दावोस में EU प्रेसिडेंट ने भारत को सबसे बड़ी ट्रॉफी बताते हुए कहा कि भारत-यूरोपीय संघ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील के करीब हैं। यह समझौता 2 अरब लोगों के बाजार और वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा।
EU-India Deal: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस से इस बार भारत को लेकर जो संदेश निकला, उसने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी। यूरोपीय यूनियन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लिएन ने खुले मंच से भारत को दुनिया की सबसे बड़ी ट्रॉफी बताया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ अगले सप्ताह होने वाले शिखर सम्मेलन में एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं। यह समझौता सिर्फ एक डील नहीं बल्कि ग्लोबल पावर बैलेंस को बदलने वाला कदम माना जा रहा है।
भारत और ईयू की ऐतिहासिक ट्रेड डील
उर्सुला वॉन डेर लिएन ने दावोस में कहा कि प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एफटीए करीब 200 करोड़ लोगों के बाजार को जोड़ने वाला है। यह डील दुनिया की लगभग 25 प्रतिशत ग्लोबल जीडीपी को कवर करेगी। उन्होंने इसे मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स कहा। यह कोई साधारण समझौता नहीं बल्कि 18 साल पुरानी बातचीत का नतीजा है। जब इस डील पर चर्चा शुरू हुई थी तब पैदा हुआ बच्चा आज वोट डालने की उम्र में पहुंच चुका है। अब जाकर यूरोपीय यूनियन कह रहा है कि हमने ट्रॉफी हासिल कर ली है।
भारत क्यों बना सबसे बड़ी ट्रॉफी
ईयू चीफ के बयान के मुताबिक आज दुनिया तीन बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है। पहली अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी। दूसरी चीन के साथ सप्लाई चेन प्रेशर। तीसरी रूस से जुड़ा जियोपॉलिटिकल रिस्क। इन तीनों के बीच अगर कोई स्टेबल डेमोक्रेटिक और फास्ट ग्रोइंग पार्टनर है तो वह सिर्फ भारत है। यही वजह है कि यूरोपीय यूनियन भारत को लेकर उत्साहित है। अमेरिका नर्वस नजर आ रहा है और चीन अलर्ट मोड में चला गया है। आज भारत के साथ ट्रेड डील करना सिर्फ बिजनेस नहीं बल्कि ग्लोबल स्टेटस सिंबल बन चुका है।
दावोस से वाशिंगटन तक गूंज
जब दावोस में भारत और ईयू की इस बड़ी डील का ऐलान हो रहा था, तब इसकी गूंज वाशिंगटन तक सुनाई दी। कहा जाने लगा कि भारत को लेकर इतने बड़े ऐलान देखकर अमेरिका असहज हो गया। इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आधिकारिक विमान एयर फोर्स वन दावोस के लिए उड़ान भरने के बाद अचानक वापस वाशिंगटन लौट आया। इस घटनाक्रम ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया।

एयर फोर्स वन का अचानक यू टर्न
आधिकारिक तौर पर व्हाइट हाउस की ओर से बताया गया कि एयर फोर्स वन में मामूली तकनीकी खराबी आ गई थी। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद एक मामूली विद्युत समस्या का पता लगाया। एहतियात के तौर पर विमान को जॉइंट बेस एंड्रयूज वापस लाने का फैसला किया गया। रात के समय अमेरिकी सरकार का एक काफिला मैरीलैंड स्थित बेस की ओर जाते हुए देखा गया, जिससे अटकलें और तेज हो गईं।
विमान में क्या हुआ था
विमान में सवार एक पत्रकार ने बताया कि उड़ान भरने के कुछ देर बाद प्रेस केबिन की बत्तियां अचानक बुझ गई थीं। हालांकि उस समय कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। बाद में व्हाइट हाउस की रैपिड रिस्पॉन्स टीम ने सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि समस्या उड़ान के दौरान ही सामने आई थी। पोस्ट में कहा गया कि एहतियात के तौर पर एयर फोर्स वन वापस लौट रहा है। राष्ट्रपति और उनकी टीम दूसरे विमान से स्विट्जरलैंड के लिए रवाना होगी। विमान बदलने के बाद ट्रंप ने अपनी दावोस यात्रा दोबारा शुरू की।
ट्रंप और डील्स की राजनीति
डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी अपनी डील्स को लेकर बड़े दावे करते रहे हैं। जब उन्होंने अमेरिका की किसी बड़ी ट्रेड डील की घोषणा की थी तब उसे बिगेस्ट डील एवर और ग्रेटेस्ट डील एवर बताया था। अब ईयू चीफ भारत के साथ होने वाली डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कह रही हैं। इसका साफ संदेश यह है कि आपकी डील बड़ी थी, हमारी उससे भी बड़ी है। जब उर्सुला वॉन डेर लिएन फर्स्ट मूवर एडवांटेज की बात करती हैं तो यह सीधे तौर पर ट्रंप को संदेश माना जा रहा है।
फर्स्ट मूवर एडवांटेज का मतलब
ईयू का कहना है कि जब तक अमेरिकी कंपनियां भारत में कदम रखेंगी, तब तक यूरोपीय कंपनियां वहां अपनी मजबूत जड़ें जमा चुकी होंगी। सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और टेक सेक्टर में ईयू पहले ही आगे निकल जाएगा। यह वही रणनीति है जिसे फर्स्ट मूवर एडवांटेज कहा जाता है। इसका मतलब है कि जो पहले पहुंचा, वही लंबे समय तक बाजार पर कब्जा बनाए रखेगा।












