Delhi Pollution Alert: Beijing Model से क्या होगा प्रदूषण कम? आइए जानें

Delhi Pollution Alert: Beijing Model से क्या होगा प्रदूषण कम? आइए जानें

दिल्ली-एनसीआर की हवा गंभीर स्तर पर पहुंच गई है। AQI 500 पार, सरकारी आदेश के तहत 50% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने को कहा गया। प्रदूषण नियंत्रण के लिए बीजिंग मॉडल से प्रेरणा लेने पर विचार जारी है।

Delhi Pollution Alert: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण गंभीर रूप ले चुका है। राजधानी के आसमान में धुआं और धूल की चादर छा गई है। AQI स्तर 500 पार कर गया है और हर घर में खांसी, आंखों में जलन जैसी शिकायतें बढ़ गई हैं। स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने ग्रेड-3 लागू किया है। सरकारी और निजी दफ्तरों को 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ वर्क फ्रॉम होम करने का आदेश दिया गया है।

बीजिंग ने प्रदूषण पर कैसे किया काबू

कभी बीजिंग की हवा दिल्ली से भी अधिक प्रदूषित थी। 2007 से 2013 तक शहर में PM2.5 स्तर खतरनाक हो गया था और AQI 755 तक पहुंच चुका था। चीन ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और सख्त नीतियों और योजनाओं के जरिए हवा साफ करना शुरू किया। इसके तहत उद्योगों को स्थानांतरित किया गया, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ाया गया, वाहनों पर कड़े नियम लागू किए गए और नए सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का विस्तार किया गया।

उद्योगों और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव

बीजिंग के आसपास के छोटे और भारी प्रदूषण वाले उद्योगों को बंद किया या अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया। स्टील, सीमेंट और कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को स्वच्छ ऊर्जा और नई टेक्नोलॉजी अपनाने पर मजबूर किया गया। 2017 तक बीजिंग ने अपना आखिरी कोयला आधारित बिजली संयंत्र बंद कर दिया। घरों में सर्दियों में कोयले के बजाय गैस और इलेक्ट्रिक हीटिंग का उपयोग किया जाने लगा।

वाहनों और सार्वजनिक परिवहन पर नियंत्रण

वाहनों से निकलने वाले धुएं को कम करने के लिए यूरोपीय मॉडल अपनाया गया। ऑड-ईवन योजना लागू की गई, नए वाहनों की संख्या और समय सीमा तय की गई। इलेक्ट्रिक वाहनों को सब्सिडी दी गई और मेट्रो व इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क का विस्तार किया गया।

रियल टाइम मॉनिटरिंग और नियमों का पालन

बीजिंग में पूरे शहर में रियल टाइम एयर-क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया। डेटा सार्वजनिक किया गया और प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और जरूरत पड़ने पर जेल जैसी सजा लागू की गई। स्थानीय अधिकारियों के मूल्यांकन में पर्यावरण सुधार को शामिल किया गया।

हरित क्षेत्र और ग्रीन बेल्ट का विकास

बीजिंग के आसपास बड़े ग्रीन बेल्ट, पार्क और जंगल विकसित किए गए। इससे धूलभरी आंधियों और वायु प्रदूषण में कमी आई।

दिल्ली में क्या लागू हो सकता है?

डॉ. दीपांकर साहा के अनुसार, बीजिंग और दिल्ली की भौगोलिक, प्रशासनिक और राजनीतिक परिस्थितियाँ अलग हैं। भारत में चीन जैसी तानाशाही नहीं है, इसलिए हर नियम तुरंत लागू करना मुश्किल है।

फिर भी दिल्ली में कुछ कदम तुरंत उठाए जा सकते हैं:

  • निर्माण मलबा और ठोस कचरे पर निगरानी
  • उत्सर्जन और धूल नियंत्रण
  • मौसम पूर्वानुमान का उपयोग कर प्रदूषण रोकने की योजना
  • पूरे क्षेत्र में समान नियम लागू करना
  • वाहन-मुक्त क्षेत्र घोषित करना
  • पराली, कचरा और टायर जलाने पर पूरी रोक
  • नदी किनारे और मिट्टी की ऊपरी परत का बेहतर प्रबंधन
  • उद्योगों के उत्सर्जन को नियंत्रित करना
  • जनता की भागीदारी (People’s Participation) सुनिश्चित करना

इन उपायों से दिल्ली की हवा को साफ करने में मदद मिल सकती है और बीजिंग मॉडल से प्रेरणा लेकर प्रदूषण नियंत्रण संभव है।

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