खेल गतिविधियों से उनका शारीरिक विकास बेहतर बनाने में मदद मिलती है। साथ ही, पढ़ाई के साथ खेल को महत्व देने से बच्चों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार भविष्य का रास्ता चुनने का अवसर मिलता है।
दरभंगा में मशाल कार्यक्रम को लेकर अब नजर इस बात पर रहेगी कि कितने विद्यार्थी प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं और उनमें से कितने खिलाड़ी अगले चरण के लिए चुने जाते हैं। स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान के बाद उन्हें उचित प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलना इस अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।










