दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) में देव चौधरी के चयन को लेकर उठा विवाद अब दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के लिए परेशानी का सबब बन गया है। मामले के बाद DDCA ने उस नियम की समीक्षा करने का फैसला किया है, जिसके तहत प्रत्येक फ्रेंचाइजी नीलामी के बाद दिल्ली लीग से अपनी पसंद के तीन खिलाड़ियों को टीम में शामिल कर सकती थी।
स्पोर्ट्स न्यूज़: Delhi Premier League (DPL) में एक खिलाड़ी को नीलामी के बाद सीधे टीम में शामिल किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। देव चौधरी की एंट्री ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ यानी DDCA की चयन प्रक्रिया और फ्रेंचाइजी को दिए गए विशेष अधिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले के सामने आने के बाद DDCA ने संबंधित नियम की समीक्षा करने का फैसला किया है।
मौजूदा नियम के तहत DPL की प्रत्येक फ्रेंचाइजी नीलामी पूरी होने के बाद दिल्ली लीग से अपनी पसंद के अधिकतम तीन खिलाड़ियों को टीम में शामिल कर सकती थी। इसके लिए संबंधित खिलाड़ी का DDCA की लीग में कम से कम पांच मुकाबले खेलना अनिवार्य था। इसी प्रावधान के तहत देव चौधरी को New Delhi Tigers ने अपनी टीम में जगह दी।
नीलामी के बिना टीम में शामिल हुए देव चौधरी
आठ टीमों वाली दिल्ली प्रीमियर लीग में देव चौधरी को नीलामी प्रक्रिया के बाहर टीम में शामिल किया गया। यह फैसला सामने आने के बाद क्रिकेट से जुड़े लोगों के बीच चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चर्चा शुरू हो गई। न्यू दिल्ली टाइगर्स का मौजूदा टूर्नामेंट प्रदर्शन भी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है। टीम ने अपने 10 मुकाबलों में केवल एक जीत दर्ज की है और अंक तालिका में सबसे नीचे है। टीम प्रबंधन ने देव चौधरी को दो मैचों में बतौर सलामी बल्लेबाज मैदान पर उतारा।
उनके प्रदर्शन की बात करें तो South Delhi Superstarz के खिलाफ देव महज दो गेंदों का सामना कर बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद West Delhi Lions के खिलाफ उन्होंने 24 गेंदों पर 16 रन बनाए। इसी पारी के दौरान पावरप्ले में स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ लगातार पांच डॉट गेंद खेलने को लेकर भी उनकी बल्लेबाजी पर चर्चा हुई।
हालांकि, केवल शुरुआती मैचों के प्रदर्शन के आधार पर किसी खिलाड़ी की क्षमता का अंतिम आकलन करना उचित नहीं होगा, लेकिन उनकी टीम में एंट्री के तरीके ने विवाद को जरूर बढ़ा दिया है।
श्याम शर्मा ने पहले ही जताई थी आपत्ति

DDCA एपेक्स काउंसिल के सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम शर्मा ने इस नियम को लेकर पहले ही चिंता जताने का दावा किया है। उनका कहना है कि उन्होंने पांच मैच खेलने की पात्रता वाले प्रावधान का विरोध किया था। उनके अनुसार, केवल इतनी कम संख्या में मैच खेलने की शर्त से चयन प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होने की संभावना बन सकती है।
शर्मा ने दावा किया कि देव चौधरी का मामला इस नियम से जुड़े संभावित जोखिम का एक उदाहरण है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि सिफारिश या अन्य आधार पर कुछ और खिलाड़ी भी नीलामी प्रक्रिया से बाहर रहते हुए फ्रेंचाइजी में जगह बना सकते हैं।
देव चौधरी के क्रिकेट रिकॉर्ड पर भी चर्चा
देव चौधरी की DPL में एंट्री के साथ उनके पुराने क्रिकेट रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने दिल्ली अंडर-19 स्तर के ट्रायल में हिस्सा लिया था। एक क्लब से जुड़े सूत्र के अनुसार, देव ने स्पोर्टिंग क्लब की ओर से कुछ लीग मुकाबले खेले थे। हालांकि, उनका प्रदर्शन कथित तौर पर प्रभावशाली नहीं रहा और उन्हें आगे के अवसर नहीं मिले। इन दावों पर स्वतंत्र रूप से पुष्टि जरूरी है और खिलाड़ी के प्रदर्शन का मूल्यांकन व्यापक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए।
न्यू दिल्ली टाइगर्स के कोच हैं राजकुमार शर्मा
न्यू दिल्ली टाइगर्स की कोचिंग जिम्मेदारी राजकुमार शर्मा के पास है, जिन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। ऐसे में टीम में देव चौधरी को शामिल किए जाने के फैसले ने भी क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है। DDCA सचिव अशोक शर्मा ने संकेत दिया है कि टूर्नामेंट खत्म होने के बाद इस नियम की समीक्षा की जाएगी। इसका मतलब है कि मौजूदा विवाद के बाद संघ नीलामी के बाद खिलाड़ियों को सीधे टीम में शामिल करने की प्रक्रिया में बदलाव पर विचार कर सकता है।










